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भारत की मेजबानी में 12-13 सितंबर को BRICS समिट आयोजित किया जा रहा है. इस समिट में हिस्सा लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शिरकत करेंगे. आज इस बात की आधिकारिक पुष्टि हो गई है. चीन की बागडोर अपने हाथों में लेने के बाद वो बीते 13 सालों में कुल 3 बार आधिकारिक तौर पर भारत के दौरे पर आ चुके हैं. अब BRICS समिट में हिस्सा लेने के लिए वो चौथी बार भारत के दौरे पर आ रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में आए उतार-चढ़ाव और सीमाई इलाकों की स्थिति को देखते हुए, इस यात्रा को सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात के तौर पर नहीं देखा जा रहा है.
एशिया की दो सबसे बड़ी ताकतों का आमने-सामने बैठना हमेशा से रणनीतिक और आर्थिक, दोनों लिहाज से काफी मायने रखता है. ऐसे में कूटनीतिक हलकों में इस बात पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं कि बातचीत की मेज पर किन मुद्दों को तवज्जो मिलती है और क्या इस मुलाकात से दोनों देशों के संबंधों में किसी नए और ठोस मोड़ की उम्मीद की जा सकती है. चीनी राष्ट्रपति ने साल 2014 में पहला दौरा किया था उसके बाद साल 2016 में दूसरा और साल 2019 में तीसरा भारतीय दौरा किया था. अब चीनी राष्ट्रपति 7 सालों के बाद चौथी बार फिर भारत आ रहे हैं.
17 सितंबर 2014 को चीनी राष्ट्रपति का पहला भारत दौरा
17 सितंबर 2014 को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पहली बार भारत का दौरा किया था तब वो अहमदाबाद आए थे और साबरमती रिवर फ्रंट पर उनकी पीएम मोदी से खास मुलाकात हुई थी. यह पहला मौका था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का स्वागत दिल्ली से बाहर किसी अन्य राज्य में किया था. उसके बाद चीनी राष्ट्रपति दिल्ली पहुंचे और राष्ट्रपति भवन में उनका भव्य स्वागत किया गया तथा उन्हें तोपों की सलामी दी गई. इसके बाद पीएम मोदी के साथ व्यापार, निवेश और सीमा से जुड़े मुद्दों पर उनकी द्विपक्षीय वार्ता हुई. इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी हुए थे.
2106 में गोवा के BRICS समिट में जिनपिंग का दूसरा दौरा
साल 2016 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग गोवा में आयोजित BRICS समिट में हिस्सा लेने के लिए दूसरी बार भारत पहुंचे. इस दौरान उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. दो दिवसीय की ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए गोवा पहुंचे शी जिनपिंग पीएम मोदी से आतंकवाद के मुद्दे पर बातचीत की थी. इस दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद मुद्दे पर अहम चर्चा की थी हालांकि बाद में चीन ने मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने को लेकर भारत का विरोध किया और वीटो पॉवर का इस्तेमाल कर उसे ग्लोबल टेररिस्ट घोषित नहीं होने दिया था.
अक्टूबर 2019 में शी जिनपिंग का तीसरा भारतीय दौरा
अक्टूबर 2019 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग तीसरी बार अपने आधिकारिक भारतीय दौरे पर आए थे. 11 और 12 अक्टूबर 2019 को चेन्नई के पास महाबलीपुरम (मामल्लापुरम) में चीनी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी से मुलाकात की थी. यह एक अनौपचारिक शिखर सम्मेलन था. इस शिखर सम्मेलन में दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की. इन दौरों के अलावा जिनपिंग और मोदी जी कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलते रहते हैं. इससे पहले दोनों की पहली अनौपचारिक मुलाकात 2018 में वुहान (चीन) में हुई थी.
गलवान में हिंसक झड़प के बाद रिश्तों में आई थी तल्खी
15-16 जून 2020 की रात पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच बेहद हिंसक झड़प हुई थी. करीब 14,000 फीट की ऊंचाई पर हुई इस घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था. गलवान में तनाव की जड़ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी LAC पर स्थिति को लेकर दोनों देशों के बीच चल रहा विवाद था. इस झड़प की सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि दोनों तरफ से एक भी गोली नहीं चली. भारत और चीन के बीच हुए 1996 और 2005 के समझौतों के तहत सीमा पर कुछ परिस्थितियों में हथियारों के इस्तेमाल पर रोक थी.
दोनों देशों के रिश्तों में आया था तनाव
इसके बावजूद उस रात हालात बेहद खराब हो गए. चीनी सैनिकों ने कंटीले तारों वाली लाठियों, लोहे की रॉड और पत्थरों का इस्तेमाल किया. भारतीय जवानों ने भी पीछे हटने के बजाय आमने-सामने की लड़ाई में जवाब दिया. ऊंचाई, कड़ाके की ठंड और मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच कई घंटे तक चली इस झड़प ने दोनों देशों के रिश्तों को एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण दौर में पहुंचा दिया.
जिनपिंग के दौरे पर पिघलेगी दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026) में हिस्सा लेने के लिए 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम आ रहे हैं. 2020 में एलएसी पर गलवान में हिंसक झड़प के 6 साल के बाद शी जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा होगा. इस दौरे पर दो एशियाई शक्तियां आमने-सामने होंगी और इस दौरान पूरी दुनिया की नजर दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों पर रहेगी. अब देखना ये होगा कि आने वाले ब्रिक्स समिट में दोनों देशों के बीच गलवान झड़प के बाद रिश्तों पर जमी बर्फ पिघलेगी या ड्रैगन भारत के खिलाफ फिर किसी नई चाल की तैयारी कर रहा है.