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मध्य प्रदेश में मोहन यादव कैबिनेट में बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है और जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है. इसके साथ ही प्रभारी मंत्रियों के जिलों में फेरबदल हो सकता है. संभावना जताई जा रही है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है. बताया जा रहा है कि सत्ता और संगठन के मापदंड पर खरे नहीं उतरने वाले मंत्रियों पर गाज गिर सकती है और मंत्रियों के प्रभार के जिले बदले जा सकते हैं.
कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री निवास में कोर कमेटी की बैठक हुई थी, जिसमें प्रदेश के प्रभारी विप्लव कुमार देव, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद थे. यह बैठक सत्ता और संगठन के बीच समन्वय बिठाने को लेकर बुलाई गई थी, लेकिन इस बैठक के अंदर की बात निकल कर सामने आई है कि आने वाले समय में प्रभारी मंत्रियों के जिलों में बदलाव किया जा सकता है.
बीजेपी कोर कमेटी की बैठक के बाद सीएम मोहन यादव, प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री चंद्रशेखर तिवारी ने अलग से बैठक की. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कई बार बैठकें कर चुके हैं और कई दिल्ली दौरा भी कर चुके हैं. सीएम मोहन यादव केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर चुके हैं अब यह माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश में जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार देखने को मिल सकता है. इसमें सबसे जरूरी बात यह है कि कई सारे प्रभारी मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों को बदला जा सकता है.
कोर कमेटी की बैठक में सरकार और संगठन के बीच तालमेल बनाकर सहकारिता के एजेंडे को मजबूत करने पर रणनीतिक चर्चा की गई. साथ ही सहकारिता के जरिए पार्टी की विचारधारा को जमीन (आम लोगों) तक पहुंचाने पर जोर दिया गया. बैठक में आने वाले संगठनात्मक कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई. इसके अलावा सहकारिता के क्षेत्र में सरकार की जनहितैषी योजनाओं को समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए रोडमैप तैयार करने पर बातचीत हुई.
इस बैठक में राज्य सरकार के मंत्री विश्वास सारंग, लखन पटेल, सांसद शिवमंगल सिंह तोमर, अपेक्स बैंक के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव, पूर्व सांसद कैलाश सोनी, विधायक रमाकांत भार्गव, नेशनल लेबर कोऑपरेटिव फेडरेशन के संचालक विवेक चतुर्वेदी और सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक किशन सिंह भटोल मौजूद रहे.