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टीवी की दुनिया में 'सड्डा हक', 'इश्क में मरजावां' और 'कुछ रंग प्यार के ऐसे भी' से खास पहचान बनाने वाले फेमस प्रोड्यूसर यश पटनायक की क्रिएटिविटी से तो हर कोई वाकिफ है. उन्होंने अपने बेहतरीन शोज से दर्शकों के दिलों में बेहद खास जगह बनाई है. लेकिन उनकी इस क्रिएटिविटी के पीछे आखिर कहानी क्या है? ज़ी न्यूज से खास सेलिब्रिटी हाउस टूर में प्रोड्यूसर यश पटनायक ने अपने मुंबई वाले घर का खास दीदार करवाया है.
इस दौरान यश पटनायक ने बताया कि कैसे उनके घर की बालकनी और लिविंग एरिया नए शोज और कहानियों को केंद्र बनाते हैं. इसी के साथ उन्होंने अपने करियर, बच्चों के साथ काम करने के अनुभव, बेटे और परिवार से जुड़ी यादों के साथ करीब 250 साल पुराने पुश्तैनी संदूक का दिलचस्प किस्सा भी शेयर किया है. तो चलिए ऐसे में यश पटनायक के घर और उनकी जिंदगी के जुड़े कुछ अनसुने किस्सें आपको बताते हैं.
बातचीत की शुरुआत में यश से पूछा गया कि क्या उन्होंने शो 'क्योंकि पापा कहते हैं' का पहला एपिसोड घर पर बैठकर देखा था. जिस पर उन्होंने बताया कि, 'नहीं, इस बार हमने पूरी यूनिट के साथ देखा. यूनिट में करीब 100 लोग हैं, तो यहां सब नहीं आ पाते. इसलिए सेट पर हमने स्क्रीनिंग की थी. सब एक साथ बैठकर देख रहे थे, तो यह बहुत अमेजिंग फीलिंग थी.'
घर में कदम रखते ही यश ने बताया कि 'यह हमारा छोटा सा हाउस वर्कशॉप और थॉट मशीन है, जहां से हर सोच की शुरुआत होती है. हम गोरेगांव वेस्ट में हैं. यहां से फिल्म सिटी, माइंडस्पेस और मड आइलैंड सब पास हैं. पूरी दुनिया हमारी इसी के अराउंड है. घर लिंक रोड और अरेबियन सी को फेस करता है.' वहीं, उनसे आगे पूछा कि ऑफिस भी पास में ही है ना? यश ने कहा, 'हां, ऑफिस घर के बिल्कुल पास होना चाहिए, ताकि समय बचे. ट्रैफिक में बहुत टाइम जाता है, तो कभी-कभी खाना खाने के लिए घर आ जाते हैं. सोचने के लिए जगह चाहिए होती है और हमारे लिए हमारी जड़ी-बूटी कहानियां हैं.'
वहीं, बालकनी से दिखने वाला नजारा यश के लिए बेहद खास है. उन्होंने बताया, 'यहां से मैंग्रोव्स दिखते हैं, जो मुंबई का इकोसिस्टम बैलेंस करते हैं. स्लम्स भी हैं, हाई-राइज कॉर्पोरेट ऑफिसिस भी हैं और नीचे प्लेग्राउंड है, जहां बच्चे खेलते हैं. एक ही थाली में सब कुछ देखने को मिल जाता है.' बालकनी के पेड़-पौधों से भी उनका रिश्ता गहरा है. 'ये पेड़ मेरे लिए जीवन का बहुत बड़ा स्रोत हैं. इनमें से कई 18-20-25 साल पुराने हैं. पौधों को पानी दीजिए, उनसे बात कीजिए. जब आप उनके ट्रंक को टच करते हैं, तो उनकी धड़कन महसूस होती है.'
अंदर लिविंग एरिया में कहानियां गढ़ी जाती हैं. यश ने बताया, 'यहां हमारी मीटिंग्स होती हैं. राइटर्स के साथ बैठकर कहानियों के ट्रैक्स, एपिसोड्स और नए कॉन्सेप्ट्स पर चर्चा करते हैं. जब शाम हो जाती है, तो यह हमारा छोटा सा बार है, जहां हम बैठते हैं.' वहीं, एंकर ने कहा कि उनका घर हाउस पार्टी और गेट-टुगेदर के लिए अमेजिंग वेन्यू लगता है. इस पर यश बोले, 'हमारी इंडस्ट्री में पार्टी में ही हमारा काम होता है, नेटवर्किंग होती है. दोस्तों और प्रोफेशनल्स के साथ शाम को बैठकर बहुत सारे आइडियाज आते हैं.'
