भिवाड़ी की हवा में घुल रहा जहर! फैक्ट्रियों का धुआं या पराली, आखिर कौन है जिम्मेदार?
राजस्थान की औद्योगिक नगरी भिवाड़ी में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण का संकट गहराने लगा है. औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं, भारी वाहनों का प्रदूषण, सड़कों की धूल और पंजाब में पराली जलने से उठता धुआं हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं. प्रदूषित हवा से अस्थमा और सांस के मरीजों की परेशानी बढ़ रही है.
दिल्ली-गुरुग्राम से सटी राजस्थान की औद्योगिक नगरी भिवाड़ी जहां औद्योगिक विकास की रफ्तार लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसी विकास के बीच इन दिनों आबोहवा पर संकट गहराता जा रहा है. पंजाब में पराली जलने से उठता धुआं हो या भिवाड़ी की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला प्रदूषण, दोनों ही प्रदूषण की चुनौती को और गंभीर बना रहे हैं. सर्दियों की दस्तक के साथ ही प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों की चिंता बढ़ रही है.
फैक्ट्रियों का धुआं, धूल और भारी वाहन बढ़ा रहे प्रदूषण
भिवाड़ी में औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं भारी वाहनों की आवाजाही, सड़कों पर उड़ती धूल और निर्माण गतिविधियां वायु प्रदूषण के प्रमुख संभावित स्रोत हैं. ऐसे में सवाल है कि आखिर भिवाड़ी की हवा को जहरीला बनाने में किसकी कितनी भूमिका है. भिवाड़ी की पहचान राजस्थान के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में होती है.
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औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण की भी चुनौती
यहां हजारों औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, जो रोजगार और आर्थिक विकास में अहम योगदान देती हैं लेकिन औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. RIICO के औद्योगिक क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था, सड़कों पर धूल नियंत्रण और बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रभावी कदम उठाना जरूरी है. प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण मंडल की है.
प्रदूषित हवा से सांस के मरीजों की बढ़ रही परेशानी
डॉक्टर की माने तो प्रदूषण का सबसे बड़ा असर आमजन की सेहत पर पड़ता है, जिसमें खासकर अस्थमा और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए प्रदूषित हवा परेशानी बढ़ा सकती है, बच्चे, बुजुर्ग और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिक भी प्रदूषण के जोखिम के दायरे में हैं. आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से हो सकती हैं. ऐसे में अस्पतालों में सांस के मरीजों के आंकड़ो में बढ़ोतरी हो रही है.
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RIICO और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की जवाबदेही पर सवाल
अब सवाल RIICO, प्रदूषण नियंत्रण मंडल और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी का है, क्या औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण हो रहे हैं, क्या प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा रही है, क्या भिवाड़ी की आबोहवा सुधारने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना जमीन पर दिखाई दे रही है?
Report- Kuldeep Malwar