इंसानों का नहीं, भूतों का मेला... रात भर चलता है तंत्र-मंत्र का खेल, एक दिन के लिए'अमृत' हो जाता है नर्मदा का जल! जानें क्या है रहस्य
Bhooton Ka Mela: हरदा जिले में 'भूतों का मेला' लगता है. सर्वपितृ अमावस्या की रात को इस मौके पर नर्मदा नदी के किनारे करीब 1 लाख श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं. मान्यता है कि इस दिन नर्मदा के पानी में चमत्कारी गुण आ जाते हैं.
आपने कई मेले देखे होंगे, लेकिन क्या आपने कभी भूतों का मेला देखा है? यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन ये सच है. हर साल श्राद्ध पक्ष के दौरान अमावस्या की रात को मध्य प्रदेश के हरदा जिले में नर्मदा नदी के किनारे भूतों का मेला लगता है. यह मेला चतुर्दशी की रात को शुरू होता है और अमावस्या की सुबह तक चलता है. माना जाता है कि इस रात नर्मदा का पानी चमत्कारी हो जाता है. इसमें नहाने से लोगों को बुरी आत्माओं और अलौकिक कष्टों से मुक्ति मिलती है. शुक्रवार रात भी तंत्र-मंत्र से जुड़ी रस्में निभाई गईं, जो सुबह तक चलती रहीं. देर रात का नजारा सचमुच डरावना था.
मेले का नजारा डरावना
सोमवती अमावस्या के मौके पर नर्मदा नदी में पवित्र डुबकी लगाने के लिए इस मेले में लगभग 1,00,000 श्रद्धालु शामिल हुए. यह मेला चतुर्दशी की रात से शुरू होकर अमावस्या की सुबह तक चला. इस दौरान, कथित तौर पर अलौकिक या ऊपरी बाधाओं से परेशान लोगों की भारी भीड़ घाटों पर जमा हुई, जो पारंपरिक इलाज करने वालों और झाड़-फूंक करने वालों से राहत पाने की उम्मीद में आए थे. मेले का नजारा डरावना और चौंकाने वाला था. कई लोग नर्मदा के पानी और कीचड़ में लोटते हुए दिखे, जबकि कुछ लोग आस्था के नाम पर खतरनाक हरकतें कर रहे थे.
प्रशासन की मौजूदगी पर अंधविश्वास का खेल
आत्माओं को समर्पित इस मेले में आस्था के नाम पर जानलेवा करतब दिखाए गए. कोई तलवार से अपने अंगो को काटता रहा तो कोई जंजीरो से भूतों को भगाता रहा. यह सब प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ. मौके पर मौजूद एक अधिकारी ने कहा कि ये गतिविधियां लोगों की आस्था से जुड़ी हैं और अगर कोई शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी.
एक दिन के लिए 'अमृत' हो जाता है नर्मदा का जल!
नजरपुरा गांव के ओझा सम्राट पवार ने बताया कि, श्राद्ध पक्ष की अमावस्या की रात नर्मदा नदी का जल बहुत शुभ और अमृत के समान हो जाता है. इस रात की जाने वाली विशेष पूजा-अर्चना से पितरों और बुरी आत्माओं से मिलने वाली परेशानियों से राहत मिलती है. पुजारी बद्री प्रसाद गौड़ ने बताया कि ये खास रस्में पुरानी परंपराओं के अनुसार की जाती हैं और इनसे भक्तों को लाभ मिलता है. पितृ पक्ष की अमावस्या से ठीक पहले चतुर्दशी की रात को एक खास कार्यक्रम होता है. पितृ पक्ष अमावस्या को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देशों के अनुसार सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए.
जानिए रहस्य और महत्व
यह मेला हर साल नर्मदा नदी के किनारे अमावस्या की रात को लगता है, जो श्राद्ध पक्ष या शारदीय नवरात्रि से ठीक पहले आती है. मान्यता है कि जो लोग बुरी आत्माओं, भूतों या नकारात्मक शक्तियों से परेशान होते हैं, वे यहां मुक्ति पाने के लिए आते हैं. लोगों की आस्था है कि इस रात नर्मदा नदी का पानी चमत्कारी हो जाता है और उसमें डुबकी लगाने से हर तरह की मानसिक या बाहरी परेशानियां दूर हो जाती हैं.
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और इंटरनेट पर उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है. Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है.)