'बेबी फे' की बीमारी: 14 दिन की नवजात को क्या समस्या थी जो लगाना पड़ा बंदर का दिल, कितने दिन रही जिंदा?
पीडियाट्रिक कार्डिएक सर्जन डॉ. लियोनार्ड बेली ने 26 अक्टूबर 1984 को 14 दिन की नवजात बच्ची के शरीर में अफ्रीकी बंदर 'बबून' का दिल प्रत्यारोपित करने में सफलता हासिल की थी. हालांकि, सफल ऑपरेशन के बाद भी 21 दिन बाद बच्ची का निधन हो गया था.
26 अक्टूबर 1984 को अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक ऐसी घटना हुई थी, जिसने मेडिकल इतिहास को नया आयाम देने का काम किया. दरअसल, इसी दिन अमेरिकी डॉक्टरों ने एक 14 दिन की नवजात बच्ची के शरीर में अफ्रीकी बंदर 'बबून' का दिल प्रत्यारोपित किया था. बच्ची का नाम स्टेफनी फे ब्यूक्लेयर था, लेकिन मेडिकल हिस्ट्री में इस बच्ची को 'बेबी फे' के नाम से जाना जाता है. बता दें कि बेबी फे जन्म से ही 'हाइपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम' नामक बीमारी से पीड़ित थी. इस बीमारी में दिल का बायां हिस्सा पूरी तरह विकसित नहीं होता. उस दौर में इस बीमारी का कोई इलाज नहीं था, जिसके कारण ऐसे बच्चों की जन्म के कुछ दिनों बाद ही मौत हो जाती थी. ऐसे में 'बेबी बे' के माता-पिता को जब बच्ची में इस बीमारी का पता चला, तो उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई.
जेनोट्रांसप्लांटेशन पर रिसर्च कर रहे थे डॉ. बेली
अपने जिगर के टुकड़े को बचाने के लिए माता-पिता कुछ भी करने को तैयार थे. उन्होंने तमाम डॉक्टरों के पैर पकड़े, लेकिन किसी के पास बच्ची का कोई इलाज नहीं था. हर गुजरते दिन के साथ बच्ची की हालत गंभीर होती जा रही थी, तभी बेबी बे के माता-पिता को कैलिफोर्निया के लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के पीडियाट्रिक कार्डिएक सर्जन डॉ. लियोनार्ड बेली के बारे में जानकारी मिली. डॉ बेली पिछले कई वर्षों से जेनोट्रांसप्लांटेशन (इंसानों में जानवरों के अंगों को प्रत्यारोपित करना) पर रिसर्च कर रहे थे.
डॉ. बेली ने मां-बाप से बबून का दिल मांगा
माता-पिता ने तुरंत डॉ. बेली से संपर्क किया. डॉ. बेली के सामने समस्या यह थी कि उन्होंने जेनोट्रांसप्लांटेशन की सिर्फ रिसर्च की थी, कभी ऐसा ऑपरेशन करने की जरूरत नहीं पड़ी थी. डॉ. बेली ने बच्ची के लिए एक इंसानी दिल की खोजबीन की, लेकिन सफलता नहीं मिली. वह बच्ची को मरता हुआ भी नहीं देख सकते थे, इसलिए उन्होंने माता-पिता को बच्ची के लिए एक बबून (अफ्रीकी बंदर) के बच्चे का दिल लाने का सुझाव दिया. पहले तो मां-बाप चौंक गए, फिर उन्होंने किसी तरह से 7 महीने के बबून का बच्चा लाकर डॉक्टर बेली को दिया.
14 दिन की बच्ची को लगाया बबून का दिल
डॉक्टर बेली ने बबून के बच्चे का अखरोट जितने आकार का दिल निकालकर बच्ची के शरीर में प्रत्यारोपित कर दिया. ऑपरेशन सफल रहा. चिकित्सा की दुनिया में इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था, इसलिए इसे बहुत बड़ा मेडिकल चमत्कार माना गया. ऑपरेशन के वक्त बच्ची सिर्फ 14 दिन की थी. हालांकि, सफल ऑपरेशन के 21 दिनों के बाद बच्ची के शरीर ने बंदर के दिल को पूरी तरह से खारिज करना शुरू कर दिया. इससे बच्ची की किडनी खराब हो गईं और 15 नवंबर 1984 को बच्ची का निधन हो गया.
सफल ऑपरेशन के बाद भी डॉ. बेली का विरोध
इस घटना ने जहां मेडिकल साइंस को नया आयाम दिया, वहीं डॉक्टर बेली को भारी विरोध का भी सामना करना पड़ा. पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने डॉ. बेली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और एक बेजुबान बबून के बच्चे की जान लेने के लिए अस्पताल के बाहर भारी हंगामा काटा. कुछ डॉक्टरों ने भी इस ऑपरेशन का विरोध किया. उन्होंने डॉ. बेली पर बच्ची के साथ अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसी भी इंसान का शरीर जानवर के अंगों को स्वीकार नहीं कर सकता. यह जानते हुए भी डॉ. बेली ने अपने प्रयोग के लिए एक 14 दिन की बच्ची का इस्तेमाल किया.
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