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Jhunjhunu News: राजस्थान के झुंझुनूं जिले के सबसे बड़े राजकीय अस्पताल बीडीके परिसर में निजी एंबुलेंसों के प्रवेश और पार्किंग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. निजी एंबुलेंस संचालकों ने अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी पर परेशान करने और कार्रवाई की धमकी देने के आरोप लगाए हैं.
निजी एंबुलेंसों का अस्पताल परिसर में "नो एंट्री"
निजी एंबुलेंस संचालकों का कहना है कि गंभीर मरीजों को लेने आने वाली निजी एंबुलेंसों को अस्पताल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है. साथ ही ट्रैफिक पुलिस को बुलाकर नो-पार्किंग के नाम पर 500-500 रुपए के चालान करवाए जा रहे हैं. एंबुलेंस संचालक विनोद कुमार ने आरोप लगाया कि गंभीर मरीज को लेने अस्पताल पहुंचने पर निजी एंबुलेंस चालकों को अंदर जाने से रोक दिया जाता है.
विनोद कुमार का कहना है कि सुरक्षा गार्डों को निजी एंबुलेंस चालकों के फोटो और वीडियो बनाने तथा कार्रवाई की धमकी देने के निर्देश दिए गए हैं. संचालकों का यह भी आरोप है कि अस्पताल में भर्ती मरीज या रिश्तेदार को देखने पैदल आने वाले चालकों को भी परिसर में प्रवेश करने से रोका जाता है.
निजी एंबुलेंस से लोगों को मिलती काफी राहत
संचालकों के अनुसार, अस्पताल के आसपास करीब 17 से 18 निजी एंबुलेंस संचालित हैं. उनका कहना है कि सरकारी 108 एंबुलेंस की संख्या सीमित होने के कारण कई बार गंभीर मरीजों को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती. संचालकों का दावा है कि कुछ मामलों में 108 एंबुलेंस के लिए 4 से 5 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है. ऐसी स्थिति में निजी एंबुलेंस मरीजों को जयपुर सहित अन्य बड़े चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने में मदद करती हैं.
समस्या के समाधान के लिए संचालकों ने विधायक को सौंपी गाड़ियों की चाबी
निजी एंबुलेंस संचालकों का कहना है कि उन्होंने समस्या के समाधान के लिए क्षेत्रीय विधायक राजेंद्र भांबू से भी संपर्क किया और उन्हें अपनी गाड़ियों की चाबी तक सौंप दी, लेकिन उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिला. संचालकों ने सीएमएचओ और प्रशासन पर भी उनकी समस्या की अनदेखी करने का आरोप लगाया है. एंबुलेंस संचालक विनोद कुमार और अन्य संचालकों ने कहा कि वे मरीजों की सेवा के लिए एंबुलेंस चलाते हैं.
उन्होंने अस्पताल प्रशासन से निजी एंबुलेंसों के प्रवेश और पार्किंग को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाने तथा चालान की कार्रवाई का दबाव बंद करने की मांग की है. संचालकों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर समाधान नहीं हुआ, तो वे एंबुलेंस सेवा बंद कर आंदोलन करेंगे. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होगी.