ड्रैगन, डॉलर, क्रूड और ट्रंप... इकोनॉमी की रफ्तार धुआंधार, शेयर बाजार की हालत इसलिए खराब
Share Market Crash Explaine: भारत की GDP ग्रोथ 7.8% की रफ्तार से बढ़ रही है. दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली इकोनॉमी भी शेयर बाजार में गिरावट को रोक नहीं पा रहा.
Share Market crash: भारतीय शेयर बाजार बुरे दौर से गुजर रहा है. सेंसेक्स शर्मनाक रिकॉर्ड की ओर बढ़ रहा है. जिन लोगों ने पैसा बनाने के लिए बाजार में पैसा लगाया है, वो सिर पीट रहे हैं. जो सेंसेक्स अक्टूबर 2025 में 84,997.13 पर था, वो अक्टूबर 2026 में फिसलकर 71,909.70 पर पहुंच गया है. सिर्फ 2026 का ही ग्राफ देखें, तो 1 जनवरी 2026 में Sensex 85,188.60 अंक पर था, जो गिरते-गिरते अब 72000 अंक के नीचे पहुंच गया है. एक तरफ GDP के आंकड़े गदगद कर रहे हैं, तो दूसरी ओर हांफता शेयर बाजार हैरान-परेशान कर रहा है.
सवाल ये कि ...
- आखिर भारत के शेयर बाजार में ये भूचाल क्यों मचा है?
- क्यों सेंसेक्स और निफ्टी हांफ रहे हैं?
- 7.8% की GDP ग्रोथ भी बाजार को क्यों नहीं संभाल पा रहा ?
- शेयर बाजार में गिरावट का अमेरिका और चीन कनेक्शन क्या है?
- क्यों विदेशी निवेशक भारत के शेयर बाजार से दूर हो रहे हैं?
GDP ग्रोथ 7.8% फिर भी शेयर बाजार बेहाल क्यों?
युद्ध, महंगे कच्चे तेल के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP 7.8% की रफ्तार से बढ़ी, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है, लेकिन हैरानी की बात है कि मजबूत GDP के आंकड़े शेयर बाजार के क्रैश को संभाल नहीं पा रहे हैं. एक तरफ GDP का ग्राफ बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ सेंसेक्स क्रैश होकर शर्मनाक रिकॉर्ड बना रहा है.
आमतौर पर शेयर बाजार देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा रहा है, लेकिन बाजार की चाल पर इस बार विदेशी निवेशकों की बिकवाली हावी है. मजबूत GDP के बावजूद बाजार की चाल पर महंगाई, ब्याज दर बढ़ने की आशंका, डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये, क्रूड की तेजी, विदेशी निवेश की भारी बिकवाली के साथ-साथ कंपनियों की कमाई से प्रभावित होता है.
25 सालों की सबसे बड़ी गिरावट, कोरोना काल से भी बुरा हाल
साल 2026 में सेंसेक्स का सबसे खराब प्रदर्शन रहा. 1 अक्टूबर को ये साल 2026 के निचले स्तर पर पहुंच गया. शेयर बाजार ने 2001 के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए पिछले 8 हफ्तों में 9% से अधिक की गिरावट हासिल . बाजार में मची इस तबाही में विदेशी निवेशकों ने विलेन की भूमिका निभाई है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 2026 के शुरुआती 9 महीनों में शेयर बाजार से 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली कर ली.
FII ने तोड़ा 2025 का रिकॉर्ड
NSDL डेटा के मुताबिक विदेशी निवेशकों का आउटफ्लो साल 2026 में 3.05 लाख करोड़ रुपये रहा, जो साल 2025 में 2.40 लाख करोड़ रुपये और साल 2024 में करीब 1.21 लाख करोड़ रुपये था.
साल 2026 में भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों ने कितना पैसा निकाला?
- जनवरी 2026 - 35962 करोड़ रुपये निकाले
- फरवरी-22615 करोड़ रुपये का निवेश
- मार्च 1.17 लाख करोड़ रुपये निकाले
- अप्रैल 60847 करोड़ रुपये निकाले
- मई 27048 करोड़ निकाले
- जून 49340 करोड़ रुपये निकाले
- अगस्त 27000 करोड़ रुपये निवेश किए
सितंबर 25662 करोड़ रुपये निकाले
विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से क्यों हो रहे हैं दूर?
