SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

Explainer: 67,500 के नकली नोटों से शुरू हुई जांच मुख्य सरगना तक कैसे पहुंची? एक्सप्लेनर में पढ़ें अंदर की बात!

Kotputli Fake Currency Case: कोटपूतली में 67,500 रुपए के जाली नोट मिलने से शुरू हुई पुलिस जांच अब कथित मुख्य सरगना तक पहुंच गई है. 23 अगस्त को दो आरोपियों से पूछताछ के बाद 24 अगस्त को सप्लायर चिराग भारद्वाज को पकड़ा गया. इसके बाद पुलिस ने नेटवर्क के कथित मुख्य सरगना संजीव अहलावत को 28 अगस्त को हरियाणा के झज्जर से गिरफ्तार किया. पुलिस अब जाली नोटों के निर्माण, सप्लाई और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है.

Edited By Ansh Raj
Published: Aug 29, 2026, 12:15 PM IST | Updated: Sep 26, 2026, 12:56 PM IST
Image Credit: Rajasthan
Join

Explainer Fake Notes Network : जाली नोटों के कारोबार की एक कड़ी पकड़ में आने के बाद कोटपूतली पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुटी है. 23 अगस्त को बाजार में जाली नोट चलाने के आरोप में दो लोगों की गिरफ्तारी से शुरू हुई कार्रवाई चार दिन के भीतर एक सप्लायर और फिर कथित मुख्य सरगना तक पहुंच गई. पुलिस ने 28 अगस्त को हरियाणा के झज्जर जिले से संजीव अहलावत को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार वह जाली नोट सप्लाई करने वाली गैंग का कथित मुख्य सरगना है.


मामले में पुलिस इससे पहले निशीकान्त गुप्ता, राहुल सैनी और चिराग भारद्वाज को गिरफ्तार कर चुकी है. शुरुआती कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों के कब्जे से 500-500 रुपए के 135 जाली नोट मिले थे. इन नोटों की कुल कीमत 67,500 रुपए थी. इसके अलावा जाली नोटों के बदले बाजार से हासिल की गई 14,440 रुपए की असली करेंसी भी पुलिस ने जब्त की थी. अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि ये जाली नोट आखिर कहां तैयार किए जा रहे थे, कोटपूतली और आसपास के इलाकों तक इन्हें कौन पहुंचा रहा था और इस काम में कितने लोग शामिल हैं.


23 अगस्त को कहां से शुरू हुई पूरी कार्रवाई?
पुलिस के अनुसार 23 अगस्त को कोटपूतली कस्बे में अवैध गतिविधियों को लेकर आसूचना जुटाई जा रही थी. इसी दौरान पुलिस टीम ने दो संदिग्ध व्यक्तियों को डिटेन किया. उनकी तलाशी लेने पर 500 रुपए के 135 जाली नोट बरामद हुए. नोटों की गिनती की गई तो उनकी कुल कीमत 67,500 रुपए निकली. पुलिस ने जाली नोटों को जब्त कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद पूछताछ शुरू हुई. यहीं से पुलिस को इस मामले के पीछे किसी बड़े नेटवर्क के होने की जानकारी मिलने लगी.


पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपी पिछले दो दिनों से कोटपूतली के बाजार में इन जाली नोटों को चला रहे थे. वे इन नोटों के बदले असली करेंसी हासिल कर रहे थे. जांच के दौरान ऐसी ही असली रकम में से 14,440 रुपए भी बरामद किए गए. इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने प्रकरण संख्या 440/2026 दर्ज किया और भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 178, 179 और 180 के तहत अनुसंधान शुरू किया.

ये भी पढ़ें- KYC, बिजली बिल और चालान के नाम पर ठगी! APK फाइल डाउनलोड करते ही शुरू हो जाता है असली खेल, जानें इससे बचने के तरीके
 


जाली नोट मिलने के बाद पुलिस ने क्या किया?
जाली नोट मिलने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल इनके स्रोत को लेकर था. सिर्फ बाजार में जाली नोट चलाने वाले लोगों को पकड़ना ही जांच का अंतिम बिंदु नहीं था. पुलिस यह जानना चाहती थी कि उन्हें ये नोट मिले कहां से.

इसी दिशा में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की गई और आसूचना जुटाई गई. पूछताछ और जांच के दौरान पुलिस को एक ऐसे व्यक्ति के बारे में जानकारी मिली, जो जाली नोटों की सप्लाई से जुड़ा हुआ बताया गया. इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने 24 अगस्त को चिराग भारद्वाज को गिरफ्तार किया. पुलिस के अनुसार चिराग इस नेटवर्क में जाली नोटों की सप्लाई का काम करता था. वह जोनायचा खुर्द का रहने वाला है और वर्तमान में धारूहेड़ा क्षेत्र में किराये पर रह रहा था.

