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27 बर्खास्त, 26 निलंबित...53 पटवारियों पर कार्रवाई: हजारों को नोटिस फिर भी काम पर नहीं लौटे रहे पटवारी, स्वामित्व योजना में रजिस्ट्री अटकी

स्वामित्व योजना के विरोध में हड़ताल पर गए 53 पटवारियों के खिलाफ सरकार ने कार्रवाई की है. कई जिलों में पटवारियों के खिलाफ नोटिस-चार्जशीट भी जारी की गई है, जिसके बाद पटवारियों ने काम बंद कर दिया है.

27 बर्खास्त, 26 निलंबित...53 पटवारियों पर कार्रवाई: हजारों को नोटिस फिर भी काम पर नहीं लौटे रहे पटवारी, स्वामित्व योजना में रजिस्ट्री अटकी

मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना को लागू करने के विरोध में हड़ताल पर गए पटवारियों के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. प्रदेश में अब तक  53 पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है. इनमें 27 पटवारियों को बर्खास्त किया गया है, जबकि 26 को निलंबित कर दिया गया है. इसके अलावा कई जिलों में पटवारियों को नोटिस और आरोप पत्र जारी किए गए हैं. जिला कलेक्टरों की ओर से भी लगातार कार्रवाई की जा रही है.

सबसे बड़ी कार्रवाई रीवा में हुई, जहां गुरुवार को एक साथ 15 पटवारियों को निलंबित कर दिया गया. इसके बाद ग्वालियर में 19, जबलपुर में 17 और सागर में 13 पटवारियों को सस्पेंड किया गया. इस कार्रवाई के विरोध में प्रभावित जिलों के पटवारियों ने राजस्व से जुड़े काम रोक दिए हैं. देवास में पटवारियों ने बुधवार देर रात तक कलेक्टर ऑफिस के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. वहीं नर्मदापुरम में 133, सागर में 137, छिंदवाड़ा में 32, गुना में 52 और भोपाल में 3 पटवारियों को नोटिस जारी किए गए हैं. रतलाम में सरकारी काम में लापरवाही के लिए 12 पटवारियों को चार्जशीट दी गई है.

गुरुवार को प्रमुख राजस्व आयुक्त कार्यालय में पटवारी संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई, हालांकि बैठक में कोई ठोस निर्णय नहीं निकल पाया. वहीं वल्लभ भवन में पटवारी प्रतिनिधिमंडल और डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ला के बीच होने वाली बैठक भी टाल दी गई. डिप्टी CM के व्यस्त शेड्यूल के कारण यह बैठक नहीं हो सकी. पटवारी संघ का कहना है कि जब तक उन्हें निष्पादक की भूमिका से नहीं हटाया जाता, तब तक उनका मुख्य विरोध जारी रहेगा. संघ ने कार्रवाई को वापस लेने की भी मांग की है.

क्यों विरोध कर रहे पटवारी?
पटवारियों को स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति के दस्तावेजों पर निष्पादक के रूप में हस्ताक्षर करने की जिम्मेदारी दी जा रही है. पटवारी संघ सवाल उठा रहा है कि जब संपत्ति पर उनका मालिकाना हक नहीं है, तो उन्हें यह कानूनी जिम्मेदारी क्यों दी जा रही है. पटवारियों को आशंका है कि भविष्य में संपत्ति को लेकर विवाद हुआ या दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी मिली, तो उन्हें कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. वे इस भूमिका के लिए स्पष्ट कानूनी आधार पर संरक्षण चाहते हैं.

क्या है स्वामित्व योजना?
मध्य प्रदेश सरकार ग्रामीण इलाकों में लगभग 50 लाख संपत्तियों के मुफ्त रजिस्ट्रेशन की सुविधा देने की तैयारी कर रही है. इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में बसी हुई जमीन पर कब्जा रखने वाले लोगों को मालिकाना हक देने के लिए अधिकारों का रिकॉर्ड तैयार किया गया है. अब इन कब्जेदारों को आधिकारिक रजिस्ट्रेशन के जरिए मु्फ्त मालिकाना हक देने की प्रक्रिया चल रही है.

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About the Author

Pooja

Pooja

पूजा सिंह एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 5 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय (हाइपरलोकल) मुद्दों की सटीक व रियल-टाइम डिजिटल कवरेज पर उनकी मजबूत पकड़ है.माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद पूजा ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने Inshorts और नवभारत जैसे प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम करते हुए डिजिटल जर्नलिज्म, कंटेंट क्यूरेशन और न्यूज़ डेस्क ऑपरेशंस का अनुभव हासिल किया. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देती हैं, ताकि पाठकों तक हर जरूरी अपडेट तेजी से पहुंचे.पूजा सिंह से आप Pooja1.Singh@India.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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