झारखंड पुलिस बल में कितने पद खाली? हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब, जनवरी में अगली सुनवाई
झारखंड में पुलिस की रिक्तियों और शिकायत प्राधिकरण पर हाई कोर्ट सख्त हो गया है. कोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है. साथ ही कार्यशैली पर सरकार से जवाब तलब किया है. इतना ही नहीं, राज्य सरकार से शपथ पत्र मांगा है.
झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य में पुलिस बल के स्वीकृत और रिक्त पदों की जानकारी मांगी है. अदालत ने राज्य सरकार को शपथ पत्र दाखिल कर बताने का निर्देश दिया है कि झारखंड पुलिस में कुल कितने पद स्वीकृत हैं और उनमें से कितने पद फिलहाल खाली हैं. कोर्ट ने राज्य और जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण के गठन और उसकी कार्यशीलता की स्थिति पर भी विस्तृत जवाब मांगा है.
पुलिस में खाली पदों पर झारखंड हाई कोर्ट सख्त
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गुरुवार को इस मामले में सुनवाई की. यह मामला राज्य में स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी (SPCA) और जिला स्तरीय पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी के गठन से संबंधित अदालत के स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका से जुड़ा है.
तो क्या ये संस्थाएं वास्तव में काम कर रही हैं?
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या झारखंड में स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी और जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन किया जा चुका है? अगर इनका गठन हुआ है तो क्या ये संस्थाएं वास्तव में काम कर रही हैं?
हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
अदालत ने विशेष रूप से स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी की कार्यशीलता की स्थिति स्पष्ट करने को कहा. राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि झारखंड में स्टेट पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी का गठन किया जा चुका है. हालांकि, इसके कामकाज और जिला स्तर पर ऐसी संस्थाओं के गठन की स्थिति को लेकर अदालत ने विस्तृत जानकारी मांगी है.
शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश
हाई कोर्ट ने सरकार को सभी बिंदुओं पर शपथ पत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत यह जानना चाहती है कि पुलिस बल में रिक्त पदों की स्थिति क्या है और पुलिस के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई के लिए निर्धारित संस्थागत व्यवस्था कितनी प्रभावी है. इन प्राधिकरणों का उद्देश्य
जनवरी में अगली सुनवाई
पुलिसकर्मियों के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई और पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना है. मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2027 में निर्धारित की गई है.
इनपुट: आईएएनएस