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पन्ना में 10वें दिन भी प्रदर्शन: चिता आंदोलन के साथ फांसी सत्याग्रह शुरू, आंदोलनकारी बोले- दुशासन की तरह लोकतंत्र का चीरहरण कर रहा प्रशासन

पन्ना में चिता आंदोलन 10वें दिन पहुंच गया है. अब चिता आंदोलन के साथ-साथ फांसी-मिट्टी सत्याग्रह में बदल गया है. आंदोलनकारी सुबह से देर रात तक धरना प्रदर्शन पर बैठे रहते हैं. वहीं उन्होंने शासन-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

पन्ना में 10वें दिन भी प्रदर्शन: चिता आंदोलन के साथ फांसी सत्याग्रह शुरू, आंदोलनकारी बोले- दुशासन की तरह लोकतंत्र का चीरहरण कर रहा प्रशासन
Image Credit: Zee Media

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के चलते प्रभावित आदिवासी किसानों का चिता आंदोलन 10वें दिन पहुंच गया है. यहां पर लगभग 24 से ज्यादा गांवों के आदिवासी किसान विस्थापन, मुआवजा, पुनर्वास, 46 लाख पेड़ों की बलि, पन्ना रिजर्व टाईगर और केन नदी के अस्तित्व को बचाने को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. पहले चिता आंदोलन चल रहा था, लेकिन अब फांसी-मिट्टी सत्याग्रह की भी शुरुआत कर दी है. बता दें कि आंदोलनकारी सुबह से लेकर देर रात तक धरना-पदर्शन और सत्याग्रह कर रहे हैं.

अंदोलनकारियों में शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है. विस्थापितों और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी अमित भटनागर ने कहा कि जब गांवों में पानी बढ़ रहा है. लोगों के घर डूबने की स्थिति में हैं. इसके बावजूद भी प्रशासन के पास विस्थापित परिवारों की सूची, प्रत्येक परिवार को मिलने वाले मुआवजे और लंबित मुआवजे का पारदर्शी लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है.

लोकतंत्र का चीरणहरण - अमित 
वहीं अमित भटनागर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब शासन-प्रशासन अपने ही बनाए कानूनों का पालन नहीं करता, तब लोकतंत्र और संविधान दोनों कमजोर होते हैं. उन्होंने कहा कि, जैसे महाभारत में दुशासन ने जिस तरह द्रौपदी का चीरहरण किया था, उसी तरह आज प्रशासन लोकतंत्र का चीरहरण कर रहा है. अमित भटनागर ने आगे कहा कि आंदोलन का उद्देश्य विकास रोकना नहीं, बल्कि कानून के अनुसार न्यायपूर्ण विस्थापन, उचित मुआवजा, पुनर्वास और पर्यावरण की रक्षा सुनिश्चित कराना है.

मझगाय-रुंझ प्रभावितों का आरोप
मझगाय और रुंझ बांध प्रभावितों का कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित ₹12.50 लाख के पैकेज के बावजूद अनेक परिवारों को अब तक पूरी राशि नहीं मिली है. आंदोलनकारियों का कहना है कि घोषणा को दो महीने से ज्यादा समय बीत गया है, लेकिन उसके बाद भी भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है. जबकि दूसरी तरफ प्रभावितों के मकान तोड़ने और डूब क्षेत्र में पानी बढ़ने की स्थिति लगातार बनी हुई है.

प्रशासन पर खड़े किए कई सवाल 
समाज सेवी अमित भटनागर ने आगे कहा कि जब तक परिवार को उसका पूरा अधिकार और मुआवजा नहीं दिया गया, तब तक उसके घर को उजाड़ना किस कानून और इंसानियत के तहत उचित है. उन्होंने कहा कि मकान तोड़ने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और अधिकारी पहुंच जाते हैं, लेकिन लोगों की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के समय केवल आश्वासन दिए जाते हैं. क्या सिर्फ बातों से जनता का पेट भर जाएगा?

प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी
अमित भटनागर ने कहा कि अगर शासन-प्रशासन ने तत्काल प्रभावितों की समस्याओं का समाधान नहीं किया या फिर आंदोलन को दबाने के प्रयास जारी रहा, तो देशभर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान संगठनों, आदिवासी संगठनों और लोकतांत्रिक आंदोलनों से संपर्क कर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आंदोलन खड़ा किया जाएगा. उन्होंने कहा कि चिता आंदोलन अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है. आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक प्रभावित परिवारों को उनके कानूनी अधिकार, पूरा मुआवजा, सम्मानजनक पुनर्वास और मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित नहीं की जाती.

(रिपोर्टः पीयूष शुक्ला, पन्ना)

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Manish Kushawah

Manish Kushawah

मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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