सना को घेरा तो रियाद पर हुआ प्रहार, हथियारों का जखीरा होने पर भी हूतियों के हमले क्यों नहीं रोक पा रहा 'बलशाली' सऊदी अरब?
Why Saudi Arabia helpless Against Houthi Rebels? सऊदी अरब ने यमन के हूती विद्रोहियों को सबक सिखाने के लिए राजधानी सना को घेरा, तो हूतियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद को धुआं-धुआं कर दिया. आखिर क्या वजह है कि घातक हथियारों का जखीरा होने के बावजूद 'बलशाली' सऊदी अरब हूतियों के हमले नहीं रोक पा रहा है?
How Houthi Rebels Gaining Upper Hand Over Saudi Arabia? पश्चिम एशिया में सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच चल रही जंग और भीषण हो गई है. मक्का पैक्ट के बाद तुर्किये और पाकिस्तान का साथ मिलने पर सऊदी अरब की सेनाएं हूतियों पर ताबड़तोड़ हमले बोल रही हैं. वहीं हूती भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. वे भी अपने जीवट और ईरान से मिले हथियारों के बल पर सऊदी अरब को करारा जवाब दे रहे हैं.
सऊदी और यमन की सरकारी सेना ने राजधानी सना पर काबिज हूतियों को खदेड़ने के लिए सा और सादा क्षेत्रों पर भारी हवाई हमले किए. इसके जवाब में हूतियों ने भी सऊदी अरब की राजधानी रियाद, किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और प्रमुख तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर कई मिसाइलें और ड्रोन दागे.
सऊदी अरब पर हूतियों का पलटवार, रियाद को कर दिया धुआं-धुआं
हूती विद्रोहियों के निशाने पर खास तौर पर सऊदी अरब की वे तेल रिफाइनरियां थी, जिनसे तेल को साफ करके वह हर साल अरबों डॉलर की कमाई करता है. उन्होंने यानबू और रियाद स्थित सऊदी अरामको की तेल सुविधाओं पर हमले किए. इसके साथ ही सऊदी अरब के सैन्य अड्डों, रक्षा मंत्रालय के ठिकानों, रियाद में बने किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और नजराण और जिजान के हवाई अड्डों पर भी हमले किए गए.
हूतियों ने हमले के लिए लंबी दूरी के सुसाइड ड्रोन, क्रूज मिसाइलें और बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया. इन हमलों की चपेट में आने से सऊदी अरब में 3 विदेशी नागरिकों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए. वहीं अरामको तेल क्षेत्र पर धुएं के काले गुब्बार उठते देखे गए.
हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह यमन पर हो रहे हमलों का कड़ा जवाब है. वहीं सऊदी सऊदी के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने कहा कि उसने रियाद की तरफ आने वाली कई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया. साथ ही, पलटवार करते हुए यमन में हूतियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए.
सऊदी अरब पर हमले से भारत क्यों हुआ परेशान?
भारत ने सऊदी अरब पर हूतियों के हमले पर चिंता जताते हुए कड़ी निंदा की है. उसने दोनों पक्षों से शांति-संयम की अपील करते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बेहद अहम है. लिहाजा इसे हर हाल में कायम रखा जाना चाहिए.
जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्टों के मुताबिक, अगर भारत, सऊदी अरब पर अटैक से परेशान है, तो इस मामले में उसकी अपनी जायज वजहें हैं. असल में भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा भारत इसी क्षेत्र यानी पश्चिम एशिया से आयात करता है. ईरान पर प्रतिबंध की वजह से सऊदी अरब, कतर और यूएई उसके प्रमुख स्रोत हैं, जहां से वह तेल और गैस मंगाता है. ऐसे में अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर प्रभावित होने लग जाती है.
भारत के चिंतित होने की दूसरी वजह खाड़ी देशों में बड़ी तादाद में भारतीय प्रवासियों का रहना है. रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी मुल्कों में लगभग 85 लाख भारतीय प्रवासी रहते हैं. वे अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा भारत भेजते हैं, जिससे देश को हर साल बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होती है. साथ ही, विदेशों में भारत का प्रभाव भी बढ़ता है. यही वजह से खाड़ी मुल्कों से मित्रवत संबंध और वहां पर स्थिरता-शांति हमेशा से भारत के एजेंडे में ऊपर रही है.
शांति और संयम बरतें दोनों पक्ष- भारत
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब के नागरिक-बुनियादी ढांचों पर हो रहे हमलों पर भारत ने गहरी चिंता जताई है. भारत ने कहा है कि ये हमले अस्वीकार्य हैं और इन्हें किसी भी हाल में मंजूर नहीं किया जा सकता. उन्होंने दोनों पक्षों से शांति और संयम बरतने की अपील भी की है.
तेल रिफाइनरियों और एयरपोर्ट को निशाना क्यों बना रहे हूती?
एयरपोर्ट को निशाना बनाने से क्या हासिल होता है? क्या मकसद सिर्फ नुकसान पहुंचाना है या हवाई यातायात को बाधित करना? क्या यह सऊदी पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति है? क्या हूती संदेश देना चाहते हैं कि सऊदी का कोई भी संवेदनशील ठिकाना सुरक्षित नहीं?
इस संघर्ष की खास बात ये है कि हूती विद्रोही सऊदी अरब की तेल रिफाइनरियों और नागरिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं. इसके पीछे उनकी सधी हुई रणनीति साफ नजर आती है. इस तरह के हमलों के जरिए हूती यह जता रहे हैं कि जब सऊदी अरब की राजधानी और उसके सबसे सुरक्षित माने जाने वाले हवाई अड्डे भी उनके अटैक से सुरक्षित नहीं है तो बाकी लोग अपनी सिक्योरिटी के बारे में खुद सोच लें.
