राजस्थान पंचायत चुनाव: BJP में फिर मचेगा सियासी मंथन, 27 अक्टूबर की बैठक पर टिकी नजरें
निकाय चुनावों में मिली जीत के बाद अब बीजेपी की नजर पंचायत चुनावों पर है. पार्टी प्रदेश में जारी पंचायत चुनावों में भी जीत का सिलसिला बरकरार रखना चाहती है. इसी को लेकर बीजेपी में एक बार फिर मंथन होगा. 27 अक्टूबर को बीजेपी के प्रमुख नेताओं की बैठक होगी, जिसमें पंचायत चुनावों के अब तक के सियासी समीकरणों और आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी.
बीजेपी प्रदेश में सरकार के कामकाज और संगठन के दम पर पंचायत चुनाव लड़ रही है. टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव प्रचार तक पार्टी ने पूरी ताकत झोंक रखी है. पंचायत चुनावों के बीच बीजेपी के नेता जीत के समीकरण साधने के लिए लगातार प्रदेशभर का दौरा कर रहे हैं. बीजेपी प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया से लेकर सह प्रभारी और संगठन के अन्य नेता भी चुनाव पर नजर बनाए हुए हैं.
27 अक्टूबर को बीजेपी के प्रमुख नेताओं की बैठक
अब पंचायत चुनावों को लेकर बीजेपी के नेता समीक्षा करेंगे. 27 अक्टूबर को पार्टी के प्रमुख नेताओं की बड़ी बैठक होगी. बैठक में बीजेपी प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ सहित अन्य प्रमुख नेता मौजूद रहेंगे. इस दौरान चुनावों के अब तक के हालात, पार्टी के प्रदर्शन और आगे की रणनीति पर मंथन किया जाएगा.
स्थानीय नेताओं को सौंपी पंचायत चुनावों की जिम्मेदारी
बीजेपी ने पंचायत चुनावों की जिम्मेदारी स्थानीय नेताओं को सौंपी है. पार्टी की कोशिश है कि स्थानीय स्तर पर नेताओं के बीच बेहतर तालमेल रहे और प्रत्याशियों को एकजुट रखा जाए. इसके लिए विधायकों और अन्य नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है. वहीं, बीजेपी ने पंचायत चुनावों में उतरे प्रत्याशियों को प्रशिक्षण देने की तैयारी भी शुरू कर दी है.
प्रत्याशियों के प्रशिक्षण पर चर्चा, दिवाली में बाड़ेबंदी की चिंता
पार्टी की ओर से इसे प्रशिक्षण की परंपरा का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन प्रत्याशियों के प्रशिक्षण की शुरुआत कब होगी, इसे लेकर भी चर्चा जारी है. प्रशिक्षण दीपावली से पहले शुरू होगा या बाद में, इस पर परिस्थितियों के हिसाब से फैसला लिया जा सकता है. बीजेपी के उम्मीदवारों को भी चिंता सता रही है कि कहीं दिवाली बाड़ेबंदी में न मनानी पड़े.
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टिकट वितरण से लेकर तालमेल तक संगठन की रणनीति
टिकट वितरण से लेकर प्रत्याशियों के बीच तालमेल बनाने तक बीजेपी ने संगठन स्तर पर रणनीति तैयार की है. पार्टी की कोशिश है कि पंचायत चुनावों में स्थानीय नेताओं की भूमिका प्रभावी रहे और चुनावी मैदान में प्रत्याशियों को संगठन का पूरा सहयोग मिले. 27 अक्टूबर की बैठक में इन तमाम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.
सरकार के कामकाज और संकल्प पत्र के आधार पर जनता के बीच बीजेपी
बीजेपी पंचायत चुनावों में सरकार के कामकाज और संकल्प पत्र को आधार बनाकर जनता के बीच जा रही है. पार्टी को उम्मीद है कि निकाय चुनावों के मुकाबले पंचायत चुनावों में भी उसे बेहतर समर्थन मिलेगा. वहीं, कांग्रेस भी पंचायत चुनावों में जीत का दावा कर रही है. ऐसे में अब सबकी नजर चुनावी नतीजों पर रहेगी. देखना होगा कि राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में जनता किस पार्टी के पक्ष में अपना फैसला सुनाती है.