मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में 7 से 15 सितंबर तक मनाया जाएगा खास उत्सव, जानें पूरा कार्यक्रम
जयपुर के मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में 7 से 15 सितंबर तक 9 दिवसीय गणेशोत्सव मनाया जाएगा. इस दौरान 348 किलो पंचामृत से अभिषेक, 3 हजार किलो घी से हजारों मोदकों की झांकी और 3500 किलो मेहंदी से गणेशजी का सिंजारा होगा. 14 सितंबर को जन्मोत्सव पर गणेशजी स्वर्ण मुकुट और नौलखा हार से सजे नजर आएंगे. 15 सितंबर को भव्य नगर भ्रमण के साथ उत्सव का समापन होगा.
Ganesh Chaturthi 2026: जयपुर का मोतीडूंगरी गणेश मंदिर का वो दरबार, जहां नौ दिन तक हर दिन आस्था का नया रंग नजर आएगा. 348 किलो पंचामृत से गणेशजी का अभिषेक होगा तो 3 हजार किलो घी से बने हजारों मोदक आकार लेंगे, तो कहीं 3500 किलो मेहंदी से बप्पा का सिंजारा होगा. 14 सितंबर को जन्मोत्सव पर गणेशजी स्वर्ण मुकुट और नौलखा हार से सजे नजर आएंगे और अगले दिन भक्तों को आशीर्वाद देने नगर भृमण पर निकलेंगे.
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी के उत्सव की शुरुआत 7 सितंबर से होने जा रही है. इस बार सिर्फ पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा, संगीत, नृत्य और भोग की भव्य झांकियों का 9 दिवसीय उत्सव होगा. मोतीडूंगरी गणेश मंदिर महंत कैलाश शर्मा ने बताया की 7 सितंबर से शुरू होने वाला उत्सव 15 सितंबर को भगवान गणपति के नगर भ्रमण के साथ पूरा होगा. इन नौ दिनों में हर दिन गणेशजी के दरबार का रंग बदला नजर आएगा.
इस उत्सव में भगवान गजानन का 348 किलो पंचामृत से अभिषेक तो कभी हजारों किलो सामग्री से बने मोदकों की झांकी सजेगी. 14 सितंबर को भगवान गजानन का जन्मोत्सव मनाया जाएगा. इसी दिन चांदी के सिंहासन पर विराजित गणेश जी महाराज जब स्वर्ण मुकुट और नौलखा हार से सुसज्जित होकर अपने भक्तों को दर्शन देंगे. ध्रुपद और कथक की प्रस्तुतियां भी उत्सव को शास्त्रीय कला से जोड़ेंगी.
9 दिवसीय उत्सव
7 सितंबर:कलश यात्रा से होगा शुभारंभ
उत्सव की शुरुआत 7 सितंबर को सुबह 9 बजे कलश यात्रा और जलाभिषेक के साथ होगी. इसके बाद 8 सितंबर को पुष्य नक्षत्र पर भगवान गणेशजी का 348 किलो पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा. इसमें 251 किलो दूध, 50 किलो दही, 25 किलो बूरा, 11 किलो शहद और 11 किलो घी शामिल होगा. इसी दिन केले की विशेष झांकी और शाम 6 बजे ध्रुपद गायन होगा.
9 सितंबर: 3 हजार किलो घी से बनेंगे मोदक, दो 251-251 किलो के होंगे
उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण 9 सितंबर को मोदकों की भव्य झांकी होगी. इसमें 251-251 किलो के दो विशाल मोदक, 51-51 किलो के पांच मोदक, 21-21 किलो के 21 मोदक और 1.25 किलो के 1100 मोदक सहित हजारों छोटे मोदक सजाए जाएंगे. मोदक तैयार करने में करीब 3 हजार किलो शुद्ध घी, 3 हजार किलो बेसन, 9 हजार किलो शक्कर और 100 किलो सूखे मेवों का इस्तेमाल होगा. भक्त सुबह 5 बजे से झांकी के दर्शन कर सकेंगे. इस दिन मंदिर में बाहर से लाया गया प्रसाद नहीं चढ़ाया जाएगा. .
10 से 12 सितंबर: फल, सब्जी और फूलों में दिखेगी प्रकृति की भक्ति
10 सितंबर को फलों की झांकी, 11 सितंबर को सब्जियों की झांकी और 12 सितंबर को फूलों की झांकी सजेगी. तीनों दिन शाम 6 बजे कथक नृत्य की प्रस्तुतियां होंगी. वहीं, 8 से 12 सितंबर तक ध्रुपद, सुगम संगीत और कथक के जरिए कलाकार गणेशजी को अपनी कला समर्पित करेंगे.
