चूरू के अस्पताल में कुदरत का करिश्मा, बिना ऑपरेशन महिला ने दिया 3 बच्चों को जन्म, डॉक्टर भी रह गए दंग
चूरू के सरदारशहर में एक महिला ने नॉर्मल डिलीवरी से तीन बच्चों को जन्म दिया है. सरदारशहर राजकीय उपजिला अस्पताल में तीनों बच्चे और मां स्वस्थ्य है. डॉक्टर के मुताबिक ये अपने आप में काफी दुर्लभ मामला रहा जो हमारे लिए भी चुनौतीपूर्ण था.
Churu News : सरदारशहर के उपजिला अस्पताल में वार्ड नंबर 1 में रहने वाली 30 साल की राधा ने तीन बच्चों यानी की दो बेटियों और एक बेटे को जन्म दिया. खास बात ये रही तीनों बच्चों का जन्म नॉर्मल डिलीवरी से हुआ है. प्रसव के बाद मां और तीनों नवजात पूरी तरह स्वस्थ हैं. तीनों बच्चों का वजन करीब 2-2 किलोग्राम बताया गया है. एक साथ तीन बच्चों के जन्म की खबर सामने आने के बाद ये मामला पूरे सरदारशहर में चर्चा का विषय बना हुआ है.
अस्पताल की महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, डॉ. स्वाति गेट ने बताया कि एक साथ तीन बच्चों का जन्म होना,अपने आप में काफी दुर्लभ मामला है. ऐसे केस डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के लिए चुनौतीपूर्ण रहते हैं. उन्होंने बताया कि गर्भ में तीन बच्चे होने पर उनकी स्थिति अलग-अलग हो सकती है. कई बार एक बच्चा सीधा तो दूसरा उल्टी स्थिति में होता है. ऐसी हालत में तीनों बच्चों का नॉर्मल डिलीवरी करवाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है.
डॉ. स्वाति गेट ने कहा कि इस केस में पूरी टीम ने विशेष सावधानी और निगरानी के साथ प्रसव करवाया. सबसे बड़ी खुशी की बात ये है कि नॉर्मल डिलीवरी के बाद मां और तीनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं. राजकीय उपजिला अस्पताल में तीन नवजातों के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल है.
दरअसल ट्रिपलेट्स के मामले में नॉर्मल डिलीवरी, तभी संभव है जब कुछ बेहद खास हालात हों जैसे
1-बच्चों की सही पोजीशनज नॉर्मल डिलीवरी के लिए तीनों बच्चों, विशेषकर जन्म लेने वाले पहले और दूसरे बच्चे का सिर नीचे की तरफ जिसे (Cephalic presentation) कहा जाता है.
2-वक्त और वजन- ऐसे बच्चे अक्सर वक्त से पहले यानी कि Premature पैदा होते हैं. बिना सर्जरी जन्म के लिए बच्चों का वजन और शारीरिक विकास एक सुरक्षित स्तर पर होना चाहिए, ताकि वे प्रसव के दबाव को सह सकें.
3-मां को कोई गंभीर मेडिकल कंडीशन (जैसे प्रीक्लेम्पसिया या अत्यधिक रक्तस्राव) नहीं था और प्रसव के दौरान किसी भी बच्चे की हृदय गति में गिरावट भी नहीं आनी चाहिए.
ये सब मेडिकल कंडीशन क्योंकि आदर्श हैं जो व्यवहारिक रूप से मिलना बहुत मुश्किल है, इसलिए चूरू का ये मामला मेडिकल टर्म में दुर्लभ है