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क्या बंद हो जाएगी लाड़ली बहना योजना? MP हाईकोर्ट पहुंची महिला, कहा- ₹1500 की जगह रोजगार दें

Ladli Behna yojana: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच में लाड़ली बहना योजना को बंद कराने की मांग करते हुए एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है. कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है.

Written By Ranjana Kahar
Published: Sep 19, 2026, 10:17 AM IST | Updated: Sep 19, 2026, 10:20 AM IST
Image Credit: लाड़ली बहना योजना बंद कराने की मांग
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मध्य प्रदेश की चर्चित 'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' कानूनी विवाद में फंस गई है. इस योजना को लेकर ग्वालियर हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है. याचिका में योजना को बंद करने और 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को अभी दी जा रही ₹1,500 की मासिक आर्थिक मदद पर रोक लगाने की मांग की गई है. ग्वालियर की पूर्व कांग्रेस पार्षद सुधा दुबे ने वकील अनिल कुमार मिश्रा के जरिए यह याचिका दायर की है. इस मामले में मुख्य सचिव और महिला एवं बाल विकास विभाग और वित्त विभाग के प्रधान सचिवों को पक्षकार बनाया गया है.

MP हाईकोर्ट पहुंची कांग्रेस की पूर्व पार्षद
ये याचिका ग्वालियर में थाटीपुर के नेहरू कॉलोनी में रहने वाली  वार्ड-22 की कांग्रेस की पूर्व पार्षद सुधा दुबे ने लगाई है. याचिका में उन्होंने कहा है कि लाड़ली बहना योजना असंवैधानिक है. महिलाओं को हर महीने सीधे पैसे देने के बजाय सरकार को आत्मनिर्भर बनाएं. साथ ही उन्होंने योजना के खर्च पर भी सवाल उठाया है. याचिका के मुताबिक इस योजना पर हर महीने करीब 1878 करोड़ रुपये और साल भर में 22,500 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहा है. साल 2026-27 के बजट में भी इसके लिए 23,882 करोड़ रुपये रखे गए हैं.

4 हफ्ते में मांगा जवाब
याचिकाकर्ता का कहना है कि महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये देने से अच्छा है कि सरकार उन्हें रोजगार दे और उनके बच्चों को नौकरी का मौका दे, जिससे वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें. उन्होंने कहा कि वे महिलाओं की मदद के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बिना कोई हुनर सिखाए या काम-धंधा शुरू कराए सीधे पैसे देना कोई पक्का हल नहीं है. इसी वजह से उन्होंने इस योजना को असंवैधानिक बताया है और कोर्ट से मांग की है कि इसे तुरंत बंद किया जाए और महिलाओं को पैसा देने पर फिलहाल रोक लगाई जाए. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस भेजा है और 4 हफ्ते में जवाब मांगा है. इसके बाद कोर्ट इस योजना पर अंतरिम रोक की मांग और याचिका में उठाए गए अन्य मुद्दों पर दलीलों को सुनेगा.

योजना पर सालाना ₹22,500 करोड़ से अधिक खर्च
याचिका में कहा गया है कि अभी 1 करोड़ 25 लाख से ज्यादा महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जा रहे हैं. इस वजह से सरकार पर हर महीने करीब 1878 करोड़ रुपये और एक साल में 22,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आ रहा है. 2026-27 के बजट में भी इस योजना के लिए 23,882 करोड़ रुपये रखे गए हैं. याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया है कि सरकार कर्ज लेकर ये योजना चला रही है, लेकिन इससे महिलाओं को रोजगार मिलने या आत्मनिर्भर बनने में आखिर कितना फायदा हुआ है.
 

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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