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भोपाल नेशनल हेराल्ड जमीन मामला: BDA की याचिका कोर्ट ने खारिज की, जानिए पूरा मामला

भोपाल में नेशनल हेराल्ड की जमीन से जुड़े मामले में जिला अदालत ने भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा दायर बेदखली की अर्जी को खारिज कर दिया है. BDA ने आरोप लगाया था कि जमीन का गलत इस्तेमाल किया जा रहा था.

Written By Ranjana Kahar
Published: Oct 25, 2026, 09:51 AM IST | Updated: Oct 25, 2026, 09:54 AM IST
Image Credit: भोपाल नेशनल हेराल्ड जमीन मामला
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भोपाल में नेशनल हेराल्ड की जमीन से जुड़े चर्चित मामले में भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) को जिला अदालत में बड़ा झटका लगा है. बेदखली के मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने BDA की याचिका खारिज कर दी है. BDA ने जमीन के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए आवंटन निरस्त कर बेदखली के लिए सिविल केस दायर किया था. लेकिन अदालत ने इस मांग को ठुकरा दिया है.

1.14 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी

जानकारी के मुताबिक, 1981 में नेशनल हेराल्ड को एमपी नगर प्रेस कॉम्प्लेक्स में 1.14 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी. बाद में 2001 में यह जमीन बेच दी गई और अब इस प्लॉट पर एक बड़ी कमर्शियल इमारत बनी हुई है. समय के साथ इस जमीन के इस्तेमाल और ट्रांसफर को लेकर सवाल उठे, जिसके चलते भोपाल विकास प्राधिकरण ने आरोप लगाया कि इस जमीन का गलत इस्तेमाल किया गया है.

2014 में BDA ने जारी किया था नोटिस

BDA ने जमीन का आवंटन पूरी तरह निरस्त करते हुए जमीन खाली कराने और बेदखल करने वालों को हटाने के लिए कानूनी कार्रवाई की मांग की थी. इस संबंध में 2014 में BDA की ओर से एक नोटिस भी जारी किया गया था. इस कार्रवाई के बाद जिन लोगों ने इमारत के कुछ हिस्से खरीदे थे, उन्होंने अपने-अपने दावे पेश किए थे. कुछ खरीदारों ने तो हाई कोर्ट से स्टे ऑर्डर भी ले लिया, जिसकी वजह से यह मामला आगे बढ़ गया. अब मामले की सुनवाई के बाद जिला अदालत ने BDA की अर्जी और जमीन खाली कराने की प्रस्तावित कार्रवाई को खारिज कर दिया है. इस फैसले से नेशनल हेराल्ड और संबंधित पक्षों को बड़ी राहत मिली है.

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जानिए पूरा मामला

भोपाल के एमपी नगर इलाके में साल 1981 में नेशनल हेराल्ड अखबार को अपना प्रेस और कार्यालय स्थापित करने के लिए 1.14 एकड़ सरकारी जमीन आवंटित की गई थी. 2001 में अखबार का कामकाज बंद होने के बाद उस जमीन पर एक बड़ी इमारत बनाई गई और इसके कुछ हिस्से अन्य पक्षों को बेच दिए गए.  भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) का कहना था कि यह जमीन विशेष रूप से अखबार के लिए दी गई थी, न कि कमर्शियल या ऑफिस स्पेस बेचने के लिए. इसके चलते BDA ने आवंटन रद्द कर दिया और जमीन वापस लेने के लिए बेदखली की प्रक्रिया शुरू कर दी. अब अदालत ने BDA की बेदखली की याचिका को खारिज कर दिया है.

कोर्ट में लंबित है मामला

वहीं भोपाल की एक अदालत में नरेंद्र कुमार मित्तल के खिलाफ एक आपराधिक मामला भी लंबित है, जो नेशनल हेराल्ड की संपत्ति और मशीनरी पर कब्जा करने के आरोपों से जुड़ा है. अदालत ने इस मामले में उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया है.
 

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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