सायरन बजता रहा, रास्ता नहीं मिला: भरतपुर में ट्रैफिक का बुरा हाल, जाम में फंसी 5 एंबुलेंस
भरतपुर में करवा चौथ की खरीदारी के चलते बाजार में भीषण जाम लग गया. एक घंटे तक पांच एंबुलेंस फंसी रहीं, जिनमें गर्भवती महिला और गंभीर मरीज भी थे. सायरन बजाने पर भी रास्ता नहीं मिला. लोगों ने ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की मांग की.
भरतपुर में करवा चौथ पर्व की खरीदारी के चलते बाजारों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी. बिजली घर से चौबुर्जा तक सड़क पर भीषण जाम लग गया. दुकानों के सामने आड़े-तिरछे खड़े वाहन और ई-रिक्शा की भरमार से यातायात व्यवस्था चरमरा गई. हालात ऐसे बने कि एक घंटे जाम में पांच एंबुलेंस फंस गईं. इनमें एक एंबुलेंस में गर्भवती महिला को डिलीवरी के लिए जनाना अस्पताल ले जाया जा रहा था. एंबुलेंस चालक के अनुसार, सायरन बजाने के बावजूद रास्ता नहीं मिला और मरीज को अस्पताल पहुंचाने में देरी हुई. मौके पर ट्रैफिक पुलिस की अनुपस्थिति को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई और खुद ही वाहनों को हटाकर रास्ता खुलवाने का प्रयास किया.
जाम में फंसी पांच एंबुलेंस
जाम का सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि इसमें पांच एंबुलेंस फंस गईं. इनमें एक एंबुलेंस में गर्भवती महिला को प्रसव के लिए जनाना अस्पताल ले जाया जा रहा था. महिला को अस्पताल पहुंचाना जरूरी था, लेकिन जाम के कारण एंबुलेंस करीब 20 मिनट से रास्ते में फंसी हुई थी. सायरन बजाने के बावजूद आगे निकलने के लिए रास्ता नहीं मिल पा रहा था. वहीं, जाम में फंसी एक अन्य एंबुलेंस के मरीज के परिजन ने बताया कि वे उत्तर प्रदेश के हाथरस से आ रहे थे. मरीज की हालत काफी खराब थी और एंबुलेंस करीब 45 मिनट से एक घंटे तक जाम में फंसी रही. परिजन के अनुसार, मौके पर यातायात संभालने या जाम खुलवाने के लिए कोई जिम्मेदार कर्मचारी नजर नहीं आया, जिससे मरीज को परेशानी का सामना करना पड़ा.
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अक्सर लगा रहता है जाम
इस क्षेत्र में अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है. सड़क की चौड़ाई कम होने, गेट के कारण रास्ता बाधित होने, स्कूलों की आवाजाही और त्योहारों के दौरान बाजार में बढ़ने वाली भीड़ से हालात बिगड़ जाते हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस चौकी पर तैनात केवल दो कर्मचारियों के लिए पूरे बाजार और यातायात को संभालना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में एंबुलेंस सहित चारपहिया वाहन भी जाम में फंस जाते हैं.
लोगों को करना पड़ता है परेशानी का सामना
जाम के दौरान लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर वाहन हटवाकर रास्ता खुलवाने की कोशिश की. लोगों ने बाजार में यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने, दुकानों के सामने बेतरतीब पार्किंग पर रोक लगाने, ई-रिक्शा की आवाजाही व्यवस्थित करने और त्योहारों के दौरान अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की मांग की, ताकि आपातकालीन वाहनों को समय पर रास्ता मिल सके.