15 मिनट मिले, 4.5 घंटे बोलता रहा; वो मौके जब 'जानी दुश्मन' ने अमेरिका को उसी की सरजमीं पर धोया
अमेरिका और ईरान के बीच 7 महीने से तनाव जारी है. अब यूएनजीए में हिस्सा लेने ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान न्यूयॉर्क पहुंच गए हैं. उनके भाषण पर हर किसी की नजर रहेगी. लेकिन इससे पहले भी ऐसे कई मौके आए हैं, जब विरोधियों ने अमेरिका को उसी की सरजमीं पर जमकर कोसा है.
फरवरी में जंग शुरू हुई और अमेरिका ने ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए. इसमें सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह खामेनेई समेत परिवार के कई लोगों की मौत हो गई. जंग की शुरुआत के कुछ ही वक्त बाद आधी से ज्यादा ईरानी लीडरशिप का खात्मा हो चुका है. नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अब तक दुनिया के सामने नहीं आए. लेकिन जंग बदस्तूर जारी है. ईरान ने घुटने टेकने से इनकार कर दिया और अमेरिका को करारा जवाब दिया. इस दौरान बातचीत का दौर भी आया. मगर बात नहीं बनी.
अब पेजेशकियान 7 महीने बाद न्यूयॉर्क पहुंचे हैं, जहां वह संयु्क्त राष्ट्र महासभा में भाषण देंगे. उनसे पहले विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी पहुंच चुके हैं. दुश्मन देश के नेताओं को वीजा भी अमेरिका ने दिया है. लेकिन यह पहली बार नहीं है, जब अमेरिका ने विरोधी नेताओं को वीजा दिया है और उन्होंने अमेरिका को पानी पी-पीकर कोसा हो.
फिदेल कास्त्रो ने 4.5 घंटे जमकर कोसा
जब क्यूबा में क्रांति हुई तो जनवरी 1959 में फिदेल कास्त्रो सत्ता में आए. इससे अमेरिका बेहद खफा था. इसके बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति आइजनहावर ने 1960 में अपनी खुफिया एजेंसी सीआईए को टास्क दिया कि वह कास्त्रो की सरकार को हटा दे. मगर 1960 के सितंबर में यूएनजीए बैठक के लिए अमेरिका को कास्त्रो को वीजा देना पड़ा. वह न्यूयॉर्क आए. जिस शेल्बर्न होटल में उन्होंने रूम बुक कराया था, उसने उनको मना कर दिया. इसके बाद वह किसी अन्य होटल में शिफ्ट हो गए. यहां उनकी मुलाकात पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के अलावा मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल नासेर, समेत अन्य नेताओं से हुई.
जब 26 सितंबर 1960 को यूएनजीए में उनके भाषण की बारी आई तो उनको 15 मिनट का समय दिया गया था. लेकिन उन्होंने 4.5 घंटे बोला और अमेरिका को उसी की सरजमीं पर जमकर कोसा.
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जेएफ कैनेडी को अज्ञानी करोड़पति और अनपढ़ और रिचर्ड निक्सन को कमजोर सियासी बुद्धि वाला नेता बताया.
यासिर अराफात लाए बंदूक और जैतून की डाली
साल था 1974. अलग फिलिस्तीन देश की मांग चल रही थी. अमेरिका और इजरायल ने फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन यानी पीएलओ को आतंकी संगठन करार दिया हुआ था. लेकिन 1974 में यूएनजीए ने माना कि वह फिलिस्तीनी लोगों का आधिकारिक प्रतिनिधि है. फिर क्या था भाषण देने के लिए उनको बुलाया गया. इजरायल और अमेरिका नाराज हुए. लेकिन प्रोटोकॉल के तहत अमेरिका को वीजा देना पड़ा.
13 नवंबर 1974 को पीएलओ के बॉस यासिर अराफात यूएनजीए पहुंचे. उन्होंने 80 मिनट का भाषण दिया और फिलिस्तीन के लिए अलग मुल्क की मांग उठाई. यह पहला मौका था, जब यूएन का कोई गैर सदस्य संगठन का शख्स यूएनजीए में भाषण दे रहा था. अपने भाषण में अराफात ने कहा कि मेरे एक हाथ में स्वतंत्रता सेनानी की बंदूक है और दूसरे हाथ में जैतून की डाली है और जैतून की डाली को मेरे हाथ से गिरने मत दीजिए.
जब ह्यूगो शावेज बोले- अब तक बदबू आ रही है
2006 के सितंबर में यूएनजीए में जॉर्ज बुश ने भाषण दिया. इराक और अफगानिस्तान में उस वक्त चल रही जंग का बचाव करते हुए उन्होंने इसे आजादी और लोकतंत्र की लड़ाई बताया. अगले दिन वेनेजुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज भाषण देने पहुंचे. उन्होंने वहां एक कैथलिक क्रॉस बनाया और भाषण में कहा, 'कल यहां एक शैतान आया था. बिल्कुल यहीं. अब तक यहां से बदबू आ रही है.' उन्होंने वीटो पावर खत्म करने और यूएन में सुधार की वकालत की.
गद्दाफी ने फाड़ दी थी यूएन चार्टर की कॉपी
1969 के सितंबर में लीबिया के राजा इदरीस I की सत्ता तत्कालीन लीबियाई सेना के कैप्टन मुअम्मर गद्दाफी ने उखाड़ फेंकी. गद्दाफी की नीतियां अमेरिका विरोधी थीं और उन्होंने न्यूक्लियर प्रोग्राम भी शुरू कर दिया. अमेरिका ने लीबिया को आतंक फैलाने वाला देश करार दे दिया. साल 2009 यानी सत्ता संभालने के 40 साल बाद गद्दाफी यूएन पहुंचे. उन्होंने भूरा बेडुइन चोगा, ब्लैक चश्मा और टोपी के अलावा उन्होंने ब्रोच भी लगाया हुआ था. बोलने के लिए 15 मिनट मिले थे लेकिन 96 मिनट तक वह नॉनस्टॉप बोलते रहे. भाषण लंबा होने की वजह से हॉल खाली हो गया. अमेरिका की तत्कालीन विदेश मंत्री तक बाहर चली गईं. गद्दाफी के ट्रांसलेटर ने भी हाथ खड़े कर दिए और वह भी बाहर चला गया. भाषण खत्म होने से पहले उन्होंने यूएन चार्टर की एक कॉपी उठाई और उसे कुछ हिस्सों को बुलंद आवाज में पढ़ा और फिर थोड़ा सा फाड़कर उसे पीछे की ओर फेंक दिया.
महमूद अहमदीनेजाद ने यूएस को दिखाया आईना
साल 2010 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान से बातचीत की बात कही और उनका लहजा भी बेहद नरम था. लेकिन जब कुछ घंटों बाद ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदनेजाद की बारी आई तो पूरा सीन ही बदल गया. उन्होंने 9/11 हमले के लिए अमेरिका को ही दोषी ठहराते हुए कहा कि इसमें उसका ही हाथ है. उन्होंने इसकी जांच के लिए एक टीम बनाने की भी मांग की. उन्होंने जो हमले की तीन थ्योरी बताईं, उसके सुनकर कई 27 देश हॉल से निकल गए. इसके बाद व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ओबामा को यह टिप्पणियां बेहद अग्रेसिव लगीं.