40 गांवों की सेहत राम भरोसे: अस्पताल में एक भी डॉक्टर नहीं, दो नर्स-वार्डबॉय करते हैं मरीजों का इलाज
Narsinghpur News: नरसिंहपुर के आमगांव में मौजूद सरकारी अस्पताल से स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की निराशाजनक तस्वीर सामने आई है. करीब 40 गांवों की स्वास्थ्य सेवाओं का जिम्मा संभालने वाले अस्पताल में डॉक्टर और जरूरी स्टाफ की कमी बताई जा रही है.
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के आमगांव बड़ा सरकारी अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है. बताया जा रहा है कि यह अस्पताल जो लगभग 40 गांवों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए जिम्मेदार है, डॉक्टरों और जरूरी स्टाफ की कमी से जूझ रहा है. हालांकि OPD का समय सुबह 9:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक तय है, लेकिन वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला. अस्पताल में पसरा सन्नाटा और खाली कुर्सियां इसके कामकाज के तौर-तरीकों पर सवाल खड़े करती हैं.
दो नर्स-वार्डबॉय करते हैं मरीजों का इलाज
ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल में स्थायी MBBS डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन और ड्रेसर तक उपलब्ध नहीं हैं. दो नर्स और एक वार्डबॉय के भरोसे व्यवस्थाएं चल रही हैं. प्रभारी डॉक्टर के सप्ताह में कुछ दिन आने की बात भी ग्रामीणों ने कही. एंबुलेंस की सुविधा नहीं होने से गंभीर मरीजों को परेशानी होती है, जबकि गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर करेली या 20 किलोमीटर दूर नरसिंहपुर जाना पड़ता है.
4 साल से उठ रही डॉक्टर की मांग
जिला पंचायत सदस्य का कहना है कि पिछले चार सालों से डॉक्टर और स्टाफ की मांग की जा रही है, लेकिन यह समस्या अभी भी हल नहीं हुई है. कBMO ने डॉक्टर और स्टाफ की कमी स्वीकार करते हुए बताया कि, आमगांव में दो डॉक्टर डॉक्टर हैं, लेकिन अतिरिक्त जिम्मेदारियों के कारण उन्हें कई जगहों पर सेवा देनी पड़ती है. स्टाफ के लिए पहले ही अनुरोध किया जा चुका है. अब ग्रामीण स्थायी डॉक्टरों और जरूरी स्टाफ की तुरंत तैनाती की मांग कर रहे हैं.
पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले
ये कोई पहला मामला नहीं है, मध्यप्रदेश में इससे पहले भी कई अस्पतालों से ऐसे ही मामले सामने आ चुके हैं. कुछ दिन पहले सिंगरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की गैर-मौजूदगी में एक सफाई कर्मचारी मरीजों को इंजेक्शन लगाते हुए कैमरे में कैद हुआ था. इस वायरल वीडियो से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था. छिंदवाड़ा जिले के तामिया अस्पताल में सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक को डॉक्टर या नर्स को खोजने में आधा घंटा लग गया था. कोई मेडिकल स्टाफ न मिलने पर, अस्पताल के सिक्योरिटी गार्ड सतीश भारती को मजबूरन खुद ही घायल व्यक्ति के घावों पर पट्टी करनी पड़ी थी. वहीं, मुरैना के परीक्षितपुरा प्राइमरी हेल्थ सेंटर में अपनी बीमार बेटी के साथ आए एक ग्रामीण ने एक वीडियो बनाया जिसमें पूरा अस्पताल खाली दिख रहा था. डॉक्टर, नर्स और स्टाफ सभी गायब थे जबकि दो बीमार बच्चे अपनी दादी के साथ तकलीफ में पड़े थे.
छुट्टी लेकर गायब हो गए
इसके अलावा, राज्य में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए ग्रामीण अस्पतालों में 2,053 बॉन्डेड डॉक्टरों को तैनात किया गया था. लेकिन छिंदवाड़ा जिले में 40 डॉक्टर अपनी नियुक्ति के बाद छुट्टी लेकर गायब हो गए. आज भी पाथरी, कुंडा, रामपुर जैसे कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चल रहे हैं.