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Exclusive: 14 साल में मचा दी थी तबाही! वैभव सूर्यवंशी के कोच ने बताया किस जिद ने बनाया क्रिकेट का ‘बाहुबली’

15 साल के वैभव सूर्यवंशी घरेलू क्रिकेट से लेकर आईपीएल और इंटरनेशनल मैचों में तक में तहलका मचा रहे हैं. उनके रिकॉर्ड असाधारण है. वैभव के कोच मनीष ओझा ने जी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कई खुलासे किए.

Written By Rohit Raj
Published: Sep 04, 2026, 11:01 AM IST | Updated: Sep 15, 2026, 04:00 PM IST
Image Credit: वैभव सूर्यवंशी के कोच मनीष ओझा का इंटरव्यू.
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बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर दुनिया के खूंखार गेंदबाजों की धुनाई करने वाले वैभव सूर्यवंशी मौजूदा समय में क्रिकेट की हॉट प्रॉपर्टी बन गए हैं. 15 साल के होनहार खिलाड़ी ने आईपीएल के मंच पर तहलका मचाया और अब टीम इंडिया में शामिल हो गए. वैभव का सफर किसी सिनेमाई कहानी जैसा रहा है. इस युवा बल्लेबाज की आक्रामक पारियों ने आज उन्हें दुनिया का सबसे चर्चित खिलाड़ी बना दिया है. वैभव के कोच मनीष ओझा से जी न्यूज ने बात की और उन्होंने इस दौरान कई बड़े खुलासे किए.

वैभव ने टी-20 क्रिकेट में 216.32 के शानदार स्ट्राइक रेट और आईपीएल के 23 मैचों में 228.95 के असाधारण स्ट्राइक रेट से 1,028 रन बनाकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. मैदान पर लगने वाले गगनचुंबी छक्कों और सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स के पीछे उनके परिवार के निरंतर और बड़े त्याग की एक गहरी दास्तां छिपी है. मनीष ओझा ने वैभव के माता-पिता के कठिन संघर्षों, करियर के शुरुआती दौर में आक्रामक बल्लेबाजी शैली को लेकर मिलने वाली आलोचनाओं से निपटने और आज के दौर में एक महान खिलाड़ी तैयार करने के लिए आवश्यक अनुशासन पर जी न्यूज से खुलकर बात की.

नीचे इंटरव्यू को पूरा पढ़ें:

सवाल: जब 2018 में वैभव सूर्यवंशी आपके पास आए थे तो आपने उनमें क्या स्पार्क देखा था?

जवाब: जब वो शुरू-शुरू में मेरे पास आए थे तो काफी छोटे थे. बतौर कोच हम उतने छोटे बच्चे का मूल्यांकन नहीं करते हैं. शुरुआती स्टेज में तो मैंने ऐसा कुछ नहीं देखा, लेकिन जैसे-जैसे वो प्रोग्रेस करते गए, 6 महीने-1 साल के बाद दिखने लगा कि वैभव साधारण बच्चा नहीं है. उसके स्किल को देखकर लगने लगा कि उसकी टाइमिंग बाकियों से अलग है. उसको जो भी बताया जाता था वो बहुत जल्दी उसको सीखते थे. उनका एक्सक्यूशन तो अलग स्तर का हुआ करता था. एक-डेढ़ साल बाद लगने लगा कि वैभव की जो प्रतिभा है वो अलग दर्जे का है और ये बड़ा क्रिकेटर बनेगा.

सवाल: वैभव समस्तीपुर के ताजपुर से आते हैं, जहां से पटना की दूरी करीब 100 किलोमीटर है. 2018 में सड़क की स्थिति में उतनी अच्छी नहीं थी. उस समय वैभव का परिवार कैसे सपोर्ट करता था?

जवाब: देखिए, जब आप बड़ा सपना देखते हैं तो उसके लिए आपको बड़ा त्याग भी करना पड़ता है. वैभव के परिवार ने ये त्याग किया है. वैभव की मां रात में 2 बजे उठ जाती थी. उसके बाद वैभव के लिए ब्रेकफास्ट और लंच साथ में बनाती थी. वैभव सुबह 4:30 बजे उठते थे फिर ब्रेकफास्ट कर पिता के साथ पटना के लिए निकलते थे. पटना आने में 2:30 घंटे का समय लगता था. यहां पहुंचने के बाद वैभव 4 बजे तक बल्लेबाजी करते थे और जमकर मेहनत करते थे. इस दौरान ब्रेक फास्ट और लंच ब्रेक होता था, तो वैभव के पूरे परिवार ने संघर्ष किया है . मां खाना बनाने में तो पिता उनको रोज ट्रेनिंग ग्राउंड में लाने में. पूरे परिवार का योगदान रहा है.

सवाल: वैभव को बुमराह-स्टार्क जैसे धुरंधर गेंदबाजों को छक्के मारते देखा है. क्या वो शुरू से ही इतने आक्रामक शैली के बल्लेबाज थे?

