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हरि सिंह की जयंती पर छुट्टी को लेकर बवाल, शेख अब्दुल्ला के नाम पर घमासान... J&K में क्यों छिड़ी ‘इतिहास की जंग’

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में महाराजा हरि सिंह की जयंती पर छुट्टी को लेकर विवाद बढ़ गया. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने शेख अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी की मांग की, जबकि बीजेपी ने महाराजा के योगदान का हवाला देते हुए विरोध किया और वॉकआउट किया.

Written By Khalid Hussain
Published: Sep 23, 2026, 05:33 PM IST | Updated: Sep 23, 2026, 05:40 PM IST
Image Credit: AI के जरिए बनाई गई तस्वीर
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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेशनल कांफ्रेंस के रुख पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए, भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई के नेताओं ने कहा कि महाराजा हरि सिंह और शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के बीच कोई तुलना नहीं हो सकती. जम्मू-कश्मीर के इतिहास में पहली बार, BJP ने आज महाराजा हरि सिंह का जन्मदिन मनाया और राज्य में उनकी भूमिका, योगदान और कद के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि उनका कद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के दादा, शेख मोहम्मद अब्दुल्ला से कहीं ज़्यादा बड़ा था. BJP ने कहा कि महाराजा हरि सिंह ने ही जम्मू-कश्मीर को औपचारिक रूप से भारत संघ में मिलाने में बहुत बड़ी और ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी.

बीजेपी जम्मू-कश्मीर के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा, 'महाराजा हरि सिंह महान व्यक्तित्व और दूरदर्शी नेता थे. उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास और महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया. फ्लड चैनल, SMHS, SP कॉलेज और जम्मू-कश्मीर बैंक जैसे संस्थानों में उनका योगदान रहा. लेकिन उनका सबसे बड़ा योगदान भारत संघ के साथ जम्मू-कश्मीर का विलय था. आप किसी भी हाल में महाराजा और शेख अब्दुल्ला की तुलना नहीं कर सकते. महाराजा भारत के साथ जुड़े, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस और शेख अब्दुल्ला की नीति हमेशा भारत से दूर रहने और अलग होने की रही.'

बीजेपी ने गिनाए महाराजा हरि सिंह के योगदान

भाजपा ने महाराजा को एक सच्चे धर्मनिरपेक्ष शासक के तौर पर पेश किया, जो सभी समुदायों - हिंदुओं, मुसलमानों और सिखों के साथ बराबरी का व्यवहार करते थे और जिनकी लोकप्रियता सभी क्षेत्रों में फैली हुई थी. फ्लड चैनल और SMHS अस्पताल जैसे मेडिकल संस्थानों जैसे बुनियादी ढांचे की शुरुआत करने, 'स्टेट सब्जेक्ट्स' (राज्य के निवासियों के लिए विशेष अधिकार) लागू करने और जमीन जोतने वाले को मालिकाना हक (लैंड-टू-द-टिलर) जैसे सुधार शुरू करने तक, महाराजा के जरिए किए गए बुनियादी विकास कार्य आज भी लोगों की सेवा कर रहे हैं. बीजेपी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर बांटने वाली राजनीति करने और डोगरा शासक की स्थायी विरासत के प्रति विरोध की भावना रखने का आरोप लगाया.

आरएस पठानिया बोले- महाराजा की विचारधारा आज भी प्रासंगिक

भाजपा विधायक आरएस पठानिया ने कहा, 'महाराजा हरि सिंह की विचारधारा और जम्मू-कश्मीर को लेकर उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं. कुछ राजनीतिक दलों ने महाराजा के इतिहास और उनके दौर को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश की. लंबे संघर्ष के बाद उनके जन्मदिन को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है और अब नेशनल कॉन्फ्रेंस व कांग्रेस को इससे परेशानी हो रही है. यह 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' का हिस्सा है.'

भरत भूषण ने छुट्टी के विरोध पर जताई आपत्ति

बीजेपी विधायक डॉ. भरत भूषण ने कहा, 'महाराजा हरि सिंह के योगदान को आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में विकास, भाईचारे और पर्यावरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया. लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन महाराजा जैसे शासक की छुट्टी का विरोध करना, जिनका इतना बड़ा योगदान रहा है, गलत है.'

विधानसभा में छुट्टियों के कैलेंडर पर क्यों हुआ विवाद?

बता दें कि 22 सितंबर को विधानसभा में उस समय हंगामा हुआ जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अब्दुल मजीद लरमी ने सरकारी छुट्टियों के कैलेंडर का मुद्दा उठाया. लरमी ने बताया कि 23 सितंबर को महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश होता है. उन्होंने जोर देकर मांग की कि सरकार या तो एनसी के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती (5 दिसंबर) पर सार्वजनिक अवकाश बहाल करे या फिर महाराजा हरि सिंह की जयंती पर मौजूदा छुट्टी पर पुनर्विचार करे और उसे रद्द कर दे.

शेख अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी की मांग से बढ़ा हंगामा

इस टिप्पणी से तुरंत आक्रोश फैल गया. बीजेपी विधायकों ने महाराजा हरि सिंह के सम्मान में दी गई छुट्टी को कमतर आंकने या रद्द करने के किसी भी सुझाव का कड़ा विरोध किया, जिससे सदन के भीतर हंगामा हुआ और जोर-जोर से नारेबाज़ी हुई. कांग्रेस जैसी अन्य पार्टियों ने बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि वे शेख अब्दुल्ला के सम्मान का समर्थन करते हैं लेकिन महाराजा हरि सिंह की जयंती की छुट्टी रद्द करने के किसी भी कदम का विरोध करते हैं.

PDP ने 13 जुलाई को शहीद दिवस की छुट्टी बहाल करने की मांग की

वहीं पीडीपी विधायकों ने शेख अब्दुल्ला के लिए छुट्टी की मांग का समर्थन किया और साथ ही 13 जुलाई (शहीद दिवस) को फिर से छुट्टी घोषित करने पर जोर दिया, ताकि 1931 में डोगरा शासन के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों को याद किया जा सके.

बीजेपी के विरोध के बीच विधानसभा से वॉकआउट

इस पर भाजपा सदस्यों ने महाराजा हरि सिंह की प्रशंसा में नारे लगाते हुए विधानसभा से हंगामा करते हुए वॉकआउट किया, जिससे यह साफ हो गया कि वे उनके ऐतिहासिक महत्व को कम करने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध करेंगे.

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About the Author

सैयद खालिद हुसैन जम्मू-कश्मीर के एक पुरस्कार विजेता पत्रकार हैं, जिन्हें 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है. साल 2014 से 'ज़ी न्यूज़' में चीफ  स्पेशल कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम कर रहे हैं.जी मीडिया से पहले हुसैन ने न्यूज़ 18 में नौ साल तक सीनियर कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम किया. हुसैन ने अपने करियर की शुरुआत डीडी न्यूज से की थी. हुसैन ने अपनी तालीम श्रीनगर के पब्लिक स्कूल और डीएवी हाई स्कूल से हासिल की. फिर ग्रेजुएशन तक का सफ़र एस.पी हायर सेकेंडरी स्कूल और अमर सिंह कॉलेज से पूरा किया. उसके बाद मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली के सर अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पूरी की. इसके अलावा हुसैन लेखक फ़िल्म/ वीडियो कैमरा का स्पेशल कोर्स एफटीआई पुणे से कर चुके हैं.  मुंबई और दिल्ली में कई साल काम करने के बाद 2004 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में काम करना शुरू किया. डीडी न्यूज़, डीडी कश्मीर, BAG फ़िल्म्स में फ्रीलांस काम किया. हुसैन पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों को बेहतरीन तरीके से कवर कर रहे हैं. लद्दाख से लेकर मुंबई तक हुसैन भारत के कई शहरों से रिपोर्टिंग कर चुके हैं.
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