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झारखंड के तीन शिक्षा मंत्री पूरा नहीं कर सके अपना कार्यकाल, हार्ट अटैक से गई दो की जान

झारखंड की सियासत में यह बेहद दुखद संयोग है कि रामदास सोरेन, जगरनाथ महतो, राजेन्द्र प्रसाद सिंह और लक्ष्मण गिलुआ तमाम नेताओं का निधन हार्ट अटैक की वजह से हुआ है.

Written By K. Raj Mishra
Published: Sep 06, 2026, 11:55 AM IST | Updated: Sep 06, 2026, 12:02 PM IST
Image Credit: मंत्री सुदिव्‍य कुमार सोनू अकेले नहीं, हार्ट अटैक से झारखंड पहले भी खो चुका है ये दिग्गज चेहरे (File Photo)
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झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्यु कुमार सोनू का शनिवार (5 सितंबर) की रात को हार्ट अटैक से निधन हो गया है. वे JMM के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे और सीएम हेमंत सोरेन के काफी करीबी नेताओं में शामिल थे. उनके अचानक निधन से झारखंड की सियासत को तगड़ा लगा है. सुदिव्यु कुमार सोनू को श्रद्धांजलि देने के लिए सुबह से ही घर पर राजनेताओं का तांता लगा हुआ है. सीएम हेमंत सोरेन ने भी सुबह-सुबह गिरिडीह जाकर परिजनों से मुलाकात की और अपनी संवेदनाएं जताईं. इसके अलावा मंत्री इरफान अंसारी उनके आवास पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी. झारखंड ने सुदिव्यु कुमार सोनू से पहले भी अपने कई बड़े नेताओं को हार्ट अटैक की चलते खोया है. इनमें रामदास सोरेन, जगरनाथ महतो, राजेन्द्र प्रसाद सिंह और लक्ष्मण गिलुआ का नाम शामिल है.  

रामदास सोरेन भी नहीं पूरा कर सके थे कार्यकाल

ठीक एक साल पहले यानी अगस्त 2025 में रामदास सोरेन के रूप में झारखंड ने अपना एक बड़ा नेता खो दिया था. यह बेहद दुखद संयोग है कि रामदास सोरेन का निधन भी हार्ट अटैक से हुआ था और निधन के वक्त वह शिक्षा मंत्री के पद पर कार्यरत थे. हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल में उनकी गिनती सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में होती थी, लेकिन वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे. कोल्हान में वह चंपई सोरेन के बाद दूसरे बड़े नेता माने जाते थे. आदिवासी समाज के बीच उनकी एक अलग ही पहचान थी. वे अपनी सादगी, जमीनी स्तर पर जुड़ाव और जनसेवा के प्रति अटूट समर्पण के लिए हमेशा याद किए जाएंगे.

सुदिव्यु कुमार सोनू के सियासी सफर पर नजर

गिरिडीह से दो बार से विधायक रहे सुदिव्य कुमार सोनू का जन्म 26 जुलाई 1970 को गिरिडीह के हरसिंहरायडीह में हुआ था. उनका राजनीतिक सफर एक साधारण JMM कार्यकर्ता के तौर पर शुरू हुआ था. शुरुआती दौर में वह पार्टी का झंडा लेकर गांव-गांव घूमते थे. उनकी मेहनत और लगन को देखते हुए 1992 में उन्हें गिरिडीह नगर कमेटी का संस्थापक अध्यक्ष बनाया गया और फिर पार्टी में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हुए वह गिरिडीह जिला अध्यक्ष तक पहुंचे. 2009 में उन्होंने पहली बार गिरिडीह विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं मिली. 2014 में भी हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2019 में आखिरकार वे पार्टी के भरोसे पर खरे उतरे और पहली बार विधायक बने. 2024 में भी जीत हासिल करके हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री बने.

शिक्षा विभाग ने खोया अपना तीसरा मंत्री

झारखंड की सियासत में यह बेहद दुखद संयोग है कि प्रदेश ने अपने तीन शिक्षा मंत्रियों को बीच कार्यकाल में खो दिया है. साल 2023 में जगरनाथ महतो का बतौर शिक्षा मंत्री रहते हुए निधन हुआ था. उन्हें 'टाइगर जगरनाथ महतो' भी कहा जाता था, उनका अप्रैल 2023 में चेन्नई के अस्पताल में निधन हुआ था. कोरोनाकाल में उनके दोनों फेफड़े खराब हो गए थे. लंग्स ट्रांसप्लांटेशन के बाद भी उनको बचाया नहीं जा सका था. अजीब इत्तेफाक यह है कि कोरोना की चपेट में आने से पहले साल 2018 में जगरनाथ महतो को भी हार्ट अटैक आया था. 

अन्य प्रमुख नेता जिनकी मौत हार्ट अटैक से हुई

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About the Author

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
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