अलवर में मेयर कौन: सुमनलता या बगल वाली कुर्सी पर बैठे पति अजय अग्रवाल, वीडियो ने बढ़ाया सवाल
Rajasthan News: अलवर नगर निगम में मेयर सुमनलता अग्रवाल के पति और पूर्व सभापति अजय अग्रवाल की सक्रियता चर्चा में है. पार्षदों की समस्याएं सुनने से लेकर अधिकारियों को फटकारने के वीडियो सामने आए हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि निगम चला कौन रहा है?
Alwar News: अलवर नगर निगम में मेयर की कुर्सी पर सुमनलता अग्रवाल बैठी हैं. लेकिन इन दिनों निगम के गलियारों में एक सवाल तेजी से तैर रहा है - आखिर नगर निगम चला कौन रहा है. मेयर सुमनलता या उनके पति और पूर्व सभापति अजय अग्रवाल?
मेयर के बगल में दिख रही अलग कुर्सी
कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल इसलिए भी अहम हो गया है, क्योंकि कभी मेयर के बगल में अलग कुर्सी लगाकर पार्षदों की समस्याएं सुनते अजय अग्रवाल नजर आते हैं, तो कभी निगम कर्मचारियों को निर्देश देते और फटकारते हुए. यानी कुर्सी भले मेयर की हो, लेकिन उसके आसपास सक्रियता मेयर पति की दिखाई दे रही है. अलवर नगर निगम में इन दिनों मेयर की कुर्सी से ज्यादा चर्चा उस कुर्सी के आसपास की हो रही है.
25 सितंबर को संभाला था मेयर का पद
25 सितंबर को सुमनलता अग्रवाल ने नगर निगम की मेयर के रूप में पदभार संभाला. 65 सदस्यीय निगम में उन्हें 42 वोट मिले और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कमलेश शर्मा को 19 वोट से हराकर जीत दर्ज की. लेकिन मेयर की जीत के कुछ ही दिन बाद निगम के कामकाज में उनके पति और पूर्व सभापति अजय अग्रवाल की सक्रियता चर्चा का विषय बन गई.
पार्षदों की समस्याएं सुनते नजर आए अजय
सोमवार को कुछ कांग्रेस पार्षद मेयर सुमनलता अग्रवाल का स्वागत करने और कुछ सफाई कर्मचारी अपने कामों को लेकर नगर निगम मेयर कार्यालय पहुंचे. वहां मेयर सुमन अग्रवाल के पास ही उनके पति अजय अग्रवाल, मेयर के पास ही अलग कुर्सी लगाकर बैठे नजर आए. पार्षद एक-एक कर उनके पास पहुंचे. वार्डों की समस्याएं बताईं. सफाई कर्मचारियों ने मांगपत्र सौंपे और अजय अग्रवाल उनकी समस्याएं सुनते नजर आए. यहीं से सवाल उठता है कि जब निर्वाचित मेयर सुमनलता हैं, तो पार्षद अपनी समस्याएं मेयर पति के सामने क्यों रख रहे हैं?
यानी निगम की तस्वीर कुछ ऐसी दिखाई दी - मेयर अपनी जगह और मेयर पति अपनी जगह. दूसरे शब्दों में कहें तो अलवर नगर निगम में शायद अब एक नई व्यवस्था बनती दिख रही है कुर्सी पर मेयर और कुर्सी के बगल में 'सिस्टम'.
अधिकारियों को निर्देश देने पर भी उठे सवाल
हालांकि अजय अग्रवाल नगर निगम के पूर्व सभापति रह चुके हैं और निगम के कामकाज का अनुभव रखते हैं. लेकिन मौजूदा समय में वे निर्वाचित जनप्रतिनिधि नहीं हैं. ऐसे में उनका इस तरह अधिकारियों को निर्देश देना और पार्षदों की समस्याएं सुनना राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सवाल खड़े कर रहा है. इससे पहले दो अक्टूबर को भी अजय अग्रवाल मेयर सुमन अग्रवाल के साथ जब निगम पहुंचे, उस समय वहां अधिकारियों को डांटते नजर आए, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था.
