एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम ने जीता गोल्ड: झारखंड की 4 बेटियों ने बढ़ाया देश का मान
भारतीय हॉकी टीम ने इतिहास रच दिया है. सलीमा टेटे की कप्तानी में भारत ने चीन को हराकर एशिया कप का गोल्ड मेडल जीता है. इसमें झारखंड की 4 बेटियां भी शामिल है.
एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम ने इतिहास रचते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया है. फाइनल मुकाबले में भारत ने चीन को एक गोल से शिकस्त दिया और यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की. इस शानदार जीत के साथ ही भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल के लंबे सूखे को खत्म करते हुए ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया है.
झारखंड राज्य का भी गौरव बढ़ा
इस ऐतिहासिक जीत में देश के साथ-साथ झारखंड राज्य का भी गौरव बढ़ा है, क्योंकि टीम की सफलता में झारखंड की चार प्रतिभावान बेटियों- निक्की प्रधान, सलीमा टेटे, ब्यूटी डुंगडुंग और दीपिका सोरेन का अहम योगदान रहा है. इन खिलाड़ियों के बेहतरीन प्रदर्शन ने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है.
झारखंड में जश्न का माहौल
भारतीय महिला हॉकी टीम की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद से ही झारखंड में जश्न का माहौल बना हुआ है. पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी और निक्की प्रधान की बड़ी बहन शशि प्रधान ने टीम की इस बड़ी सफलता पर अपनी खुशी साझा की है. उन्होंने कहा कि बेटियों के इस शानदार प्रदर्शन ने पूरे राज्य और देश को गौरवान्वित किया है.
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जल्द ही झारखंड लौटेंगी निक्की प्रधान
वहीं, शशि प्रधान ने जानकारी दी कि निक्की प्रधान अपनी साथी खिलाड़ियों के साथ जल्द ही झारखंड लौटेंगी. झारखंड की इन जांबाज बेटियों के शानदार स्वागत के लिए राज्य में जोरदार तैयारियां की जा रही हैं. इस जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि लगन और मेहनत से अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया जा सकता है.
निक्की प्रधान के परिवार में जश्न का माहौल
गरीब परिवार में जन्मी निक्की ने मुश्किल हालात के बावजूद हॉकी खेलना शुरू किया. उनके पिता, सोमा प्रधान, जो खेती-बाड़ी करके गुजारा करते थे, उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि निक्की इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करेंगी. आज भी वे कच्चे फर्श वाले एक साधारण से घर में रहते हैं. उनकी मां, जित्नी देवी, घर के रोजमर्रा के काम करने के लिए हाथ से बनी चटाई पर बैठती हैं. वहीं, उनके पिता घर से ही एक छोटी सी दुकान चलाते हैं, जिससे वे गांव वालों की सेवा भी करते हैं और थोड़ी-बहुत कमाई भी हो जाती है.
निक्की के पिता, सोमा प्रधान ने निक्की की कामयाबी पर बहुत खुशी जताई. उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वह इतनी दूर तक पहुंच पाएगी. खासकर तब, जब वह एक छोटे से गांव से आई है, जहां संसाधनों की कमी थी. निक्की की मां ने गर्व के साथ कहा कि वह "देश की बेटी" है जिसने देश के लिए जीत हासिल की है. इतने मुश्किल हालात के बावजूद, निक्की अपनी पढ़ाई और हॉकी खेलने के लिए पालोल गई और आज उसने बड़ी कामयाबी हासिल की है.
कप्तान सलीमा टेटे के परिवार में खुशी का माहौल
कप्तान सिमडेगा की बेटी सलीमा टेटे के नेतृत्व में भारत ने फाइनल मुकाबले में गत चैंपियन चीन को 1-0 से हराकर 44 साल बाद एशियन गेम्स में महिला हॉकी का स्वर्ण पदक अपने नाम किया है. इस जीत के साथ भारतीय टीम ने लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए भी सीधे क्वालीफाई कर लिया है. सलीमा टेटे के माता-पिता सुबानी टेटे और सुलक्षण टेटे भी बेटी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से बेहद खुश हैं. माता-पिता ने बेटी की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए उसे आशीर्वाद दिया और कहा कि उनकी बेटी इसी तरह आगे बढ़े, तरक्की करे और जिला, राज्य तथा देश का नाम रोशन करें.