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छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में कोहराम! 3 दिन में 2 नवजातों समेत 4 की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में तीन दिनों के भीतर चार लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. परिजनों ने इलाज में देरी और स्टाफ की ओर से सहयोग न मिलने का आरोप लगाया है.

Written By Ranjana Kahar
Published: Oct 25, 2026, 12:10 PM IST | Updated: Oct 25, 2026, 12:14 PM IST
Image Credit: छिंदवाड़ा में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
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मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई हैं. गायनेकोलॉजी वार्ड में दो नवजातों की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अस्पताल में पिछले तीन दिनों के भीतर तीन नवजातों और एक प्रसूता की मौत ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. फिलहाल जांच रिपोर्टों का इंतजार है. जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.

दूध अटकने से नवजात की मौत का दावा

पहला मामला सिवनी की रहने वाली मंगालिया डेहरिया का है. उनके परिवार का आरोप है कि प्रसव के दौरान उन्हें समय पर सही इलाज नहीं मिला, जिसकी वजह से उनकी नवजात बेटी की मौत हो गई. महिला की ननद मोनिका डेहरिया ने भी इलाज में देरी और अस्पताल के कर्मचारियों के बर्ताव को लेकर सवाल उठाए हैं. वहीं दूसरा मामला कुकड़ा जगत की रहने वाली अनीता यादव का है, जो चार दिनों से अस्पताल में भर्ती थीं. प्रसव के बाद शनिवार को उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई. परिवार को बताया गया कि बच्चे का दूध गले में अटक गया था.

यह भी पढ़ें: बैतूल स्वास्थ्य विभाग में एक्शनः 85 कर्मचारियों का अटैचमेंट खत्म, जहां नौकरी लगी है वहां ड्यूटी करने के निर्देश
 

तीन दिन पहले भी हुई थी प्रसूता की मौत

गौरतलब है कि ठीक तीन दिन पहले भी प्रसूता की मौत का मामला सामने आया था. लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि, परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और इन मौतों के वास्तविक कारणों की पुष्टि अभी बाकी है. इसके लिए जांच और मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा की जानी है.

गायनिक विभागाध्यक्ष डॉ.शिरपुरकर ने क्या कहा?

जिला अस्पताल में नवजात बच्ची की मौत के मामले में गायनिक विभागाध्यक्ष डॉ. शिरपुरकर ने बताया कि महिला की डिलीवरी की संभावित तारीख 15 नवंबर थी. लेकिन दर्द की वजह से वह रात 12:00 से 12:30 बजे के बीच अस्पताल पहुंची. शुरुआती जांच के बाद सुबह ऑपरेशन करने का फैसला लिया गया, क्योंकि महिला ने रात में खाना खा लिया था और उसे प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) भी बहुत तेज नहीं हो रही थी. डॉक्टर के अनुसार, सुबह करीब 6:00 बजे अचानक प्रसव प्रक्रिया तेज हो गई और बच्ची का जन्म मृत अवस्था में हुआ. डॉक्टर ने इसे प्रेसिपिटेट डिलीवरी बताया है. फिलहाल आगे की जांच रिपोर्ट का इंतजार है. वहीं परिवार वालों ने इलाज में देरी का आरोप लगाया है. पूरी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.

अंकित वैकर की रिपोर्ट
 

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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