यश ने बताया, 'घर में वास्तु का पूरा ध्यान रखा गया है. यह नॉर्थ-ईस्ट कॉर्नर है, यहां भगवान (लड्डू गोपाल) विराजमान हैं. यहां हमारे कुछ शोज की ट्रॉफियां हैं, जैसे वीरा, रंग जाऊं तेरे रंग में, इश्क में मरजावां आदि.' इस दौरान यश ने अपने घर का छोटा सा जिम भी दिखाया. जब उन्हें सुबह जिम जाने का समय नहीं मिल पाता, तो उन्होंने घर पर ही छोटा सा जिम बनाया है. उनके जिम से व्यू का भी काफी अच्छा नजारा देखने को मिलता है. यश ने बताया कि वे आमतौर पर सुबह 45 मिनट वर्कआउट करते हैं. जिम का मकसद मसल्स बनाना नहीं, बल्कि फिट रहना और दिनभर के लिए एनर्जेटिक रहना है.
इसी बीच यश ने बेटे आरव का रूम भी दिखाया. उन्होंने बताया कि जब वह छोटा था, तब यह उसका कमरा था. हालांकि, अब वह लंदन में सिटी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रहा है. उनके घर में एक छोटा थिएटर भी है, जहां वे शोज और क्रिकेट मैच देखते हैं और जब सुकून चाहिए होता है, तो यहां बैठते हैं. यहां इंडियन, इंटरनेशनल और रीजनल कंटेंट देखते हैं. वहीं, दीवार पर उन्होंने एक पेंटिंग भी दिखाई, जिसके बारे में यश ने बताया कि 'मैंने बहुत सालों बाद स्केचिंग फिर से शुरू की है. करीब 25 साल बाद मैंने 'द स्टॉर्म विदिन' (The Storm Within) बनाया है. जब अंदर तूफान हो, तब बाहर शांति रखनी पड़ती है.'
वहीं, यश ने अपने लेटेस्ट सीरियल 'पापा कहते हैं' के बारे में बात करते हुए कहा, 'हमने इस बार यूनिट के साथ सेट पर स्क्रीनिंग की थी. बच्चों के साथ काम करना बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि उनके पास फिल्टर नहीं होते, वे नेचुरल रिएक्ट करते हैं.'
इस दौरान यश ने अपने पुराने शो वीरा से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया. यश ने कहा, 'जैसे वीरा में हमने सोचा था कि बचपन का ट्रैक 35 एपिसोड में खत्म कर देंगे, लेकिन बच्चों की बेहतरीन एक्टिंग की वजह से हमने उसे 280 एपिसोड्स तक चलाया.' वहीं, जो बच्चे एक्टिंग में आना चाहते हैं, उनके लिए यश ने सलाह भी दी. उन्होंने कहा, 'पढ़ाई से कभी समझौता नहीं करना चाहिए. पढ़ाई सिर्फ सर्टिफिकेट के लिए नहीं, अच्छा इंसान बनने और डिसिप्लिन के लिए होती है. पढ़ाई को प्रभावित किए बिना अगर एक्टिंग करना चाहें, तो छोटे-छोटे रोल से शुरुआत करनी चाहिए.'
अपने दिन की शुरुआत के बारे में यश ने बताया, 'सुबह की शुरुआत करीब 7:30 बजे मेरे कुत्ते जेक के साथ खेलने से होती है. उसके बाद चाय-कॉफी पीते हैं और ईमेल्स का जवाब देते हैं.' घर के अलग-अलग कोनों के बारे में उन्होंने कहा, 'यह ममता की बैठने की जगह है और यह मेरा सिंगल मोनोक्रोम सीटिंग एरिया (व्हाइट, ब्लैक और बेज) है.' एक खास कुर्सी के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया, 'यह मिलान से लाई गई चेयर है, इसे 'लव चेयर' कहते हैं. इसमें ट्विन सीटिंग का कर्व ऐसा है कि आप एक ही दिशा में बैठकर भी एक-दूसरे की तरफ देखकर वाइन पी सकते हैं और बात कर सकते हैं.'
इस टूर के सबसे भावुक पल में यश ने अपनी सबसे कीमती चीज भी दिखाई. उन्होंने कहा, 'यह मेरे दिल के सबसे करीब 250 साल पुराना संदूक है. यह हमारे परिवार में पीढ़ियों से सबसे छोटे बेटे को मिलता आया है. मेरे दादाजी, फिर मेरे पिता और फिर मुझे मिला. इसमें करीब 48 खाने हैं और हर खाने की अलग चाबी है.' उन्होंने आगे बताया कि इसी घर से कई बड़े शोज की शुरुआत हुई है. यश ने कहा, 'यह घर हमारे लिए एक किचन की तरह है, जहां थॉट्स हमारे इंग्रेडिएंट्स हैं और आइडियाज हमारे मसाले हैं. यहीं से हम पकाते हैं, सर्व करते हैं और देखते हैं कि लोग क्या पसंद कर रहे हैं.' उन्होंने गिनाया, 'हमारे कई शोज यहीं से शुरू हुए, सड्डा हक (चैनल वी के लिए), इश्क में मरजावां और कुछ रंग प्यार के ऐसे भी (जहां हमने सासू-मां और बेटे के रिश्ते को एक नए नजरिए से दिखाया).'