चिराग की गिरफ्तारी जांच में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुई. उससे पूछताछ और आगे की जांच के दौरान पुलिस को नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों के बारे में जानकारी मिली. इसी जांच के आधार पर पुलिस कथित मुख्य सरगना तक पहुंची.

ये भी पढ़ें- कत्ल से दहली राजधानी: जयपुर में मतदान के बीच बाप ने तीन बच्चों समेत मां को उतार दिया मौत के घाट
 

सप्लायर के बाद सामने आया कथित मुख्य सरगना
पुलिस के अनुसार लगातार अनुसंधान और आसूचना संकलन के दौरान जाली नोटों की सप्लाई करने वाली गैंग के कथित मुख्य सरगना की पहचान संजीव अहलावत के रूप में हुई. इसके बाद पुलिस टीम ने उसकी तलाश शुरू की. जांच का दायरा राजस्थान से बाहर हरियाणा तक पहुंचा. पुलिस ने 28 अगस्त को झज्जर जिले से संजीव अहलावत को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस के मुताबिक संजीव अहलावत की उम्र 28 वर्ष है. वह हरियाणा के झज्जर जिले के गोच्ची गांव का रहने वाला है और बेरी थाना क्षेत्र से संबंधित है. हालांकि, पुलिस की जांच अभी पूरी नहीं हुई है. संजीव की गिरफ्तारी के बाद अब उससे पूछताछ के जरिए नेटवर्क की बाकी कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.

 

अब पुलिस किन सवालों के जवाब तलाश रही है?
मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच के सामने कई सवाल हैं. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जाली नोटों का निर्माण कहां किया जाता था. इसके अलावा यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन नोटों को कोटपूतली और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी थी. पुलिस यह भी जानना चाहती है कि नेटवर्क में संजीव अहलावत की भूमिका क्या थी और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे. पूछताछ के दौरान जाली नोटों की सप्लाई के स्रोत और उनसे जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है.


एक और अहम पहलू बाजार में पहले से चलाए जा चुके जाली नोटों की संख्या का है. पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों ने कुल कितने जाली नोट बाजार में चलाए और उनके जरिए कितनी असली रकम हासिल की गई. अभी पुलिस के पास शुरुआती कार्रवाई में 67,500 रुपए के जाली नोट और उनके बदले हासिल की गई 14,440 रुपए की असली करेंसी बरामद होने की जानकारी है. लेकिन नेटवर्क के स्तर पर कुल कितनी रकम के जाली नोट बाजार में पहुंचे, इसकी जांच अभी जारी है.


मामले में अब तक चार गिरफ्तारियां
इस प्रकरण में पुलिस अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इनमें सबसे पहले निशीकान्त गुप्ता और राहुल सैनी पकड़े गए थे. दोनों पर जाली नोट चलाने से जुड़ी कार्रवाई की गई. निशीकान्त गुप्ता की उम्र 40 वर्ष है और वह बर्डोद क्षेत्र का रहने वाला है. वहीं राहुल सैनी की उम्र 22 वर्ष है और वह भी बर्डोद का निवासी है. इसके बाद 24 अगस्त को चिराग भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया. पुलिस के अनुसार उसकी भूमिका जाली नोटों की सप्लाई से जुड़ी थी.

28 अगस्त को संजीव अहलावत की गिरफ्तारी हुई. पुलिस उसे इस नेटवर्क का कथित मुख्य सरगना बता रही है. इस तरह मामले की जांच अब जाली नोट चलाने वाले लोगों से आगे बढ़कर सप्लाई और कथित नेटवर्क के स्तर तक पहुंच गई है. यहां यह भी समझना जरूरी है कि पुलिस की ओर से किसी आरोपी को मुख्य सरगना बताए जाने का मतलब यह है कि जांच में उसकी ऐसी भूमिका सामने आने का दावा किया गया है. मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी.

ये भी पढ़ें- मेयर बनते ही 'अनुसुईया गोस्वामी' ने 'ओम बिरला' के आवास की चौखट पर टेका मत्था, दंडवत प्रणाम का वीडियो वायरल  
 


67,500 के जाली नोटों से 14,440 की असली करेंसी तक
इस मामले की शुरुआती कार्रवाई में बरामदगी के दो आंकड़े खास हैं. पुलिस को आरोपियों के पास से 500 रुपए के 135 जाली नोट मिले. इन सभी नोटों की कुल कीमत 67,500 रुपए थी. पुलिस के अनुसार इन जाली नोटों को बाजार में चलाकर बदले में असली करेंसी हासिल की गई थी. ऐसी बरामद असली रकम 14,440 रुपए बताई गई है. यही बरामदगी पुलिस की शुरुआती जांच में महत्वपूर्ण आधार बनी. इसके बाद पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की कि जाली नोट आरोपियों तक कैसे पहुंचे. इसी क्रम में सप्लायर और फिर कथित मुख्य सरगना तक जांच पहुंची. अब पुलिस यह भी जांच रही है कि इस नेटवर्क के जरिए इससे पहले कितनी राशि के जाली नोट बाजार में चलाए जा चुके हैं.


