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MP में हर 5वीं लड़की का बाल विवाह: आगर-मालवा में 49% और राजगढ़ में 46% का बचपन छीना; देवउठनी ग्यारस पर मेगा एक्शन के बावजूद कहां चूक रहा सिस्टम?

मध्य प्रदेश में देवउठनी ग्यारस पर बाल विवाह रोकने के लिए सरकार की तरफ से एक खास अभियान चलाया जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में 20 से 24 वर्ष की करीब 20 प्रतिशत महिलाओं का विवाह 18 साल से पहले हुआ. आगर-मालवा और राजगढ़ में इसकी स्थिति चिंताजनक है.

Written By Manish Kushawah
Published: Nov 05, 2026, 10:20 PM IST | Updated: Nov 05, 2026, 10:26 PM IST
Image Credit: ZEE CREATIVE
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मध्य प्रदेश में 20 नवंबर को देवउठनी ग्यारस के मौके पर बाल विवाह रोकने को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग विशेष अभियान चलाएगा. इस दौरान सामूहिक विवाह आयोजनों पर खास नजर रहेगी. इसको लेकर सभी जिलों को अलर्ट  किया गया है. जिला और ब्लॉक स्तर पर 24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय रहेंगे. ग्राम और वार्ड स्तर पर सूचना दल बनाए जाएंगे. उड़न दस्ते विवाह स्थलों का निरीक्षण करेंगे. संवेदनशील परिवारों की पहचान कर बाल विवाह के कानूनी प्रावधानों की जानकारी और समझाइश दी जाएगी. पंचायतों और नगरीय निकायों में जनप्रतिनिधि बाल विवाह रोकने की शपथ लेंगे. स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा. बाल विवाह की सूचना हेल्पलाइन 181, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और आपातकालीन सेवा 112 पर दी जा सकेगी. बाल विवाह पाए जाने पर बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई होगी.

देवउठनी ग्यारस पर बाल विवाह रोकने के लिए सरकार एक्शन में नजर आ रही है, लेकिन कड़े कानूनों और सरकारी तंत्र की मुस्तैदी के बावजूद बाल विवाह क्यों नहीं रुक रहा? हाल ही में केंद्रीय बाल विवाह और परिवार कल्याण विभाग की एक रिपोर्ट (2023-24) आई थी, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए थे. रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में 20 से 24 साल की लगभग 20% महिलाओं यानी हर 5वीं लड़की की शादी 18 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले ही कर दी गई थी. बाल विवाह में सबसे आगे मध्य प्रदेश का आगर-मालवा जिला है, जहां दर 49.4% है. दूसरे नंबर पर राजगढ़ (46%) जैसे जिले हैं, जहां स्थिति सबसे चिंताजनक है.

क्यों थमने का नाम नहीं ले रही ये कुप्रथा?

लड़कियों के हाथ में जिस उम्र में किताबें होनी चाहिए थी और पढ़ाई के जरिए भविष्य संवारने का मौका मिलना चाहिए था, उस उम्र में मध्य प्रदेश की मासूम बच्चियों को विवाह के बंधन में बांध दिया जाता है. केंद्रीय बाल विवाह एवं परिवार कल्याण विभाग की रिपोर्ट (2023-24) के अनुसार शहरी क्षेत्रों में बाल विवाह की दर 9 प्रतिशत है, लेकिन इसकी तुलना में ग्रामीण इलाकों में यह दर 23.4 प्रतिशत है.

साफ है कि गांवों पसरी गरीबी, साक्षरता की कमी, सामाजिक दबाव और जागरूकता की कमी से आज भी यह कुप्रथा थमने का नाम नहीं ले रही है. 'बेटी की शादी मतलब माता-पिता के ऊपर बोझ' ग्रामीण इलाकों में इस सामाजिक दबाव और रूढ़िवादी सोच भी इस कुप्रथा के मुख्य कारण हैं. बेटियां आज भी आर्थिक बोझ के रूप में देखी जाती हैं, जिससे जल्द से जल्द छुटकारा पाने के लिए सामाजिक परंपराओं का सहारा लिया जाता है.

आगर-मालवा और राजगढ़ की स्थिति सबसे गंभीर

मध्य प्रदेश के जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो आगर-मालवा की स्थिति सबसे ज्यादा डरावनी है और इस जिले में बाल विवाह की दर 49.4 प्रतिशत है. यह आंकड़ा डराने वाला है, क्योंकि जिले में लगभग आधी लड़कियों का बचपन 18 साल से पहले ही शादी के मंडप में छीन लिया जाता है.

कभी बाल विवाह के मामले में सबसे ऊपर पर रहने वाले राजगढ़ जिले में स्थिति में सुधार तो हुआ है, लेकिन आंकड़ा अब भी चिंताजनक है. राजगढ़ में बाल विवाह की दर अब भी 46 है. इसके अलावा छतरपुर (16.7%), बैतूल (16.2%), श्योपुर (14.2%), रीवा (13%) और दतिया (11%) में भी बाल विवाह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. इंदौर राज्य के सबसे विकसित जिलों में है, लेकिन इसके बावजूद यहां बाल विवाह की दर 11 प्रतिशत है.

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मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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