छात्र आंदोलन का साइड इफेक्टः झारखंड में 22 जुलाई के बाद नहीं निकली कोई बहाली
JSSC ने 22 जुलाई के बाद कोई नई बहाली नहीं निकली है. आखिरी भर्ती विज्ञापन पारा शिक्षकों की बहाली का निकला था. आयोग ने 31 अगस्त के बाद कोई नई सूचना भी नहीं प्रकाशित की है. 20 अगस्त को आरक्षी नियुक्ति परीक्षा के तहत शारीरिक जांच परीक्षा का कार्यक्रम घोषित किया था
झारखंड में सरकारी नौकरी की राह देख रहे युवाओं की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिरता दिख रहा है. नई भर्तियों का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को अभी थोड़ा और सब्र करना होगा. राज्य की दो सबसे प्रमुख चयन एजेंसियों-झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC)-की सुस्त रफ्तार और जारी जांच की वजह से भर्ती प्रक्रिया बुरी तरह पटरी से उतर चुकी है.
JPSC की बात करें तो वहां स्थिति काफी चिंताजनक है. आयोग के अध्यक्ष और कई सदस्यों के पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण नीतिगत फैसले अटके हुए हैं. ऊपर से पुरानी कई परीक्षाओं में हुई धांधली की जांच चल रही है. नए विज्ञापनों का काम लगभग ठप सा पड़ा है.
JPSC ने अब तक 798 पदों के लिए विज्ञापन जारी किए हैं, जिनकी चयन प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में अटकी है. वहीं, 847 नए पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी होना अभी बाकी है, लेकिन बिना बोर्ड और जांच पूरी हुए इसमें तेजी आने की उम्मीद कम ही है.
दूसरी तरफ JSSC में अधिकारियों और सदस्यों की वैसी किल्लत नहीं है, फिर भी वहां काम की रफ्तार सुस्त बनी हुई है. 22 जुलाई को पारा शिक्षकों के लिए विशेष सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा का विज्ञापन निकाला गया था, लेकिन उसके बाद से आयोग ने कोई नया विज्ञापन जारी नहीं किया. आलम यह है कि 31 अगस्त के बाद से वेबसाइट पर कोई नया अपडेट या नोटिस तक नहीं आया है.
इतना ही नहीं, कार्मिक विभाग की ओर से अधियाचना वापस लेने की वजह से इंटरमीडिएट स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा को रद्द करने की अनुशंसा की गई है. अब जब कार्मिक विभाग नए सिरे से अधियाचना भेजेगा, तभी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. थोड़ी राहत की बात बस यही रही कि 20 अगस्त को जारी आरक्षी भर्ती परीक्षा का शारीरिक दक्षता परीक्षण पूरा कर लिया गया है.
JSSC: 20,206 विज्ञापित पदों पर प्रक्रिया जारी है, जबकि 1,759 नए पदों पर भर्ती का विज्ञापन आना अभी बाकी है.
JPSC: 798 पदों पर प्रक्रिया अटकी हुई है, जबकि 847 नए पदों के लिए विज्ञापन का इंतजार है.
तमाम मुश्किलों और लचर व्यवस्था के बीच परीक्षा की तैयारी में दिन-रात एक करने वाले अभ्यर्थी बस इसी आस में बैठे हैं कि दोनों आयोग कब अपनी नींद से जागते हैं और अटकी हुई भर्तियों को आगे बढ़ाते हैं.