झारखंड SIR: 63 लाख वोटरों को बड़ी राहत, अब BLO घर-घर जाकर लेंगे दस्तावेज, आपत्ति की ऑनलाइन होगी सुनवाई
झारखंड मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने प्रदेश के 63 लाख वोटरों को बड़ी राहत दी है. अब मतदाताओं को अपने दस्तावेज देने या सुनवाई के लिए इआरओ दफ्तर के चक्कर नहीं काटने होंगे. उधर, SIR पर सियासी बयानबाजी लगातार जारी है.
झारखंड में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) का बड़ी तेजी के साथ चल रहा है. SIR पर जारी सियासत के बीच झारखंड मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने प्रदेश के 63 लाख वोटरों को बड़ी राहत दी है. अब मतदाताओं को अपने दस्तावेज देने या सुनवाई के लिए इआरओ दफ्तर के चक्कर नहीं काटने होंगे. दस्तावेज लेने के लिए बीएलओ खुद उनके घर आएंगे. वहीं आपत्ति पर अब ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा मिलेगी. उन्हें अनावश्यक भीड़ की परेशानी से भी जूझना नहीं होगा. चुनाव आयोग के मुताबिक, जिन्हें दावा-आपत्ति चरण में नोटिस भेजा गया है, अब बीएलओ उन मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करेंगे.
30 सितंबर तक दायर कर सकते हैं दावा-आपत्ति
झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि जिन व्यक्तियों को अनमैप्ड अथवा लाजिकल डिस्क्रेपेंसी सूची में नोटिस प्राप्त है, उन्हें अब ईआरओ/एईआरओ कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी. के. रवि कुमार ने कहा कि केवल असाधारण परिस्थितियों में ईआरओ के निर्णयानुसार सुनवाई आयोजित की जाएगी. यह सुनवाई भी ऑनलाइन होगी. उन्होंने कहा कि जिला निर्वाचन पदाधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि ऑनलाइन सुनवाई ही से हो सके. बता दें कि दावा आपत्ति का चरण 30 सितंबर को खत्म हो रहा है. दो बार इसकी अंतिम तिथि बढ़ाई जा चुकी है.
कांग्रेस ने SIR रद्द करने की मांग की
उधर, एसआईआर को लेकर एक अंग्रेजी न्यूज चैनल की रिपोर्ट पर सियासत गरमा गई है. कांग्रेस पार्टी ने एसआईआर को लेकर निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए एसआईआर की प्रकिया में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है. झारखंड के कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिंहा ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने SIR के माध्यम से गैर बीजेपी वोटरों का नाम काट दिया है. उन्होंने कहा कि वोट का अधिकार छीनने का प्रयास हो रहा है. निर्वाचन आयोग के हाथों बीजेपी और केंद्र सरकार इस अधिकार को छिनवा रही है. कांग्रेस प्रवक्ता ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया है. उन्होंने एसआईआर की प्रकिया को रद्द करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर कार्रवाई करने की मांग की है.
BJP को जेएमएम ने आड़े हाथों लिया
उधर, बीजेपी की ओर से एसआईआर का समर्थन करने पर जेएमएम ने आड़े हाथों लिया है. जेएमएम महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि यह मामला निर्वाचन आयोग का है, इसमें बीजेपी कहां है? जो आरोप लग रहे हैं, वह निर्वाचन आयोग और उनके चीफ पर हैं. बीजेपी को इसमें बोलने की क्या आवश्यकता है? सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि अगर आरोप बेबुनियाद हैं तो ज्ञानेश कुमार आकर बोलें. किसी कमिश्नर द्वारा 14 बार आपत्ति दर्ज कराई गई या नहीं, इस पर ज्ञानेश कुमार को जवाब देना चाहिए. बंगाल चुनाव में उनके द्वारा 40 हजार ईवीएम जलाए गए. बीजेपी क्यों बचाव करने में लगी है? जेएमएम नेता ने कहा कि ऐसा करके बीजेपी एक्सपोज हो गई है. उनकी चोरी पकड़ी गई है, इसलिए बीजेपी के पेट में दर्द हो रहा है.
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार
वहीं, इस मामले में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि कांग्रेस का स्वभाव है, झारखंड और देश के लोगों को गुमराह करना. देश और राज्य की जनता इनको पहले से जानती है. 2014 के बाद से जनता ने उनको नकारा है. अब संवैधानिक ढांचा पर हमला करना, उनका स्वभाव बन गया है. कभी सर्वोच्च न्यायालय, कभी चुनाव आयोग पर, सवाल उठाते रहते हैं. जब इनको लगता है चुनाव हार गए तो संविधानिक संस्थाओं पर हमला करने का काम करते हैं. जब से बंगाल एवं अन्य राज्य में कांग्रेस चुनाव हारी है, ये लोग बिलबिलाए हुए हैं. ये लोग झूठ बोलने वाले जनता को गुमराह और धोखा देने वाले लोग हैं. ये फिर से झूठ के बल पर देश में कांग्रेस का राज स्थापित करना चाहते हैं.