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कार्बाइड गन पर बैन, फिर भी ऑनलाइन बिक रही ‘मंकी रिपेलर गन’, हादसा हुआ तो किसकी होगी जिम्मेदारी?

भोपाल में कार्बाइड गन, तोप और लैंप के इस्तेमाल व बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है. इसके बावजूद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दूसरे नामों से गन उपलब्ध हैं. सुप्रीम कोर्ट के वकील से जानिए हादसे पर विक्रेता, निर्माता और प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी क्या होगी?

Written By Manish Kushawah
Published: Oct 30, 2026, 11:59 PM IST | Updated: Oct 31, 2026, 12:09 AM IST
Image Credit: ZEE NEWS
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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कार्बाइड गन, कार्बाइड तो और कार्बाइड लैंप के इस्तेमाल पर प्रशासन एक्शन मोड में नजर आ रहा है. भोपाल कलेक्टर प्रियांक मिश्रा ने इनके इस्तेमाल के साथ-साथ खरीद-बिक्री, स्टोर करने से लेकर परिवहन पर भी प्रतिबंध लगा दिया है. इसके बावजूद भी अलग-अलग ई-कॉमर्स कंपनियां ऐसी गन दूसरे नामों से बेच रही हैं. कोई इन्हें PVC Monkey repeller Gun और Crop Protection Gun जैसे नामों से लिस्ट किया गया है. सबसे खास बात तो यह है कि इन गनों की भोपाल के कई पिनकोडों पर डिलीवरी भी दिखाई दे रही है.

ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब जिले में इन उपकरणों पर प्रतिबंध है, तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से इनकी बिक्री और डिलीवरी कैसे हो रही है? अगर इनसे कोई हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के वकील संदीप मिश्रा से ZEE NEWS की टीम ने फोन पर बात की तो उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, विक्रेता और निर्माता की कानूनी जिम्मेदारियों को लेकर अपनी राय रखी.

कार्बाइड गन के धमाके से कान और आंखों को खतरा

प्रशासन की तरफ से कार्बाइड गन को लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना है. इनके तेज धमाके से कान का पर्दा फटने का डर रहता है. आंखों की रोशनी जाने, चेहरे और शरीर पर जलन या गंभीर चोट लगने का खतरा भी बना रहता है. बच्चों के लिए इनका इस्तेमाल खासकर खतरनाक साबित हो सकता है. इसके अलावा, तेज धमाकों से लोक शांति भंग होने की आशंका भी जताई गई है.

धारा 163 के तहत जारी हुआ प्रतिबंधात्मक आदेश

भोपाल के कलेक्टर प्रियांक मिश्रा ने BNS 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया है. जिले में कार्बाइड गन, कार्बाइड तोप और कार्बाइड लैंप का उपयोग, खरीद-बिक्री, भंडारण, प्रदर्शन और परिवहन प्रतिबंधित रहेगा. वहीं उन्होंने आदेश में कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल को भी नियंत्रित किया गया है. इसकी बिक्री केवल वैध कृषि और औद्योगिक गतिविधियों के लिए ही की जा सकेगी. साथ ही यह भी बताया कि कैल्शियम कार्बाइड का कारोबार करने वाले दुकानदारों को खरीद और बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा. अगर कोई भी व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ BNS की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

ऑनलाइन दूसरे नामों से बिक रही कार्बाइड गन

प्रशासन के सख्त रुख के बाद भी ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर कार्बाइड गन जैसे उपकरण दूसरे नामों से बेचे जा रहे हैं. इन्हें सीधे कार्बाइड गन कहने के बजाय अलग-अलग नाम ‘PVC Monkey Repeller Gun’ यानी बंदर भगाने वाली गन और ‘Crop Protection Gun’ यानी फसल सुरक्षा गन के नाम से बेचा जा रहा है.

त्योहारी सीजन से ठीक पहले भोपाल के पिनकोड-462001 पर भी इनकी डिलीवरी उपलब्ध दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. इससे स्थानीय स्तर पर जारी प्रतिबंध और ऑनलाइन बिक्री के बीच बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है. हालांकि, किसी उत्पाद की ऑनलाइन लिस्टिंग या डिलीवरी उपलब्ध दिखना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसकी बिक्री और आपूर्ति संबंधित आदेश के तहत वैध है.

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ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी क्या है?

सुप्रीम कोर्ट के वकील संदीप मिश्रा ने ZEE NEWS को बताया ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और उत्पाद बेचने वाले विक्रेता या निर्माता की जिम्मेदारी अलग-अलग होती है. उन्होंने बताया कि भारत में ऑनलाइन कंपनियों की भूमिका को समझने के लिए खाद्य सामग्री और दवाओं की बिक्री का उदाहरण देखा जा सकता है.

उन्होंने आगे बताया कि खाद्य सामग्री बेचने के मामले में प्लेटफॉर्म को यह देखना होता है कि संबंधित विक्रेता के पास FSSAI लाइसेंस है या नहीं. इसी तरह दवाओं की बिक्री में जरूरी ड्रग लाइसेंस की जांच का सवाल आता है. गन या ऐसे उपकरणों की ऑनलाइन बिक्री में भी संबंधित लाइसेंस और सरकारी अनुमति की स्थिति महत्वपूर्ण होती है.

वकील संदीप मिश्रा का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी उसके कानूनी दायित्वों के दायरे में तय होती है. किसी उपभोक्ता से जुड़ा मामला सामने आने पर प्लेटफॉर्म को संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने जैसी जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ सकती हैं. हालांकि, केवल प्लेटफॉर्म की भूमिका देखकर विक्रेता और निर्माता की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती.

विक्रेता और निर्माता पर किसकी कितनी जिम्मेदारी?

वकील संदीप मिश्रा का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ा विक्रेता और उत्पाद बनाने वाला निर्माता, दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है. उत्पाद की बिक्री और उससे जुड़े नियमों के पालन के लिए विक्रेता की जिम्मेदारी बनती है. वहीं, उत्पाद की सुरक्षा और उससे होने वाले नुकसान के मामले में निर्माता अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता.

उन्होंने कहा कि अगर किसी खतरनाक उत्पाद से दुर्घटना होती है या किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचता है, तो निर्माता की जवाबदेही भी तय हो सकती है. निर्माता को सुरक्षित उत्पाद बनाने और उससे जुड़े जोखिमों को रोकने के लिए जरूरी व्यवस्था करनी चाहिए.

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मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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