जर्मनी के 'दूसरे हिटलर' की पार्टी जीती, चांसलर की कुर्सी हिली, कौन हैं उलरिच सिगमंड, जो चाहते हैं शरणार्थियों का देश निकाला
जर्मनी की सियासत में एक बड़ा उलटफेर हुआ है.अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी नाम की धुर दक्षिणपंथी पार्टी चुनाव जीत गई है. यह जर्मनी के सबसे खतरनाक शख्स कहे जाने वाले उलरिक सिगमंड की पार्टी है. उनकी इस जीत से चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भी हैरान हैं.
हिटलर के बाद 'जर्मनी के सबसे खतरनाक शख्स' की पार्टी एक राज्य में चुनाव जीत गई है, जिससे मुल्क के बड़े-बड़े सियासी पंडितों के अलावा खुद चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भी हैरान हैं. बात हो रही है 35 साल के टेलेजेनिक आंत्रप्रेन्योर उलरिक सिगमंड की, जिनकी धुर दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने सैक्सोनी-आनहाल्ट राज्य चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की है. AfD का चुनाव में समर्थन दोगुना हुआ और उसने लगभग 44 प्रतिशत वोट हासिल किए, जिससे राज्य की राजधानी मैगडेबर्ग से लेकर बर्लिन में फेडरल चांसलरी तक हलचल मच गई.
FP की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शानदार जीत के बाद सिगमंड ने मैग्डेबर्ग में पार्टी मुख्यालय में देर रात समर्थकों को संबोधित किया. उनको सुनने के लिए भीड़ काफी उत्साहित नजर आई. सिगमंड ने कहा कि उनकी पार्टी ने इतिहास रचते हुए साफ जनादेश मिला है.
जर्मन झंडे लहराती भीड़ के बीच AfD के राष्ट्रीय सह-नेता ऐलिस वेडेल और टिनो क्रुपल्ला के साथ खड़े होकर, सिगमंड ने इस शानदार फतह को न केवल एक स्थानीय जीत, बल्कि देश भर में एक बड़े बदलाव की शुरुआत बताया.
1945 के बाद दक्षिणपंथी पार्टी का सबसे मजबूत प्रदर्शन
यह चुनावी नतीजा 1945 के बाद से जर्मनी के किसी राज्य के चुनाव में किसी दक्षिणपंथी (far-right) राजनीतिक पार्टी का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन है. इससे चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की सेमी-दक्षिणपंथी पार्टी, क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (CDU) को जबरदस्त झटका लगा है. 2021 के पिछले चुनाव की तुलना में इस बार पार्टी का क्षेत्रीय वोट शेयर आधा रह गया है.
सोमवार तड़के जब वोटों की गिनती पूरी हुई, तो बर्लिन और जर्मनी भर की क्षेत्रीय राजधानियों में राजनीतिक आलाकमान एक ऐतिहासिक मुश्किल से जूझ रहा था कि क्या AfD को सरकार से बाहर रखने के लिए बनाई गई लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक 'फायरवॉल' कायम रह पाएगी, या फिर देश दक्षिणपंथी राज्य-शासन के एक ऐसे दौर में एंट्री कर रहा है जो पहले कभी नहीं देखा गया?
हमने खबर की शुरुआत में सिगमंड को जर्मनी का सबसे खतरनाक शख्स लिखा. आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्यों है. यह आपको बताएंगे, लेकिन पहले उनके बारे में जान लेते हैं.
कौन हैं उलरिक सिगमंड?
उलरिच सिगमंड 35 साल के हैं और जर्मनी की सियासत में उन्होंने तेजी से तरक्की की है. एक लोकल पार्टी ऑर्गनाइजर से शुरुआत करने वाले सिगमंड आज जर्मनी की सियासत में ध्रुवीकरण करने वाले और विवादित चेहरों में से एक बन गए हैं. उनका जन्म 25 अक्टूबर 1990 को उत्तरी सैक्सनी-एनहाल्ट के शहर हावेलबर्ग में हुआ. और ग्रामीण ऑल्टमार्क इलाके में परवरिश हुई. उनके करियर की शुरुआत सियासत या सरकारी कामकाज से नहीं, बल्कि प्राइवेट बिजनेस से हुई.
खुद को बताते हैं पैदाइशी सेल्समैन
होलसेल और फॉरेन ट्रेड में स्पेशलिस्ट के तौर पर वोकेशनल अप्रेंटिसशिप पूरी करने के बाद, उन्होंने आगे की पढ़ाई की और हैम्बर्ग की यूरोपियन डिस्टेंस लर्निंग यूनिवर्सिटी से बिजनेस साइकोलॉजी और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में बैचलर डिग्री हासिल की. करियर की शुरुआत में सिगमंड ने अलग-अलग कॉरपोरेट रोल्स जैसे अकाउंट मैनेजमेंट और सेल्स में काम किया. सिगमंड खुद को पैदाइशी सेल्समैन बताते हैं.
ये तो हुई बात सिगमंड की. अब उनका विवादित इतिहास जान लेते हैं.
बेहद कट्टरपंथी धड़े के अगुआ
सिगमंड बेहद मिलनसार स्वभाव के हैं. लेकिन वह जर्मनी की राजनीति के एक बहुत ही कट्टरपंथी धड़े के अगुआ हैं. उनके राजनीतिक एजेंडे और पुराने रिश्तों की वजह से खुफिया एजेंसियों और नागरिक अधिकार संगठनों ने बार-बार उनकी कड़ी जांच-पड़ताल की है.
2023 के आखिर में, सैक्सनी-एनहाल्ट राज्य के संविधान संरक्षण कार्यालय (Verfassungsschutz) ने आधिकारिक तौर पर AfD की स्टेट ब्रांच को पक्के तौर पर दक्षिणपंथी चरमपंथी संगठन बताया था.
खुफिया एजेंसी ने जातीय-राष्ट्रवादी विचारधारा, विदेशियों को लेकर नफरत (जेनोफोबिया), मुसलमानों से दुश्मनी और बुनियादी लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कमजोर करने की कोशिशों के कई सबूत पेश किए.
सीक्रेट मीटिंग में हुए थे शामिल
जनवरी 2024 में सिगमंड पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए, जब 'करेक्टिव' (Correctiv) नाम के न्यूज आउटलेट की एक खोजी रिपोर्ट से पता चला कि वह नवंबर 2023 में पॉट्सडैम के बाहर एक होटल में हुई एक सीक्रेट बैठक में शामिल हुए थे.
इस बैठक में दक्षिणपंथी विचारधारा वाले लोग, आर्थिक मदद देने वाले और ऑस्ट्रिया के कट्टरपंथी एक्टिविस्ट मार्टिन सेलनर शामिल हुए थे.
बैठक के दौरान, सेलनर ने 'रीमाइग्रेशन' का एक मास्टर प्लान पेश किया. इसके तहत लाखों विदेशी नागरिकों, शरण चाहने वालों और यहां तक कि अप्रवासी बैकग्राउंड वाले उन जर्मन नागरिकों को बड़े पैमाने पर देश से बाहर निकालने का प्लान था, जो देश की संस्कृति में घुल-मिल नहीं पाए थे.