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मध्य प्रदेश बीजेपी की नई कोर ग्रुप बैठक से पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को बाहर रखे जाने ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब, सह-प्रभारी रेखा वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री चंद्रशेखर की मौजूदगी में हुई इस अहम बैठक में नरोत्तम मिश्रा शामिल नहीं हुए. कोर ग्रुप की आधिकारिक सूची में 11वें नंबर पर नाम होने के बावजूद उन्हें बैठक की सूचना न देना कई बड़े संकेत दे रहा है. दरअसल, 2023 में दतिया सीट से विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही सरकार और संगठन में नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव के कम होने की चर्चाएं थीं. अब इस घटनाक्रम के बाद अटकलें तेज हैं कि क्या हाईकमान उन्हें मध्य प्रदेश की स्थानीय राजनीति से निकालकर केंद्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी या किसी दूसरे राज्य का प्रभार देने की तैयारी में है?
कोर ग्रुप की बैठक में नहीं पहुंचे नरोत्तम मिश्रा
बुधवार को भोपाल में प्रदेश कार्यालय में कोर ग्रुप की बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत कोर ग्रुप के सभी प्रमुख सदस्य मौजूद रहे. लेकिन, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा बैठक में शामिल नहीं हुए. कोर ग्रुप की आधिकारिक सूची में 11वें नंबर पर उनका नाम होने के बावजूद उन्हें बैठक की सूचना नहीं दी गई. इसी तरह केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी बैठक में नहीं पहुंचे.
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का बयान
इस बीच, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने यह कहकर मामले को और गरमा दिया कि कोर ग्रुप में जितने सदस्य हैं, उनमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को छोड़कर सभी बैठक में शामिल हुए. इस बयान ने संकेत दिया है कि नरोत्तम मिश्रा को शामिल न करना कोई तकनीकी चूक नहीं, बल्कि पार्टी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है.
दतिया में हार के बाद घटा सियासी कद!
कोर ग्रुप की सूची में 11वें नंबर पर नाम होने के बावजूद नरोत्तम मिश्रा बैठक में नहीं पहुंचे. उन्होंने मीडिया से कहा कि उन्हें बैठक की कोई जानकारी नहीं दी गई थी. गौरतलब है कि दतिया विधानसभा चुनाव में हार के बाद से नरोत्तम मिश्रा का कद लगातार घटता दिख रहा है. प्रदेश स्तर के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी कम हो गई है, हालांकि अपने गढ़ दतिया में वह सक्रिय बने हुए हैं और लगातार जनसंपर्क कर ताकत दिखा रहे हैं. पार्टी ने हाल ही में जिलाध्यक्षों की नई नियुक्ति कर संकेत दिया है कि संगठन में अब किसी एक नेता का वर्चस्व नहीं चलेगा.