किराएदार, चौकीदार और नौकर रख रहे हैं तो हो जाएं सावधान! जयपुर पुलिस ने जारी किया बड़ा आदेश
जयपुर में किरायेदारों, घरेलू नौकरों, ड्राइवरों, चौकीदारों और निजी कर्मचारियों को बिना पुलिस सत्यापन रखने पर कार्रवाई हो सकती है. जयपुर पुलिस आयुक्तालय ने मकान मालिकों और संस्थान संचालकों को 15 दिन के भीतर संबंधित थाने में जानकारी देने और पुलिस वेरिफिकेशन करवाने का निर्देश दिया है. पहचान पत्र, मोबाइल नंबर और व्यक्तिगत जानकारी का रिकॉर्ड रखना जरूरी होगा.
Rajasthan Crime: जयपुर में अब किरायेदार, चौकीदार और घरेलू स्टाफ को बिना पुलिस सत्यापन रखना भारी पड़ सकता है. जयपुर पुलिस आयुक्तालय ने मकान मालिकों और संस्थान संचालकों के लिए आदेश जारी किया है. किरायेदार, घरेलू नौकर, ड्राइवर, चौकीदार, निजी कर्मचारी और सैल्समेन समेत अन्य सहायकों की पूरी जानकारी रखना अनिवार्य होगा. साथ ही स्थानीय थाने से पुलिस वेरिफिकेशन भी करवाना होगा. इसके लिए 15 दिन का मौका दिया गया है.
मकान मालिकों और संस्थान संचालकों को रखना होगा पूरा रिकॉर्ड
जयपुर में अब मकान मालिकों और संस्थान संचालकों को अब अपने यहां रहने और काम करने वाले लोगों की पूरी जानकारी रखनी होगी. पुलिस आयुक्तालय के मुताबिक, कई जगह बिना पुलिस सत्यापन और पर्याप्त व्यक्तिगत जानकारी के किरायेदारों और घरेलू कर्मचारियों को रखा जा रहा है. पुलिस ने आदेश में घरेलू स्टाफ से जुड़ी पूर्व की आपराधिक घटनाओं का भी उल्लेख किया है.
किरायेदार से लेकर ड्राइवर तक का पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी
किरायेदार, घरेलू नौकर, ड्राइवर, चौकीदार, निजी कर्मचारी और सेल्समैन सहित सभी लोगों का सत्यापन करवाना जरूरी होगा. मकान मालिक और संस्थान संचालकों को इनकी पूरी व्यक्तिगत जानकारी, मोबाइल नंबर और अधिकृत पहचान पत्र का रिकॉर्ड रखना होगा. इसके साथ ही स्थानीय पुलिस थाने से अनिवार्य रूप से पुलिस सत्यापन भी करवाना होगा.
व्यक्ति को रखने के 15 दिन के भीतर देनी होगी जानकारी
पुलिस के आदेश के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति को रखने के बाद अधिकतम 15 दिन के भीतर उसकी जानकारी संबंधित पुलिस थाने में देनी होगी. संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर पुलिस को तत्काल सूचना देनी होगी.
पुलिस ने क्यों जारी किया सख्त आदेश?
पुलिस का कहना है कि बिना सत्यापन रखे गए लोगों द्वारा पूर्व में गंभीर आपराधिक वारदातों को अंजाम दिए जाने के मामले सामने आए हैं. इस प्रकार के व्यक्तियों द्वारा पूर्व में हत्या, हत्या का प्रयास, लूटपाट, जहरखुरानी चोरी आदि गंभीर प्रकृति के अपराध करना सामने आए हैं. पुलिस का कहना है कि इस प्रकार के लोगों के वेश में अलगाव वादी, आतंकवादी, समाज और राष्ट्र विरोधी तत्व भी छुपे हो सकते हैं. इनके द्वारा आपराधिक मंसूबों को पूरे करने की प्रबल संभावनाएं रहती है.
करधनी, मानसरोवर समेत कई थानों के पुराने मामलों का हवाला
आदेश में जयपुर के करधनी, करण विहार, मानसरोवर, अशोक नगर सहित विभिन्न थानों में दर्ज कुछ पुराने मामलों का भी हवाला दिया गया है. पुलिस के मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य कानून-व्यवस्था और लोक व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
आदेश नहीं माना तो BNS की धारा 223 के तहत कार्रवाई
आदेश की पालना नहीं करने वाले व्यक्ति या कंपनी-संस्था के संचालन और प्रबंधन से जुड़े लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दंडनीय कार्रवाई की जाएगी. आदेश 30 सितंबर 2026 से 28 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा या इससे पहले निरस्त होने पर उस तारीख तक लागू रहेगा.
मकान मालिकों को समय में पूरी करनी होगी प्रक्रिया
जयपुर पुलिस ने साफ किया है कि पहचान छिपाकर या बिना सत्यापन किसी को रखने की लापरवाही अब भारी पड़ सकती है. मकान मालिकों और संस्थान संचालकों को निर्धारित अवधि में पुलिस सत्यापन और रिकॉर्ड संधारण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी.