झुंझुनूं SP कावेंद्र सिंह हाजिर हों... विधायक श्रवण कुमार के बेटे से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने दिए व्यक्तिगत पेशी के आदेश
सूरजगढ़ विधायक श्रवण कुमार के बेटे जयप्रकाश से जुड़े कथित फर्जी हाईकोर्ट आदेश मामले में अदालत सख्त है. हाईकोर्ट ने झुंझुनूं SP को 6 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर FIR की तथ्यात्मक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं.
राजस्थान के सूरजगढ़ से कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार के बेटे जयप्रकाश से जुड़े कथित फर्जी हाईकोर्ट आदेश मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. मतदाता सूची में नाम बहाल कराने और पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति से जुड़े इस मामले में हाईकोर्ट ने झुंझुनूं के पुलिस अधीक्षक को 6 नवंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं. SP को दर्ज FIR की तथ्यात्मक रिपोर्ट भी पेश करनी होगी. अदालत ने स्पष्ट किया है कि 16 अक्टूबर को ऐसा कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया गया था, जिसमें जयप्रकाश का नाम मतदाता सूची में बहाल करने या उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति देने की बात कही गई हो.
16 अक्टूबर के आदेश को बताया कूटरचित
मामला ग्राम पंचायत जीणी, पंचायत समिति सूरजगढ़ के वार्ड नंबर 05 की मतदाता सूची से जयप्रकाश का नाम हटाए जाने से जुड़ा है. जयप्रकाश ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नाम हटाने को चुनौती दी थी. इसके बाद 16 अक्टूबर 2026 के एक कथित अंतरिम आदेश में उनका नाम मतदाता सूची में तत्काल बहाल करने और पंचायत चुनाव में नामांकन दाखिल करने की अनुमति देने की बात सामने आई. हालांकि, हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने साफ किया कि 16 अक्टूबर को अदालत ने केवल मामले को 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए थे. उस दिन कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई थी.
व्हाट्सएप से रिटर्निंग अधिकारी को भेजा गया आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) ने विस्तृत जांच की. जांच रिपोर्ट में सामने आया कि कथित अंतरिम आदेश हाईकोर्ट की मूल फाइल में मौजूद नहीं था. यह आदेश अदालत की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड नहीं किया गया था. रिपोर्ट में दस्तावेज को कूटरचित बताया गया है.
जांच के अनुसार, यह कथित आदेश एक व्हाट्सएप मोबाइल नंबर से रिटर्निंग अधिकारी को भेजा गया था. यह नंबर उमेश कुमार के नाम पर पंजीकृत बताया गया है. हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि कथित आदेश किसने तैयार किया और इसके निर्माण या प्रसार में याचिकाकर्ता अथवा किसी अन्य व्यक्ति की क्या भूमिका रही.
डिजिटल साक्ष्यों की जांच जरूरी
रजिस्ट्रार (न्यायिक) की रिपोर्ट में कहा गया है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए मूल इलेक्ट्रॉनिक फाइल, मेटाडेटा, व्हाट्सएप बातचीत और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच जरूरी है. अभी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका निर्णायक रूप से स्थापित नहीं हुई है.
6 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता ने बताया कि जिला निर्वाचन अधिकारी झुंझुनूं के निर्देश पर संबंधित रिटर्निंग अधिकारी ने इस मामले में FIR दर्ज करवाई है. वहीं, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि कथित आदेश की कूटरचना को लेकर 27 अक्टूबर को ई-मेल के जरिए शिकायत की गई थी.
राज्य सरकार की ओर से जीए-सह-एएजी राजेश चौधरी ने बताया कि जांच एजेंसी FIR की जांच कर रही है और अगली सुनवाई पर तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश की जाएगी. इसके बाद न्यायमूर्ति आनंद शर्मा की पीठ ने झुंझुनूं SP को 6 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए. अब इस मामले की अगली सुनवाई भी 6 नवंबर को होगी.