दूसरे शब्दों में कहें तो हूती विद्रोही सऊदी अरब के लोगों पर मनोवैज्ञानिक वार कर रहे हैं. वे कहना चाह रहे हैं कि उनकी सरकार चाहकर भी हूतियों के हमले से उन्हें नहीं बचा सकती. इन हमलों के जरिए हूती विद्रोही, सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को तबाह करने के साथ ही उसकी 'सुरक्षित देश' की छवि को भी मटियामेट करना चाहते हैं.
अरबों का एयर डिफेंस, फिर भी हमला क्यों नहीं रोक पा रहा सऊदी?
दिलचस्प बात ये है कि सऊदी अरब के पास पैट्रियट और थाड समेत दुनिया के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं. इसके बावजूद वह चाहकर भी हूतियों के हमले नहीं रोक पा रहा है. इसकी वजह ये है कि बैलिस्टिक मिसाइलें एक तय पैराबोलिक ट्रेजेक्टरी पर चलती हैं. इसकी वजह से रडार आसानी से उन्हें ट्रैक कर लेते हैं. वहीं, छोटे ड्रोन और क्रूज मिसाइलें पहाड़ों और घाटियों का फायदा उठाकर कम ऊंचाई पर उड़ते हैं. जिसके चलते रडार उन्हें पकड़ नहीं पाते और वे अचानक अपने टारगेट पर पहुंचकर ब्लास्ट कर देते हैं.
क्या है 'घेराबंदी के बदले घेराबंदी' वाली हूतियों की घातक रणनीति?
सऊदी अरब के हथियारों के विशाल जखीरे के सामने हूतियों ने भी अंगद के पांव की तरह खूंटा गाड़ दिया है. वे अब 'घेराबंदी के बदले घेराबंदी' रणनीति पर काम कर रहे हैं. हूतियों ने एलान किया है कि जब तक सना समेत यमन के इलाकों पर बमबारी और घेराबंदी खत्म नहीं होती, तब तक वे भी रियाद समेत सऊदी अरब के ठिकानों को निशाना बनाते रहेंगे. उन्होंने खुला संदेश दिया है कि यमन को मानवीय और आर्थिक संकट में धकेलने की कीमत अब रियाद और उसके सहयोगियों को चुकानी होगी.
पश्चिम एशिया में नागरिक उड्डयन पर कितना असर?
सऊदी अरब और हूतियों के बीच चल रही मिसाइल-वॉर से पूरे खाड़ी क्षेत्र में नागरिक उड्डयन खतरे में पड़ गया है. हूतियों के हमले की वजह से सऊदी अरब को अपने आभा, नजराण, रियाद समेत कई हवाई अड्डों पर उड़ानों को अस्थायी रूप से बंद या डायवर्ट करना पड़ा है. जिससे अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस का खर्चा और आम लोगों की परेशानी दोनों बढ़े हैं.
हूतियों के पास हथियारों का कितना बड़ा जखीरा है?
अगर हूतियों के पास मौजूद हथियारों की बात करें तो उसके पास इनका विशाल जखीरा है. इनमें से काफी हथियार उसे ईरान से मिले हैं, जबकि काफी हथियार उसने तस्करी के जरिए दूसरे देशों से जुटाए हैं. उसके पास लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें, उन्नत क्रूज मिसाइलें और 'समद' व 'कुद्स' जैसे सुसाइड ड्रोन हैं. इसके साथ ही एंटी-शिप वेपन और समुद्री ड्रोन भी उसके पास काफी मात्रा में मौजूद हैं.
जंग में क्यों उलझे हैं सऊदी और हूती?
अब सवाल आता है कि सऊदी अरब और हूती आखिर इस खूनी जंग में क्यों उलझे हैं? इसे समझने के लिए पहले आपको हूतियों का इतिहास समझना होगा. असल में हूती (अंसारुल्लाह) यमन के उत्तर-पश्चिम में रहने वाले जैदी शिया समुदाय के लोग हैं. यमन में उनकी आबादी करीब एक तिहाई है. वे ज्यादातर देश के दक्षिण हिस्से में निवास करते हैं. उनका अपना एक राजनीतिक और सशस्त्र संगठन है.
हूतियों ने वर्ष 2014-15 में सत्ता के संघर्ष के दौरान यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति आबिद रब्बू मन्सूर हादी की सरकार को बेदखल कर दिया. इसके बाद हादी ने सऊदी अरब से मदद मांगी. सऊदी अरब ने भी यमन में शिया हूतियों का प्रभाव बढ़ते देख अपनी सुरक्षा के लिए खतरा माना. उसने मार्च 2015 में सुन्नी बहुसंख्यक अरब देशों का गठबंधन बनाया और यमन में हूतियों पर हमले शुरू कर दिए. तब से दोनों के बीच खूनी अदावत जारी है.
इस संघर्ष का एक पहलू ईरान से भी जुड़ता है. पश्चिम एशिया में ईरान शियाओं का सबसे ताकतवर देश है. क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर (शिया) ईरान और (सुन्नी) सऊदी अरब के बीच लंबे वक्त से प्रॉक्सी वॉर चल रही है. अब यह वॉर का एक फ्रंट यमन बन गया है. ईरान इस फ्रंट पर सीधे सामने नहीं है, लेकिन अपने प्रॉक्सी हूतियों के जरिए एक तरह से उसे ही सऊदी अरब पर हमलों का दोषी माना जा रहा है. अब शिया-सुन्नियों की यह जंग कहां जाकर थमेगी, यह आने वाला वक्त बताएगा. लेकिन इतना तय है कि इस संघर्ष का खामियाजा दशकों तक पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा.