सरकार ने राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन करने की जगहों में बदलाव कर दिया है. दिल्ली में कई दशकों से विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र जंतर-मंतर रहा था लेकिन अब यह जगह प्रदर्शन करने की आधिकारिक जगह नहीं रह गई है. दिल्ली पुलिस ने को इस लिस्ट से हटाकर, तीन अन्य जगहों को प्रदर्शन की जगह करार दिया है. इनमें दिल्ली का रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड.
जंतर-मंतर भारत की संसद से महज 1.5 किलोमीटर की दूरी पर है. जबकि नई तीनों जगहें संसद से दूर हैं. बुराड़ी ग्राउंड संसद से लगभग 21 किलोमीटर दूर है. CBD ग्राउंड भी मध्य दिल्ली से काफी दूर स्थित है. जंतर-मंतर के बाद रामलीला मैदान एक ऐसी जगह है जो बाकियों के मुकाबले नजदीक है, लेकिन यहां एक दूसरी समस्या यह है कि यह मैदान दूसरे कार्यक्रमों के चलते हमेशा बिजी रहता है. एक जानकारी के मुताबिक, इस साल 2026 में यह मैदान सिर्फ तीन दिनों के लिए खाली है.
चलिए जानते हैं कि दुनिया बाकी देशों में प्रदर्शन की जगह और संसद के बीच की दूरी कितनी है. हम यहां कुछ और लोकतांत्रिक देशों के धरनास्थल के बारे में जानते हैं. इन देशों में अमेरिका, लंदन, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं. अगर हम अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया की बात करें, तो यहां संसद के बिल्कुल नजदीक ही प्रदर्शन करने की इजाजत है. इसके लिए व्यवस्था भी बनी हुई है. जबकि फ्रांस और दक्षिण अफ्रीका में कुछ दूरी का अंतर है.
| देश | प्रदर्शन स्थल | संसद से दूरी |
|---|---|---|
| अमेरिका | लाफायेट पार्क (व्हाइट हाउस के पास) | 200–300 मीटर |
| ब्रिटेन | पार्लियामेंट स्क्वायर | लगभग 0 किमी |
| जर्मनी | प्लात्स डेर रिपब्लिक | लगभग 0 किमी |
| फ्रांस | प्लास दे ला रिपब्लिक | 3–4 किमी |
| ऑस्ट्रेलिया | फेडरेशन मॉल | लगभग 0 किमी |
| दक्षिण अफ्रीका | ग्रैंड परेड | 0.5–1 किमी |
| भारत - नई दिल्ली | ||
| भारत | रामलीला मैदान | लगभग 3 किमी |
| भारत | CBD ग्राउंड, पूर्वी दिल्ली | लगभग 12 किमी |
| भारत | बुराड़ी ग्राउंड | लगभग 21 किमी |
दूरियां अनुमानित हैं. अमेरिका में लाफायेट पार्क की दूरी व्हाइट हाउस से है, संसद (कैपिटल) से नहीं. आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की स्थिति और अनुमति के नियम देश के अनुसार अलग हैं.
यहां यह भी बता दें कि जंतर-मंतर पर पिछले 33 वर्षों से प्रदर्शन करने की आधिकारिक जगह है. इंडिया गेट के पास बोट क्लब में बड़े प्रदर्शनों पर प्रतिबंधों के बाद 1993 में जंतर-मंतर प्रमुख प्रदर्शन स्थल के रूप में उभरा. जंतर-मंतर के पास सड़क का एक छोटा-सा हिस्सा किसानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पूर्व सैनिकों और आम नागरिकों के विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है. यह जगह राजधानी में अपनी मांगें उठाने और सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए पहचानी जाती रही है.