विदेशी पार्टफोलियो निवेशक भारतीय बाजार से बिकवाली कर रहे हैं. FII का पैसा निकालना बाजार पर हावी होकर उसे पीछे धकेल रहा है. पिछले दो कैलेंडर ईयर में FII ने भारतीय शेयर बाजार से 56 अरब डॉलर की भारी निकासी कर ली. साल 2026 के बीते 9 महीनों में विदेशी निवेशकों की निकाली 3.05 लाख करोड़ रुपये से अधिक रही है. पैसा निकलने से बाजार कमजोर होता है. FII पैसा निकाल रहे हैं, इसका सीधा कनेक्शन रिटर्न से है. बेहतर रिटर्न की तलाश में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकल रहे हैं.
उदाहरण से समझें...
अगर आपके सामने भी दो विकल्प दिए जाए, जहां एक तरफ शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव है, दूसरी तरफ सरकारी बॉन्ड में बंपर रिटर्न. जाहिर है कि आप भी दूसरा ऑप्शन ही चुनेंगे.विदेशी निवेशक भी यही कर रहे हैं. भारतीय बाजार की उठापटक के बीच अपना पैसा निकालकर अमेरिका में सरकारी बॉन्ड की यील्ड में लगा रहे हैं.
मार्केट एक्सपर्ट और compcircle के CEO क्षितिज महाजन कहते हैं...
भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों का रिटर्न गिर जा रहा है. 2026 में सेंसेक्स करीब 15.5% और निफ्टी करीब 14% नीचे हैं. डॉलर में ये गिरावट 20% से ज्यादा है. ये फर्क विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ाता है. बेहतर रिटर्न की तलाश में FII भारत से पैसा निकाल रहे हैं. इसके अलावा STT, कैपिटल गेन जैसे टैक्स निवेशकों का उत्साह कम करते हैं.
भारत के शेयर बाजार से निकल रहा पैसा कहां जा रहा है?
मार्केट में पैसा लगाने वाले हर निवेशक की प्राथमिकता प्रॉफिट और बेहतर रिटर्न हासिल करना है. विदेशी निवेशक की बिकवाली के पीछे भी यही वजह है. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बढ़ने, डॉलर का लगातार मजबूत होने की वजह से FII भारत जैसे बाजारों से विदेशी पूंजी निकलकर अमेरिका के सरकारी बॉन्ड में लगा रहे हैं.
विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार से बेरूखी की वजह
- US Bond Yield की मजबूती
- मजबूत डॉलर
- महंगा कच्चा तेल
- महंगा तेल से कंपनियों की कमाई पर असर
चीन, ताइवान-कोरिया की ओर निवेशकों का बढ़ रहा रुझान
मामला सिर्फ बाजार से विदेशी निवेश की बिकवाली का नहीं है, असली चुनौती सरकारी नीतियों में बदलाव, बार-बार बदलते नियम और रेगुलेटरी को लेकर अनिश्चितता निवेश को मुश्किल बना रहे हैं. AI और सेमीकंडक्टर निवेश की वैश्विक दौड़ में भारत फिलहाल पिछड़ रहा है, ऐसे में पूंजी ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों की ओर जा रही है.
निवेशकों को AI इन्फ्रास्कट्रक्चर, चिप इंडस्ट्री में निवेश का विकल्प भारत में नहीं मिल रहा है. ऐसे में वो यहां से पैसा निकालकर उन देशों में लगा रहे हैं, जहां तेजी से ये सेक्टर या तो बढ़ रहा है या इसकी पूरी सप्लाई चेन बनी हुई है. टैरिफ, लॉजिस्टिक, टैक्स के जोखिम निवेश को मुश्किल बनाते हैं .
शेयर मार्केट और गिरेगा? चीन से आई रिपोर्ट दे रहा सिग्नल
सिर्फ अमेरिका की बॉन्ड नहीं, बल्कि चीन भी अपनी नीतियों में बदलाव कर विदेशी निवेशकों को अपनी ओर खींच रहा है. बैंक ऑफ अमेरिका का की रिपोर्ट इस ओर इशारा करती है कि विदेशी निवेशकों से चीन के बाजार से पैसा निकालने कम कर दिया है.रिपोर्ट के मुताबिक बीते 4 साल में विदेशी निवेशक चीनी शेयरों में हिस्सेदारी घटा रहे थे, लेकिन अब उनका एवरेज इन्वेस्टमेंट अंडरवेट से बेंचमार्क के बराबर हो गया है. चीन में AI,सेमीकंडक्टर और टेक कंपनियों की बढ़ती संभावनाएं,निवेशकों के लिए बेहतर कमाई का विकल्प बन रही है.
चीन में लौट रहा विदेशी पैसा, भारत की चुनौती बढ़ाएगा?
चीन के विशाल अर्थव्यवस्था पर विदेशी निवेशकों को भरोसा बढ़ा है. साल 2026 के शुरुआत महीनों में चीन के शेयर बाजार में FII इन्फ्लो 160 अरब डॉलर तक पहुंच गया. Reuters Breakingviews की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में निवेश को लेकर वैश्विक निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौट रहा है . चीन ने AI को अपनाने में बड़ी तेजी दिखाई है. सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ पर उसका दबदबा है, चीन की टेक्नॉलिजी, उसके बाजार का साइज, सरकारी दखल ना होना उसे विदेशी निवेशकों के लिए बेहतर बनाता है .बड़ी अर्थव्यवस्था वाला चीन टैरिफ के मुद्दे पर अमेरिका को मुंहतोड़ जवाब देता रहा है, जो निवेशकों को सुरक्षा का भरोसा देती है.
भारत के बाजार को चिंता क्यों हो रही है?
बैंक ऑफ अमेरिका के स्ट्रैटेजिस्ट नाइजेल टपर ने 28000 बड़े फंडों का एनालिसिस कर ये रिपोर्ट तैयार की है. एक तरफ विदेशी फंड भारत से बाहर जा रहा है, दूसरी ओर चीन के बाजार में को लेकर विदेशी निवेशकों का आकर्षण बढ़ना भारत के लिए खतरा बन सकता है. विदेशी निवेशक भारत में अपनी हिस्सेदारी और घटा सकते हैं और चीन की ओर बढ़ सकते हैं.
कब भारतीय बाजार में लौटेगी विदेशी निवेशक ?
FII का इनफ्लो बढ़े, इसके लिए जरूरी है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कमजोर हो, ब्याज दरों पर स्पष्टता हो, डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हो सके. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट हो, ताकि महंगाई का डर बाजार पर कम हो सके.
Complete circle Wealth के CEO क्षितिज महाजन कहते हैं...
भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों का निवेश बढ़े, इसके लिए जरूरी है कि सरकार पॉजिटिव माहौल तैयार करें. उम्मीद है कि Securities Transaction Tax (STT) ,कैपिटल गेन टैक्स जैसे नियमों में सुधार हो, ताकि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार की ओर रूख करें.
FAQ: शेयर बाजार क्या है?
शेयर मार्केट एक डिजिटल और व्यवस्थित बाजार है, जहाँ लिस्टेड कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं. शेयरहोल्डर्स और कंपनियों के बीच खरीद-फरोख्त होती है. SEBI बाजार पर निगरानी रखती है.
सवाल:शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों के निवेश की भूमिका क्या है?
शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FII/FPI) का रोल भारी पूंजी प्रवाह, Liquidity बढ़ाने और कंपनियों के वैल्यूएशन को बढ़ाने में है. विदेशी निवेशक अपने साथ बड़े पैमाने पर पैसा बाजार में लाते हैं. जिसके बाजार में तेजी आती है. जब ये बाजार से पैसा निकालने लगते हैं, शेयर बाजार गिरने लगता है.
सवाल:विदेशी निवेशक कौन होते हैं?
जवाब:किसी देश के नागरिक या कंपनियां जब दूसरे देश के शेयर बाजार, बॉन्ड या म्यूचुअल फंड में पैसा निवेश करती है, तो उसे फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स कहते हैं. ये शार्ट टर्म निवेशक होते हैं, जो बाजार के हालात देखकर पैसा निकालते-लगाते हैं.
सवाल: शेयर बाजार गिरने से क्या होता है ?
जवाब: शेयर बाजार सेंटीमेंट के साथ चलता है. निगेटिव सेंटीमेंट बाजार को नीचे धकेलते हैं. शेयर बाजार गिरने से निवेशकों की संपत्ति का वैल्यूएशन कम होने लगता है. लॉन्ग टर्म में ये अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता को भी बढ़ती है. बाजार गिरने से...
- पोर्टफोलियो वैल्यू घटती है
- बाजार में पैनिक सेलिंग शुरू हो जाती है.
- कंपनियों का वैल्यूएशन गिरने लगता है, जिससे उनके लिए फंड जुटाना मुश्किल होता है.
- आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ जाता है.