इस मामले में कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष योगेश मिश्रा ने कहा, यह नियमानुसार गलत है. भाजपा सिर्फ महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करती है. अजय अग्रवाल का निगम में आना ही गलत है और अधिकारियों को डांटने का उनका अधिकार नहीं है.
2005 में रहे थे भाजपा के सभापति
अजय अग्रवाल का राजनीतिक सफर भी इस कहानी को और दिलचस्प बनाता है. वर्ष 2005 में वे भाजपा के सभापति रह चुके हैं. इसके बाद विधानसभा की राजनीति में भी उन्होंने कई बार किस्मत आजमाने की कोशिश की. 2008 और 2013 में भाजपा से टिकट की दावेदारी की, लेकिन टिकट बनवारी लाल सिंघल को मिला. राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव भी लड़ा. हालांकि, उससे पहले भी 1998 में भाजपा प्रत्याशी मीना अग्रवाल के सामने निर्दलीय चुनाव लड़े थे. अजय अग्रवाल यानी दो बार भाजपा प्रत्याशी को हराने के लिए निर्दलीय चुनाव लड़े, लेकिन दोनों बार वह चुनाव हार गए. 2013 के चुनाव में तो अजय अग्रवाल को मात्र 3100 ही वोट मिल पाए थे. अजय अग्रवाल का सफर यहीं खत्म नहीं हुआ.
भाजपा से कांग्रेस में गए, फिर वापस लौटे
2018 में एक बार फिर भाजपा से टिकट की कोशिश हुई, लेकिन टिकट संजय शर्मा को मिला. संजय शर्मा ने चुनाव जीत लिया. इसके बाद 2023 विधानसभा चुनाव से पहले अजय अग्रवाल भाजपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए. कांग्रेस ने उन्हें अलवर से विधानसभा चुनाव का उम्मीदवार बनाया, लेकिन मुकाबले में एक बार फिर संजय शर्मा के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
पत्नी मेयर बनीं तो फिर सक्रिय हुए अजय
और फिर 2026 में आया नगर निगम चुनाव. इसमें मेयर पद की सीट सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुई. अजय अग्रवाल वापस भाजपा में आए. उनकी पत्नी सुमनलता अग्रवाल ने वार्ड सात से चुनाव जीता और फिर मेयर की कुर्सी तक पहुंचीं. यानी विधानसभा की राजनीति में जो दांव बार-बार सफल नहीं हुआ. वह नगर निगम की राजनीति में पत्नी के जरिए कामयाब होता नजर आया.
लेकिन कहानी में ट्विस्ट अभी बाकी था. 2 अक्टूबर को निगम में आयोजित कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आया. इसमें अजय अग्रवाल निगम कर्मचारियों को फटकारते हुए दिखाई दिए. इस दौरान मेयर सुमनलता भी उनके पास मौजूद थीं.
इसी वीडियो को लेकर कर्मचारी महासंघ एकीकृत के पदाधिकारियों ने आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि महिला जनप्रतिनिधियों के पति, पुत्र या अन्य रिश्तेदारों का सरकारी संस्थाओं के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए.
अब सवाल- 'मेयर कौन?'
अब इसे महज राजनीतिक अनुभव का इस्तेमाल माना जाए या पत्नी की मदद या फिर निर्वाचित पद और अनौपचारिक सत्ता के बीच की वह रेखा, जिसे पार नहीं किया जाना चाहिएय़ ऐसे में अलवर नगर निगम में अब बहस यही है - 'मेयर कौन?'
सुमनलता अग्रवाल या फिर उनके बगल में रखी वह कुर्सी, जिस पर बैठकर अजय अग्रवाल पार्षदों से लेकर अधिकारियों तक सक्रिय नजर आ रहे हैं? फिलहाल तस्वीरें सवाल पूछ रही हैं... और जवाब का इंतजार अलवर कर रहा है.