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गोटमार मेलाः 700 पुलिस जवान, 44 डॉक्टर, 26 एंबुलेंस के बीच पत्थरबाजी, 652 घायल, जानें 300 साल पुरानी परंपरा की कहानी

Pandhurna Gotmar Mela: मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में आज भी 300 साल पुरानी गोटमार मेले की परंपरा निभाई जाती है. इस परंपरा में लगभग 652 लोग घायल हो चुके हैं, जिनमें कईयों का इलाज चल रहा है. जबकि 4 लोगों को नागपुर रेफर किया गया है.

Written By Manish Kushawah
Published: Sep 11, 2026, 05:34 PM IST | Updated: Sep 11, 2026, 05:43 PM IST
Image Credit: AI Generated Photo
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Gotmar Mela 2026: पांढुर्णा में 300 साल पुरानी परंपरा के साथ गोटमार मेला बड़े ही धूमधाम से मनाया गया. इस दौरान जाम नदी के पुल के पास सावरा गांव और पांढुर्णा गांव के सैंकड़ों की संख्या में लोग आमने-सामने देखने को मिले. जहां पर दोनों गांवों के लोगों की तरफ से एक-दूसरे पर जमकर पत्थर बरसाए गए. यह परंपरा करीब 300 सालों से चली आ रही है. इस मौके पर लोग आसपास की छतों पर खड़े होकर मेला देखते हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि गोटमार मेला एक प्रेम कहानी से जुड़ा है. सावरा गांव की लड़की, पांढुर्णा के लड़के के प्रेम और उनकी मौत के बाद यह पुरानी परंपरा की शुरुआत हुई है. जिसे आज भी अच्छी तरह से निभाया जा रहा है.

बताया जाता है कि दोनों गांवों के युवक-युवती एक-दूसरे से प्रेम करते थे. शादी के लिए साथ जा रहे थे. इसी दौरान दोनों गांवों के लोगों को इसकी भनक लग गई. इसके बाद दोनों ओर से उन पर पत्थर बरसाए गए, जिससे दोनों की मौत हो गई. इसी घटना की याद में गोटमार मेला आयोजित किया जाता है. बता दें कि जाम नदी के उसी पुल पर चंडिका माता की पूजा होती है और झंडा लगाया जाता है. इसके बाद वहां पलास के फूल का झंडा लगाया जाता है. झंडा टूटने तक सावरा-पांढुर्णा के बीच पत्थर बरसाने की यह परंपरा चलती रहती है.

44 डॉक्टरों की टीम भी रही तैनात
हर साल की तरह इस बार भी गोटमार मेले के दौरान दोनों गांवों के लोगों के बीच जमकर पत्थरबाजी देखने को मिली. मेले के दौरान अब तक 652 लोग घायल हुए हैं. इनमें से चार लोगों को इलाज के लिए नागपुर रेफर किया गया है. घायलों के इलाज के लिए मौके पर स्वास्थ्य विभाग की टीमों की तैनाती की गई. 44 डॉक्टरों की टीम ने घायलों का इलाज किया, जबकि करीब 200 स्वास्थ्यकर्मियों को भी मौके पर तैनात किया गया. इसके अलावा 22 से 26 एंबुलेंस को भी सेवा में लगाया गया.

प्रशासन ने किए सुरक्षा के इंतजाम
वहीं गोटमार मेले को लेकर प्रशासन की तरफ से भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. पूरे इलाके में करीब 700 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी. पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार मौके पर मौजूद रहीं. मेले के दौरान होने वाली गतिविधियों पर नजर बनाए रखी. कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्तर से भी पूरे मेले की निगरानी की गई.

ड्रोन-सीसीटीवी कैमरों से निगरानी
सबसे खास बात यह रही है कि मेले की निगरानी के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का भी इस्तेमाल किया गया. पूरे इलाके पर नजर रखने के लिए तीन ड्रोन उड़ाए गए, जबकि 10 सीसीटीवी कैमरों की मदद से मेले की गतिविधियों पर निगरानी रखी गई. जाम नदी के पुल और उसके आसपास बड़ी संख्या में लोग छतों और सुरक्षित जगहों पर खड़े होकर मेले का नजारा देखते हुए नजर आए.

ऐसे मनाया जाता है गोटमार मेला
चंडिका माता की पूजा के बाद जाम नदी के पुल पर झंडा लगाया गया. इसके बाद सावरा और पांढुर्णा गांव के लोगों के बीच पत्थर बरसाने का सिलसिला शुरू हुआ. पलास के फूल वाला झंडा टूटने तक दोनों गांवों के बीच यह परंपरा चलती रही. करीब 300 साल पुरानी इस परंपरा के साथ इस बार भी गोटमार मेला मनाया गया. वहीं, मेले के दौरान घायल हुए लोगों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें और सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल लगातार मौके पर मौजूद रहा.

(रिपोर्टः अंकित वाइकर, पांढुर्णा, ZEE Media)

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मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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