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27% OBC आरक्षण की जंग अब सुप्रीम कोर्ट में: HC के फैसले के खिलाफ SC पहुंची MP सरकार, जानिए क्या होंगी मोहन सरकार की मजबूत दलीलें?

मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की जंग अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. हाईकोर्ट के 9 अक्टूबर के फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने SLP दाखिल की है. सरकार ने OBC अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी विकल्प अपनाने की बात कही है. अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तारीख तय होने का इंतजार है.

Written By Pooja
Published: Oct 17, 2026, 12:31 PM IST | Updated: Oct 18, 2026, 11:49 AM IST
Image Credit: 27% OBC आरक्षण की जंग अब सुप्रीम कोर्ट पहुंची (फाइल फोटो)
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मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के 9 अक्टूबर 2026 के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि सरकार ओबीसी वर्ग के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखेगी.

जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश वर्सेज आशिता दुबे एवं अन्य मामले में यह याचिका दाखिल की गई है. 16 अक्टूबर को शाम 5:45 बजे इसे सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में दर्ज किया गया. अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शीर्ष अदालत में चलेगी.

सुप्रीम कोर्ट पहुंची मोहन सरकार

राज्य सरकार ने 9 अक्टूबर को उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले का बिंदुवार अध्ययन करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है. सरकार का कहना है कि वह 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर एक निष्पक्ष, तार्किक और संवैधानिक समाधान तक पहुंचने के लिए सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है. फिलहाल, यह याचिका अभी तक किसी भी न्यायाधीश की कॉज लिस्ट में शामिल नहीं की गई है. इसलिए अब पूरा ध्यान इस बात पर है कि सर्वोच्च न्यायालय कब सुनवाई की तारीख तय करता है और इस मामले की सुनवाई के लिए कब एक पीठ का गठन किया जाता है.

सीएम से मिले OBC महासभा के प्रतिनिधि

शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल के समत्व भवन में OBC महासभा के विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से चर्चा की. इस दौरान प्रतिनिधियों ने 27 प्रतिशत OBC आरक्षण से जुड़े मामले का जल्द निपटारा करने की मांग रखी. उन्होंने आंकड़ों के आधार पर संवैधानिक समाधान निकालने और ओबीसी अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित रखने पर जोर दिया. प्रतिनिधिमंडलों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा. इसमें कहा गया कि लंबे समय से लंबित इस प्रकरण का ऐसा समाधान निकाला जाना जाहिए, जिससे पिछड़ा वर्ग उम्मीदवारों को आरक्षण का वैधानिक लाभ मिल सके.

अतिरिक्त 13% को लेकर अब तक लंबित हैं नियुक्तियां

साल 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया था. इस फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को बरकरार नहीं रखा. तब से अतिरिक्त 13 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े पदों और नियुक्तियों का मामला लंबित पड़ा है.

मोहन सरकार की दलीलें

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About the Author

पूजा सिंह एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 5 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय (हाइपरलोकल) मुद्दों की सटीक व रियल-टाइम डिजिटल कवरेज पर उनकी मजबूत पकड़ है.माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद पूजा ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने Inshorts और नवभारत जैसे प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम करते हुए डिजिटल जर्नलिज्म, कंटेंट क्यूरेशन और न्यूज़ डेस्क ऑपरेशंस का अनुभव हासिल किया. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देती हैं, ताकि पाठकों तक हर जरूरी अपडेट तेजी से पहुंचे.पूजा सिंह से आप Pooja1.Singh@India.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं.
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