जवाब: उसका स्किल ही सबसे अलग था. वैभव जब 8-9 साल का था तब 16-17 साल के गेंदबाजों का सामना करता था. जब वो 12 साल का हुआ तो अंडर-19 और रणजी खेलने वाले गेंदबाजों का सामना करने लगा. वो बचपन से ही अपने से बेहतर और बड़े गेंदबाजों का सामना करते रहा है. यहीं से उनका निडर वाला खेल बढ़ते रहा. वो अपने एज ग्रुप के मैचों में सिर्फ छक्के-चौकों में डील करते थे. उसको प्रैक्टिस से ही ये आदत पड़ गई, पूरी मानसिकता बदल गई. यही वजह है कि आज जब वो बड़े बड़े गेंदबाजों का सामना करते हैं तो डरते नहीं हैं और पहली गेंद पर भी छक्का जड़ने के लिए तैयार रहते हैं. वो गेंदबाज को नहीं गेंद को देखते हैं और मेरिट पर खेलते हैं.

सवाल: जब 13 साल के वैभव पर राहुल द्रविड़ ने दांव लगाया और आईपीएल के लिए राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें खरीदा तो आपकी क्या प्रतिक्रिया थी और उस समय वैभव से क्या बातचीत हुई?

जवाब: मेरे लिए तो वो गर्व की बात थी. सपने सच होने जैसा था. एक पिता और कोच जब अपने शिष्य को इतने बड़े मंच पर खेलते देखता है तो गर्व की बात होती है. जब राहुल द्रविड़ जैसा दिग्गज आपके शिष्य की तारीफ करे तो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है. उस समय तो वैभव से ज्यादा बातचीत नहीं हुई थी. वैभव के पिता से बात हुई थी और वो बहुत खुश थे कि राजस्थान रॉयल्स ने उनके बेटे को टीम में शामिल किया. हम दोनों के लिए वो प्राउड मोमेंट था.

सवाल: दलीप ट्रॉफी में वैभव ने गेंद से कमाल कर दिया, विकेट लिया. ये कैसे हुआ? वैभव बॉलिंग कब से कर रहे हैं?

जवाब: वैभव बचपन से ही गेंदबाजी करते हैं. रणजी और अंडर-19 लेवल पर भी कप्तान वैभव का इस्तेमाल विकेट लेने या पार्टनरशिप तोड़ने के लिए करते रहे हैं. दलीप ट्रॉफी में उन्होंने अच्छी गेंदबाजी कर दो विकेट चटकाए.

सवाल: वैभव ने इंग्लैंड में डेब्यू किया, लेकिन शुरुआत अच्छी नहीं. तब उनकी आलोचना भी हुई. इसके बाद जिम्बाब्वे में उन्होंने रन बनाए. इन दोनों सीरीज के बीच आपके दिमाग में क्या चल रहा था?

जवाब: वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे में रन बनाए और प्लेयर ऑफ द सीरीज भी बने. आप किसी भी खिलाड़ी को रन मशीन की तरह देखेंगे तो ये पॉसिबल नहीं है. क्रिकेट के सबसे महानतम बल्लेबाज सचिन को भी देखेंगे तो 10 में से 4-5 मैचों में ही उन्होंने रन बनाए होंगे. वैभव ने तो अभी शुरुआत की है. आलोचना और तारीफ तो दो पहलू हैं, लेकिन लोगों को ये भी समझना होगा कि वैभव हर मैच में रन नहीं बना सकते.

सवाल: इंस्टाग्राम पर वैभव के 70 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं. सोशल मीडिया अच्छा है तो बुरा भी है. इससे बचाने के लिए आप या उनके पिता क्या सलाह देते हैं?

जवाब: सोशल मीडिया आज की तारीख में अहम हिस्सा हैं, लेकिन वैभव थोड़ी ना इसको दिनभर चलाते हैं. इसको हैंडल करने के लिए भी लोग हैं. उनके पास इंस्टाग्राम चलाने का समय नहीं है, वो दिनभर प्रैक्टिस में लगे रहते हैं. उनके मीडिया मैनेजर ये सब हैंडल करते हैं.

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About the Author

रोहित राज एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. दैनिक जागरण से करियर की शुरुआत करने वाले रोहित ईटीवी, दैनिक भास्कर, जनसत्ता और अमर उजाला से होते हुए जी न्यूज के हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं और स्पोर्ट्स टीम को लीड करते हैं. रोहित कई एक्सक्लूसिव खबरें और एथलीट्स का इंटरव्यू कर चुके हैं. पत्रकारिता में 40 अंडर 40 अवॉर्ड विजेता हैं. खेलों में ज्यादा रुचि रखते हैं और क्रिकेट वर्ल्ड कप, फीफा वर्ल्ड कप, हॉकी वर्ल्ड कप, वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 और अन्य खेलों के बड़े-बड़े इवेंट को करने का अनुभव रखते हैं. ब्रेकिंग न्यूज, एनालिसिस और किस्से-कहानियों पर पकड़ है. क्रिकेट के अलावा हर खेलों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाने की कोशिश में लगे रहते हैं.
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