MP का फर्जी पासपोर्ट कांड: ₹15-30 हजार में सरपंच की चिट्ठी, आधार, पैन, वोटर ID, जन्म प्रमाण पत्र और 10वीं की फर्जी मार्कशीट... बांग्लादेशी से 'भारतीय' बनने के खेल का पूरा सच
मध्य प्रदेश के फर्जी पासपोर्ट मामलें में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अब शिकंजा कसना शुरू कर दिया है और रियाल चौधरी, जाय चौधरी, प्रियान राय और विप्लव अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद अब अन्य फरार आरोपियों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की तैयारी है, ताकि कोई भी संदिग्ध फर्जी दस्तावेजों के सहारे विदेश न भाग सके.
मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) फर्जी पासपोर्ट मामलें में अब लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की तैयारी में है. मध्यप्रदेश के डबरा, भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा और पार्डुणा के बौद्ध मठों के पते के नाम पर 70 फर्जी पासपोर्ट बनाए गए थे और इस मामलें में अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है. एसटीएफ मामलें में बांग्लादेशी कनेक्शन पर भी जांच कर रही है और अहम सबूत मिले हैं. STF की टीमें असम सहित प्रदेश अलग-अलग हिस्सों में जांच कर रही है. मध्य प्रदेश का फर्जी पासपोर्ट गिरोह महज एक आपराधिक जालसाजी का मामला नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, खुफिया एजेंसियों और पुलिस वेरिफिकेशन तंत्र की गंभीर खामियों को उजागर करता है.
असम के सीमावर्ती रास्तों से भारत में दाखिल होने वाले बांग्लादेशी नागरिकों को कागजों में 'भारतीय' बनाने और फिर उनके विदेशी पासपोर्ट तैयार कराने के पीछे एक संगठित इकोसिस्टम काम कर रहा था. STF, राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की परतों को टटोल रही हैं.
बांग्लादेशी से 'भारतीय' बनने के फर्जीवाड़े का 6 स्टेज मॉडल
STF की शुरुआती जांच और आरोपियों के इकबालिया बयान के आधार पर इस गिरोह की कार्यप्रणाली का खुलासा हुआ है. किसी भी संदिग्ध को भारतीय नागरिक का रूप देने के लिए सिस्टमैटिक तरीके से काम किया जाता था और फर्जीवाड़े का पूरा 6 स्टेज मॉडल था. इन 6 स्टेज पर दस्तावेज तैयार किए जाते थे.
- स्टेप 1 (स्थानीय प्रमाण पत्र): सबसे पहले ग्रामीण क्षेत्रों या पंचायतों से सरपंच के लेटरहेड पर फर्जी सरपंच का पत्र या निवास प्रमाण पत्र तैयार कराया जाता था.
- स्टेप 2 (वैध पहचान पत्र): सरपंच की चिट्ठी के आधार पर स्थानीय स्तर पर दलालों की मदद से आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड बनवाए जाते थे.
- स्टेप 3 (सप्लीमेंट्री डॉक्यूमेंट्स): पासपोर्ट आवेदन को मजबूत बनाने के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और 10वीं की फर्जी मार्कशीट तक तैयार की जाती थी.
- स्टेप 4 (एड्रेस कवर): पहचान छिपाने और पुलिस की नजरों से बचने के लिए भोपाल, ग्वालियर (डबरा), बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा के बौद्ध मठों और आश्रमों के पतों का इस्तेमाल किया जाता था.
- स्टेप 5 (सिस्टम बाईपास): थानों की पुलिस वेरिफिकेशन सेल और पासपोर्ट सेवा केंद्रों के कर्मचारियों से सांठगांठ कर फिजिकल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को केवल कागजों तक सीमित रखा गया.
- स्टेप 6 (अंतिम डिलीवरी): सभी डॉक्यूमेंट पूरे होते ही भारतीय पासपोर्ट जारी कर दिया जाता था, जिसके बल पर कंबोडिया, थाईलैंड, स्पेन और इंडोनेशिया जैसे देशों की यात्राएं की गईं.
