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बालाघाट के दक्षिण बैहर में 30 बच्चों की मौत: कुपोषण, गंदा पानी या टीकाकरण में चूक? अब उठ रहे बड़े सवाल

Balaghat Children Death: बालाघाट जिले के दक्षिण बैहर में करीब 30 बच्चों की मौत से हड़कंप मच गया है. बैगा जनजाति के बच्चों की मौत को लेकर कुपोषण, दूषित पानी और टीकाकरण में कमी जैसे सवाल उठ रहे हैं.

Written By Manish Kushawah
Published: Sep 11, 2026, 06:50 PM IST | Updated: Sep 11, 2026, 06:53 PM IST
Image Credit: ZEE MEDIA
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बालाघाट जिले के आदिवासी अंचल दक्षिण बैहर में अब तक करीब 30 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है. बैगा जनजाति समुदाय के बच्चों की मलेरिया और मीजल्स जैसी बीमारी से अचानक मौत ने पूरे इलाके को हिला दिया है. अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि बच्चों की मौत सिर्फ मलेरिया और मीजल्स की वजह से हुई या फिर इसके पीछे कोई और कारण है. बैहर विधायक संजय उइके ने बच्चों की मौत की सबसे पहली वजह कुपोषण को बताया है. उन्होंने कहा कि बच्चों को सही पोषण आहार नहीं मिल पाया है. मार्च महीने से करीब तीन से चार महीने तक पोषण आहार का वितरण नहीं हुआ था.

बैहर विधायक संजय उइके का कहना है कि आदिवासी अंचलों में बच्चों को मिलने वाला पोषण आहार मार्च माह से नहीं मिला था. अगस्त महीने से ही दोबारा पोषण आहार वितरित किया जा रहा है. विधायक ने बच्चों की मौत के मामले में टीकाकरण को भी अहम वजह बताया. उनका कहना है कि अगर बच्चों को समय पर टीके लग जाते तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक रहती, जिनका शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम होता. दक्षिण बैहर में बैगा जनजाति के बच्चों की मौत के मामले में कुपोषण और टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य विभाग पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

सिविल सर्जन ने गंदे पानी पर उठाए सवाल
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ निलय जैन ने कहा कि दक्षिण बैहर में बच्चों की मौत गंदे पानी, कुपोषण, टीकाकरण हो सकती है. उन्होंने कहा कि जब से बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती होना शुरू हुए हैं, तभी से उनका इलाज कर रहे हैं. उस दौरान उन्हें समझ आया कि गंदा पानी, कुपोषण और टीकाकरण नहीं होना बच्चों की मौत का कारण हो सकता है. उन्होंने कहा कि अगर इन सभी बातों का खास ध्यान दिया जाता तो बच्चे बीमार नहीं पड़ते या फिर इनकी अचानक मौत नहीं होती.

महिला बाल विकास अधिकारी ने साधी चुप्पी
वहीं बच्चों की मौत के कारणों को लेकर जब महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी देवेंद्र कुमार सुंदरियाल का कहना है कि टीएचआर वहां कुछ महीने नहीं मिला था, लेकिन अब मिलना शुरू हो चुका है. इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि बच्चों की मौत की वजह कुपोषण, टीकाकरण या कुछ और है, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें इस पर कुछ नहीं कहना है. अधिकारी के इस जवाब के बाद सवाल और गहरा गया है. एक तरफ दक्षिण बैहर में बच्चों की मौत को लेकर कुपोषण, गंदा पानी और टीकाकरण की कमी की बात सामने आ रही है, वहीं विभागीय अधिकारी इस पर कोई स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं.

अब जिम्मेदार विभाग से जवाब जरूरी है
दक्षिण बैहर में करीब 30 बच्चों की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इन मौतों की असली वजह क्या है? डॉक्टर से लेकर विधायक और तमाम बड़े नेता कुपोषण और टीकाकरण को मुख्य वजह मान रहे हैं. जिला अस्पताल के सिविल सर्जन ने गंदे पानी को भी प्रमुख कारणों में शामिल किया है. वहीं महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी बच्चों की मौत के कारणों पर कुछ भी कहने से साफ इनकार कर रहे हैं. ऐसे में बालाघाट जिले के दक्षिण बैहर में बैगा जनजाति के बच्चों की मौत का मामला गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.

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मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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