पुलिस टीम ने कैसे आगे बढ़ाई जांच?
पूरी कार्रवाई कोटपूतली थाना पुलिस की विशेष टीम ने की. टीम का नेतृत्व थानाधिकारी कृष्ण कुमार ने किया. टीम में सहायक उप निरीक्षक शमशेर सिंह, सहायक उप निरीक्षक दलीप कुमार, हेड कांस्टेबल धर्मपाल, कांस्टेबल अशोक, कांस्टेबल जितेन्द्र, कांस्टेबल वीरेन्द्र और कांस्टेबल अजय शामिल रहे.


कार्रवाई जिला पुलिस अधीक्षक कोटपूतली-बहरोड़ सतवीर सिंह के निर्देश पर की गई. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नाजिम अली खान के निर्देशन और वृताधिकारी कोटपूतली मदनलाल जैफ के सुपरविजन में टीम ने कार्रवाई को आगे बढ़ाया.

शुरुआत में पुलिस ने स्थानीय स्तर पर संदिग्धों की जांच की. दो लोगों के पास से जाली नोट मिलने के बाद पूछताछ हुई. इसके बाद जांच सप्लायर तक पहुंची और फिर सूचना के आधार पर हरियाणा में कथित मुख्य आरोपी की तलाश की गई.

ये भी पढ़ें- 1 हजार CCTV और 7 जिलों में तलाश, नाथद्वारा चोरी का खुलासा, नाथद्वारा में 56 लाख की चोरी का बड़ा ट्विस्ट
 

चार दिनों में बदलती गई जांच की तस्वीर

23 अगस्त: कोटपूतली में दो आरोपियों को पकड़ा गया. उनके पास से 500 रुपए के 135 जाली नोट यानी 67,500 रुपए बरामद हुए. जाली नोट चलाकर हासिल की गई 14,440 रुपए की असली करेंसी भी जब्त हुई.

24 अगस्त: पूछताछ और जांच से मिली जानकारी के आधार पर जाली नोटों की सप्लाई से जुड़े चिराग भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया.

28 अगस्त: लगातार अनुसंधान और आसूचना संकलन के बाद पुलिस ने कथित मुख्य सरगना संजीव अहलावत को झज्जर, हरियाणा से गिरफ्तार किया.

इस तरह चार दिन में जांच जाली नोट चलाने वाले आरोपियों से शुरू होकर कथित सप्लायर और फिर मुख्य सरगना तक पहुंची.

 

ये भी पढ़ें- RCA चुनाव से पहले 363 पन्नों का राज! 160 करोड़ के स्टेडियम से 6.70 करोड़ के भुगतान तक उठे सवाल
 

आगे क्या होने वाला है?
संजीव अहलावत की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस का फोकस पूछताछ और नेटवर्क की बाकी कड़ियों पर है. पुलिस के अनुसार यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जाली नोट कहां बनाए जाते थे और उनका स्रोत क्या था.

इसके साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कोटपूतली तक नोटों की सप्लाई किस माध्यम से पहुंचती थी और इस काम में कितने लोग शामिल थे. बाजार में पहले से चलाए गए जाली नोटों की संख्या और उनके बदले हुए लेन-देन का भी पता लगाया जा रहा है. अभी तक की कार्रवाई से पुलिस को नेटवर्क की कुछ अहम कड़ियां हाथ लगी हैं. लेकिन जाली नोटों के निर्माण स्थल, सप्लाई के पूरे रास्ते और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों को लेकर जांच जारी है.

इस मामले में 23 अगस्त को 67,500 रुपए के जाली नोट मिलने से शुरू हुई कार्रवाई 24 अगस्त को सप्लायर की गिरफ्तारी और 28 अगस्त को कथित मुख्य सरगना की गिरफ्तारी तक पहुंच चुकी है. अब पुलिस की पूछताछ से यह सामने आना बाकी है कि इस नेटवर्क की जड़ें कितनी दूर तक फैली हुई हैं और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

अंश राज Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर उनकी पैनी नजर रहती है. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर से जुड़ी खबरों में उनकी खास दिलचस्पी है. नई चीजों को सीखने की फिराक में रहते हैं. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनावों और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बड़े बयान तक, अंश राज खबरों की नब्ज पर नजर रखते हैं. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करना और किसी भी स्टोरी को ज्यादा प्रभावी और रोचक अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है. खबर को सिर्फ लिखना नहीं, बल्कि उसे बेहतर तरीके से पैकेज कर दर्शकों तक पहुंचाना उनके काम का अहम हिस्सा है.  डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव रखने वाले अंश राज इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है. खबरों की गंध को सबसे पहले पहचानना, उसकी तह तक पहुंचना और उसे सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे बेहतर तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना... यही अंश राज की पहचान है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES