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चुनाव में इजरायल के अरब नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टियों को बड़ी जीत मिलने के बाद बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स भी हैरान हैं. इस बीच, तेल अवीव में इजरायली लोगों ने एक यहूदी-अरब सरकार के समर्थन में रैली निकाली. बुधवार को इजरायल के तेल अवीव में, वामपंथी इजरायली नागरिकों ने अरबों और यहूदियों की संयुक्त सरकार की मांग करते हुए सड़कें जाम कर दीं,जिसके बाद पुलिस को मामले में दखल देना पड़ा. भारी तादाद में लोग सड़कों पर उतर आए. उनके हाथों में बैनर थे और वह नारेबाजी कर रहे थे.
रोनी एलॉन नाम की एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हमारे राजनेता अरबों के साथ साझेदारी को एक तरह का जाल, या एक कड़वी गोली मानते हैं जिसे उन्हें निगलना ही पड़ेगा. लेकिन मेरी नजर में बात बिल्कुल उलट है. असल में, यही इस जाल से बाहर निकलने की कुंजी है. इजरायल की आबादी में अरबों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है, और उन्हें शामिल किए बिना या एक संयुक्त सरकार बनाए बिना, किसी भी तरह के बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है. संसद में उनका प्रतिनिधित्व होना जरूरी है.'
अनुमान है कि दो मुख्य अरब पार्टियां नेसेट (इजरायल की संसद) की 120 सीटों में से लगभग 19 सीटें जीत सकती हैं, जिससे सरकार बनाने में उनकी 'किंगमेकर' की भूमिका हो सकती है.पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने बार-बार कहा है कि वे अरब पार्टियों के साथ सहयोग नहीं करेंगे. उनका आरोप है कि इजरायली चुनाव को अरब पार्टियों ने 'चुरा' लिया है.
कड़े मुकाबले वाले इस चुनाव के बाद, न तो उनके राजनीतिक गुट को और न ही मुख्य विपक्षी दल को संसद में बहुमत हासिल करने के लिए पर्याप्त सीटें मिल पाई हैं. चूंकि राजनीतिक दल अगली सरकार बनाने के विकल्पों पर माथापच्ची कर रहे हैं, ऐसे में इन पार्टियों का प्रदर्शन गठबंधन की बातचीत में एक अहम भूमिका निभा सकता है.
Israelis rallied in Tel Aviv for a Jewish-Arab gov’t after parties representing Israel’s Arab citizens made major gains in Tuesday’s election. The two main Arab parties are projected to win around 19 of the Knesset’s 120 seats, potentially giving them a say in who forms gov’t. https://t.co/HplAawM2TW
— Al Jazeera English (@AJEnglish) October 29, 2026
इजरायल में जिन दो बड़ी अरब पार्टियों को सीटें मिली हैं, उनमें यूसुफ जबरीन की अगुआई वाली 'ज्वॉइंट लिस्ट' और मंसूर अब्बास की अगुआई वाली 'राआम' पार्टी है. अरब-बहुल 'ज्वॉइंट लिस्ट' के नेता यूसुफ जबरीन ने कहा कि उनकी पार्टी अपनी 12 सीटों का इस्तेमाल नेतन्याहू की सरकार को हटाने और इजरायल की राजनीतिक स्थिति को बदलने में मदद करने के लिए करेगी. जबरीन ने कहा कि 'ज्वॉइंट लिस्ट' आइजेनकोट की अगुआई वाली सरकार में शामिल नहीं हो सकती, क्योंकि आइजेनकोट ने गाजा में इजरायली सैन्य अभियान और दक्षिणी लेबनान पर कब्जे का समर्थन किया था.
हालांकि, उन्होंने बाहर से आइजेनकोट के गुट को समर्थन देने की संभावना खुली रखी है, ताकि एक ऐसी अल्पसंख्यक सरकार बन सके जो विश्वास मत में टिकी रह सके. जबरीन ने कहा, 'हमारे पास अपने समुदाय की सुरक्षा, उनके अधिकारों को आगे बढ़ाने और उनके लिए समानता को बढ़ावा देने से जुड़ी कुछ मांगें हैं.'
दूसरी मुख्य अरब पार्टी 'राआम' है, जिसकी बागडोर मंसूर अब्बास के हाथ में है. उन्होंने 'राआम' को गठबंधन के लिए एक ज्यादा प्रभावी पार्टी बनाने की कोशिश की है. उन्होंने अपनी पार्टी की लिस्ट में एक पूर्व यहूदी पुलिस अधिकारी को शामिल किया है और कहा है कि वे आइजेनकोट की अगुआई वाली सरकार में शामिल होने के लिए तैयार हैं.
52 साल के मंसूर अब्बास एक अरब-इजरायली राजनेता, डेंटिस्ट और 'राआम' पार्टी के नेता हैं. 2019 में नेसेट (इजरायली संसद) के लिए चुने गए थे. उन्होंने घरेलू मुद्दों पर ज्यादा फोकस देकर अरब राजनीति को एक नई दिशा दी. उन्होंने इजरायल-फिलिस्तीन के संघर्ष को अपनी बातचीत की शर्त बनाने के बजाय, अरब नागरिकों के लिए नागरिक फायदों को तवज्जो दी है। उनका ध्यान अपराध, सामाजिक-आर्थिक असमानता, बुनियादी ढांचे और नगरपालिका फंडिंग जैसे मुद्दों पर रहता है. इसके अलावा, वे 2021 से 2022 तक इजरायल की सत्ताधारी गठबंधन सरकार का भी हिस्सा रहे हैं.
यूसुफ जबरीन 'हदाश' पार्टी के मुखिया हैं. मई 2026 में उन्हें अरब-बहुसंख्यक 'हदाश' पार्टी का अध्यक्ष चुना गया था और वे 'ज्वॉइंट लिस्ट' नाम के राजनीतिक गठबंधन के अगुआ भी हैं. 23 फरवरी 1972 एक इजरायली अरब वकील, शिक्षाविद और राजनेता हैं. वह 2015 से 2021 तक सांसद रहे. जबरिन का जन्म उम्म अल-फहम में हुआ था. उन्होंने 1995 में हिब्रू यूनिवर्सिटी ऑफ यरुशलम से कानून की डिग्री हासिल की.
इसके बाद 1997 में अमेरिकन यूनिवर्सिटी के वॉशिंगटन कॉलेज ऑफ लॉ से मास्टर डिग्री, और 2003 में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर से डॉक्टरेट की डिग्री पाई. 1997 से 2000 तक, वे 'एसोसिएशन फॉर सिविल राइट्स इन इजरायल' की नॉर्दर्न ब्रांच में कानूनी निदेशक थे. बाद में उन्होंने अमेरिकन यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड, यूनिवर्सिटी ऑफ हाइफा, तेल अवीव यूनिवर्सिटी और तेल-हाई एकेडमिक कॉलेज में पढ़ाया. उन्होंने नासरत में 'दिरसात अरब सेंटर फॉर लॉ एंड पॉलिसी' की अगुआई भी की.

'ज्वॉइंट लिस्ट'इजरायल में अरब-बहुसंख्यक पार्टियों का एक गठबंधन है, जिसे 2015 में अरब नागरिकों के वोटों को एकजुट करने के लिए बनाया गया था. इसमें अहमद तिबी की 'ता'अल' (Ta'al) पार्टी शामिल है. ऐतिहासिक रूप से, इसने 'हदाश' जैसी धर्मनिरपेक्ष, राष्ट्रवादी और वामपंथी विचारधारा वाली पार्टियों को एक साथ लाने का काम किया है. यह गठबंधन नागरिक समानता, अरब समुदायों में अपराध पर लगाम लगाने और कब्जे को खत्म करने के मुद्दों को तवज्जो देता है. इसने सरकारों में शामिल होने के बजाय, बाहर से उन्हें समर्थन दिया है.
इजरायल के अरब नागरिक खुद को 'अरब इजरायली' या 'इजरायल में रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिक' कहते हैं. कुल आबादी में इनका हिस्सा 20% है. इनकी संख्या लगभग 21 लाख है. मेडिकल फील्ड में इनकी तादाद अच्छी खासी है.
इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय और 'टॉब सेंटर फॉर सोशल पॉलिसी स्टडीज' के आंकड़ों के अनुसार, इजरायल में कुल डॉक्टरों में 20% से ज्यादा, नर्सों में लगभग एक-चौथाई और लाइसेंस प्राप्त फार्मासिस्टों में लगभग आधे अरब नागरिक हैं. दो अरब नागरिक सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके हैं. इसके अलावा, अरब इंजीनियर, स्कॉलर, राइटर और खिलाड़ी भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं.
कई दशकों तक, अरब पार्टियों ने सरकारों को बाहर से समर्थन दिया. कैबिनेट में उनका प्रतिनिधित्व केवल कुछ खास नियुक्तियों तक ही सीमित रहा. इनमें 2001 में ड्रूज समुदाय के सांसद सलाह तरीफ, 2007 में लेबर पार्टी के रालेब मजादेले, और बाद में इसावी फ्रेज और अयूब कारा जैसे नाम शामिल हैं. 2021 में एक बड़ा बदलाव आया, जब अब्बास की इस्लामी पार्टी 'राआम', नफताली बेनेट और यायर लापिड के सत्ताधारी गठबंधन में शामिल हो गई.
इजरायल के चुनाव आयोग ने बताया कि अब 'डबल लिफाफे'वाले वोटों की गिनती चल रही है. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी सभी नॉर्मल वोटों की गिनती पूरी नहीं हुई है.'टाइम्स ऑफ इजरायल' की रिपोर्ट के मुताबिक, इन डबल लिफाफों में उन वोटर्स के वोट शामिल हैं, जिन्होंने गैर-हाजिर रहकर वोट डाला था.इनमें आईडीएफ सैनिक, कैदी, चिकित्सा कर्मी, स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग और विदेशों में तैनात इजरायली प्रतिनिधि शामिल हैं.
सीईसी ने यह भी बताया कि सभी नॉर्मल वोटों की गिनती अभी पूरी नहीं हुई है. आयोग के अनुसार, 12,018 नॉर्मल वोटिंग सेंटर्स में से 11,712 सेंटर्स के नतीजों को प्रोसेस कर लिया गया है, जिनमें 5,126,759 वोटर्स के वोट शामिल हैं. आयोग ने आगे बताया कि बाकी बचे वोटिंग सेंटर्स के लिए अभी वेरिफिकेशन प्रोसेस जारी है.
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने एक बयान में चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया. साथ ही, उन्होंने अरब-पार्टियों पर इजरायल राज्य को कमजोर करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है.
लिकुड पार्टी ने कहा,'इजरायल के चुनावों को अरब पार्टियों ने हथिया लिया है. ये पार्टियां आतंकवाद का समर्थन करती हैं और यहूदी मुल्क को खत्म करना चाहती हैं. इन्होंने रिश्वतखोरी, धमकियों, हिंसा, धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराध किए हैं और मतदाताओं को जुटाने के लिए अवैध सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है.'
इन आरोपों के बाद, लिकुड ने चुनावी गड़बड़ियों की पुलिस जांच की मांग की है.पार्टी ने इजरायल की घरेलू सुरक्षा एजेंसी 'शिन बेट' से भी जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि यह जांच वोटर्स के साथ धोखाधड़ी, डराने-धमकाने और चुनाव से जुड़े अन्य संभावित उल्लंघनों के आरोपों पर होनी चाहिए.
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि मतदाताओं को जुटाने के लिए बैन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया था, और इन दावों की गहरी जांच होनी चाहिए. ये आरोप तब सामने आए हैं जब 'राआम' और 'ज्वॉइंट लिस्ट' ने चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया है. अनुमान है कि अरब पार्टियों को कुल मिलाकर 19 सीटें मिल सकती हैं. इन सीटों की बदौलत, सरकार बनाने की बातचीत में उनका काफी प्रभाव हो सकता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि न तो नेतन्याहू के गुट को और न ही मुख्य विपक्षी दल को संसद में पूर्ण बहुमत मिलता दिख रहा है.