15000 से 30000 रुपये में डॉक्यूमेंट का पूरा पैकेज
मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में सामने आया है कि इस फर्जीवाड़े का एक निश्चित 'रेट कार्ड' तय था. प्रति व्यक्ति 15000 से 30000 रुपये का शुल्क लिया जाता था और इसमें सभी डॉक्यूमेंट बन जाते थे. इस रकम में से सरपंच का फर्जी पत्र और जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले स्थानीय कंप्यूटर ऑपरेटरों को हिस्सा जाता था. आधार और पैन केंद्र के दलालों की फीस चुकाई जाती थी. पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट को हरी झंडी दिलवाने के लिए निचले स्तर के अमले को रिश्वत दी जाती थी.
कहां-कहां बने फर्जी पासपोर्ट?
मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ने 70 से अधिक संदिग्ध पासपोर्ट को अब तक चिह्नित किया है, जिनके कनेक्शन डबरा, भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा और पार्डुणा तक हैं. भोपाल के अन्ना नगर के बौद्ध मठ के पते पर सबसे ज्यादा लगभग 40 फर्जी पासपोर्ट बनाए गए. इसके बाद ग्वालियर के डबरा के बुद्ध विहार के पते का इस्तेमाल कर 17 से 20 फर्जी पासपोर्ट बनाए गए. बैतूल से 11 संदिग्ध पासपोर्ट छिंदवाड़ा-पांढुर्णा से 1-1 संदिग्ध पासपोर्ट की पुष्टि हुई है.
सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और लुकआउट सर्कुलर की तैयारी
फर्जी पासपोर्ट मामले में बांग्लादेशी कनेक्शन के अहम सबूत मिलने के बाद मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की कई टीमें असम, दिल्ली और महाराष्ट्र में छापेमारी कर रही हैं. गिरोह के मुख्य सरगना रियाल चौधरी, जाय चौधरी, प्रियान राय और विप्लव अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद अब अन्य फरार आरोपियों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की तैयारी है, ताकि कोई भी संदिग्ध फर्जी दस्तावेजों के सहारे विदेश न भाग सके.
फर्जी पासपोर्ट मामले को लेकर उठ रहे तीन बड़े सवाल
1. 2023 के अलर्ट पर सुस्ती क्यों: विदेश मंत्रालय ने साल 2023 में ही पुलिस मुख्यालय (PHQ) को मध्य प्रदेश में फर्जी पतों पर पासपोर्ट बनने के संबंध में सतर्क किया था, लेकिन समय रहते सख्त ऑडिट नहीं हुआ. अब सवाल उठ रहा है कि अलर्ट का बावजूद सुस्ती क्यों दिखाई गई?
2. पुलिस वेरिफिकेशन का सच: नियम के अनुसार, पुलिसकर्मी को आवेदक के घर जाकर एड्रेस वेरिफिकेशन कर पड़ोसियों के बयान दर्ज करने होते हैं. एक ही मठ के पते पर दर्जनों लोगों के पासपोर्ट बनने के बावजूद बीट कांस्टेबल से लेकर थाना प्रभारी तक किसी ने फिजिकल वेरिफिकेशनक्यों नहीं किया?
3. C-Form का अनुपालन न होना: विदेशी या बाहरी नागरिकों के ठहरने पर सराय अधिनियम और फॉरेनर्स एक्ट के तहत 'C-Form' भरना अनिवार्य होता है, जिसका मठों और आश्रमों में पूरी तरह उल्लंघन किया गया. होटल, होमस्टे, गेस्ट हाउस, रिसॉर्ट, हॉस्टल, बौद्ध मठ, आश्रम, या कोई भी व्यक्ति जो अपने निजी घर में किसी विदेशी नागरिक को ठहरा रहा है. विदेशी नागरिक के ठहरने के 24 घंटे के भीतर C-Form को ऑनलाइन पोर्टल (indianfrro.gov.in) पर सबमिट करना होता है. पाकिस्तान, चीन या संवेदनशील देशों के नागरिकों के मामले में यह सूचना तुरंत देनी होती है. C-Form न भरना या गलत जानकारी देना भारतीय कानून के तहत एक गैर-जमानती अपराध है.