13 सितंबर : 3500 किलो मेहंदी से सिंजारा
13 सितंबर को गणेशजी का मेहंदी पूजन और सिंजारा होगा. सोजत की करीब 3500 किलो मेहंदी गणेशजी को धारण कराई जाएगी. पूजा के बाद रात 7:30 बजे मेहंदी प्रसाद का वितरण पांच स्थानों से होगा. महिलाओं और कन्याओं के लिए डोरा और मेहंदी की अलग व्यवस्था रहेगी. इसी दिन गणेशजी का विशेष श्रृंगार होगा. भगवान को साल में सिर्फ गणेश चतुर्थी पर धारण कराया जाने वाला स्वर्ण मुकुट पहनाया जाएगा. चांदी के सिंहासन पर विराजित गणेशजी को विशेष पोशाक और नौलखा हार भी धारण कराया जाएगा. मोती, सोना, पन्ना और माणक से सजे इस हार को महंत परिवार ने तीन महीने में तैयार किया है.
14 सितंबर: जन्मोत्सव पर 19 घंटे से ज्यादा दर्शन
गणेश चतुर्थी पर 14 सितंबर को भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाएगा. सुबह 4 बजे मंगला आरती से रात 11:40 बजे शयन आरती तक दर्शन होंगे. विशेष पूजन सुबह 11:20 बजे, श्रृंगार आरती 11:30 बजे, भोग आरती दोपहर 2:15 बजे और संध्या आरती शाम 7 बजे होगी. भोग के दौरान दोपहर 1:30 से 2 बजे तक पट मंगल रहेंगे.
15 सितंबर: गजानन निकलेंगे नगर भ्रमण पर
उत्सव का समापन 15 सितंबर को भगवान गणेशजी के नगर भ्रमण के साथ होगा. जब मोतीडूंगरी गणेशजी महाराज नगर भ्रमण पर निकलेंगे तो यह केवल शोभायात्रा नहीं होगी, यह जयपुर की सड़कों पर बप्पा का आशीर्वाद बरसने जैसा होगा. शोभायात्रा मोतीडूंगरी मंदिर से शाम को रवाना होकर एमडी रोड, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, गणगौरी बाजार और नाहरगढ़ रोड होते हुए गढ़ गणेश मंदिर पहुंचेगी. हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकलेगा यह नगर भ्रमण शहर के लिए उत्सव का अंतिम और सबसे भव्य पड़ाव होगा.
14 सितंबर जन्मोत्सव पर आरती का समय
मंगला आरती-सुबह 4 बजे
श्रृंगार आरती-सुबह 11:30 बजे
भोग आरती - दोपहर 2:15 बजे
भोग के लिए दोपहर 1.30 से 2:00 बजे तक पट मंगल रहेंगे
संध्या आरती - शाम 7 बजे
शयन आरती - रात्रि 11.40 बजे
इस तरह रहेगी निगरानी
1. दर्शनार्थियों की सुरक्षा के लिए 6 डी.एफ.एम.डी. और 6 एच.एस. एम.डी. की व्यवस्था मन्दिर द्वारा दर्शनार्थियों के लिए की गई है.
2. मन्दिर प्रबंधन की ओर से 72 क्लोज सर्किट कैमरें से सभी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी और 30 दिनों की रिकार्डिंग भी की जाएगी. सभी कैमरे नए लगाये गए हैं.
3. दर्शन के लिए 6 लाइनें मन्दिर में आने की और 8 लाइनें मन्दिर से वापस जाने की व्यवस्था, एक लाइन की एंट्री पास से होगी.
4. एमडी रोड, जेएलएन मार्ग और तख्तेशाही रोड से होगी दर्शनों के लिए एंट्री.
5. निशक्तजनों और वृद्धजनों के लिए राउंड द क्लॉक 100 ई-रिक्शा चलाए जाएंगे.
6. 4 इलेक्ट्रिक लो-फ्लोर बसें भी श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध रहेंगी.
7. 500 स्वयंसेवक व्यवस्था के लिए लगाये जाएगें.
6. जे.डी.ए. सर्किल से मन्दिर तक और एमडी रोड़ पर भैरव पथ से बेरिकेडिंग रहेगी. साथ में रिजर्व बैंक से मंदिर तक बेरिकेटिंग की व्यवस्था की गई है.
बहरहाल, नौ दिनों तक मोतीडूंगरी में आस्था का जो दीप जलेगा. उसका उजाला 15 सितंबर को जयपुर की गलियों तक पहुंचेगा. जब बप्पा नगर भ्रमण पर निकलेंगे, तो हजारों आंखें उनके दर्शन को तरसेंगी, हाथ अपने आप जुड़ जाएंगे और हर दिल से एक ही प्रार्थना निकलेगी-बप्पा, सबके घर सुख-शांति रखना.
रिपोर्ट- दीपक गोयल