पूर्णिया के मखाना, कलबुर्गी की दाल का विदेश तक डंका, किसानों के लिए खुला ग्लोबल बाजार का रास्ता, मन की बात में क्या बोले PM मोदी
मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने अपनी 'मन की बात' कार्यक्रम में कहा कि भारत के किसानों के लिए अब दुनिया में नए बाजार खुल रहे हैं. पीएम मोदी ने इस दौरान किसानों को अपने प्रोडक्ट की पैकेजिंग पर विशेष ध्यान देने की अपील की.
मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि जो लोग समाज और राष्ट्र के लिए जीते हैं, वे अपने आप में एक तीर्थ के स्वरूप हैं. 12 वर्षों में देश के हर कोने से ऐसे अनेक लोग सामने आए हैं, जिनके असाधारण कार्यों की ओर सामान्य रूप से समाज का ध्यान नहीं जाता. मन की बात ने ऐसी अनगिनत कहानियों को आपके बीच में लाने का काम किया है. मन की बात से मुझे देश के हर परिवार के साथ जुड़ने का अवसर मिलता है. मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं उनके साथ बैठकर उनसे संवाद कर रहा हूं. हमारे देश में ऐसे अनेक पारंपारिक हुनर हैं, जो पीढ़ियों से हमारी पहचान का हिस्सा रहे हैं. सुखद यह है कि अब इन परंपराओं से जुड़कर अनेक नए प्रयोग भी हो रहे हैं.
'खेती विरासत मिशन' की तारीफ
पीएम ने कहा कि पंजाब में ऐसा ही एक प्रयास काफी समय से चल रहा है. यहां 'खेती विरासत मिशन' नाम की एक संस्था ने ऑर्गेनिक फार्मिंग और पारंपरिक कृषि को नया जीवन देने का काम शुरू किया. इस टीम के लोग पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की पारंपरिक खेती को बढ़ावा देना चाहते थे. इस पहल को नाम दिया गया- नवतृंजन. इस पहल के तहत यहां बिना केमिकल का इस्तेमाल किए ऑर्गेनिक कपास उगाई जाती है. यहां प्राकृत्रिक रंगों वाली कपास भी उगाई जाती है. इससे तैयार धागे और कपड़े को रंगने के लिए अलग से केमिकल का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती. पीएम मोदी ने कहा कि आप कल्पना कर सकते हैं कि इससे पर्यावरण की कितनी मदद हो रही है.
नवतृंजन ने बदली महिलाओं की जिंदगी
पीएम ने आगे कहा कि कुछ साल पहले नवतृंजन ने एक वीविंग स्कूल भी शुरू किया. इसका लक्ष्य है बुनकरी के हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना. इस स्कूल ने भी बहुत सारी महिलाओं की जिंदगी बदल दी है. रमनदीप कौर जी इसकी एक मिशाल हैं. पहले वह मजदूर के रूप में काम करती थीं, लेकिन स्कूल में ट्रेनिंग के बाद आज उनकी पहचान एक कुशल बुनकर के तौर पर है. रेखा रानी जी ने ट्रेनिंग लेने से पहले हैंडलूम को देखा तक नहीं था, उनके द्वारा बनाई गई शॉल राष्ट्रपति जी को भेंट की गई है. इसी तरह सुनहरा देवी जी पहले घरों में काम करती थीं, लेकिन आज वे हैंडलूम पर अद्भुत फैबिक्र तैयार कर रही हैं. रजनीकौर जी पहले खेतों में मजबूरी पर निर्भर थीं, अब नए हुनर से उन्हें घर चलाने में काफी मदद मिली है. ऐसी अनेक महिलाएं आज स्वदेशी कॉटन से बने धागों से शॉल, कपड़े तैयार कर रही हैं.
टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी का पुनर्जीवन
PM ने आगे कहा कि प्रकृति के प्रति सम्मान की हमारी पुरानी परंपरा रही है. उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में भी देखने को मिलता है. यहां लोगों ने मिलकर हेवल नदी को नया जीवन देने का काम किया है. कुछ समय पहले हेवल नदी का पानी कम होने लगा था. आस-पास के प्राकृत्रिक जलस्त्रोत भी सूख रहे थे. ऐसे में स्थानीय प्रशासन और गांव के लोगों ने मिलकर हेवल नदी को बचाने का अभियान चलाया. इस दौरान बारिश के पानी को बचाने का काम हुआ. जमीन में पानी पहुंचाने का काम हुआ और बड़ी संख्या में पेड़ लगाए गए. आज इस प्रयास से हेवल नदी को नया जीवनदान मिला है और साथ ही दर्जनों ने प्राकृत्रिक जलस्त्रोतों के पुनर्जीवन में मदद मिली है. जब समाज ऐसी भावना से एकजुट होता है, तो बदलाव की गारंटी पक्की हो जाती है.
'वोकल फॉर लोकल' की गूंज
पीएम मोदी ने कहा कि कुछ ही दिन बाद दीवाली और छठ का पावन पर्व आने वाला है. इसके लिए जगह-जगह साफ-सफाई का अभियान चलाया जा रहा है. यह जरूरी है कि हम जहां रहते हैं, वहां की स्वच्छता का ख्याल रखें. हमारे छोटे-छोटे प्रयास ही हमारे आस-पास बड़ा बदलाव ला सकते हैं. त्योहारों के इस मौसम में आप सभी ने अपने आसपास एक बदलाव जरूर महसूस किया होगा. अब लोग त्योहारों पर खरीददारी करते समय स्वदेशी उत्पादों को बहुत महत्व देने लगे हैं. 'वोकल फॉर लोकल' की यह भावना, अब हमारे उत्पादों को दुनिया के बाजारों तक पहुंचा रही है.
भारतीय किसानों मिला ग्लोबल बाजार
बिहार के पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस पहुंच रहा है. कर्नाटक के कलबुर्गी की अरदर दाल अब मालदीव जा रही है. यानी भारत के किसानों के लिए दुनिया में नए बाजार खुल रहे हैं. पीएम ने कहा कि किसी भी उत्पाद की क्वालिटी के साथ ही उसकी पैकेजिंग भी बहुत मायने रखती है. कई बार हम मार्केट में कोई सामान देखते हैं, तो उसकी अच्छी पैकेजिंग देखकर उसे हाथ में उठा लेते हैं. हम पैकेजिंग देखकर ही उस प्रोडक्ट के बारे में जानना चाहते हैं. इसी बात को समझते हुए अब पैकेजिंग पर भी जोर दिया जा रहा है. महाराष्ट्र में आदिवासी समाज के लोगों ने अपने प्रोडक्ट की पैकेजिंग पर बहुत जोर दिया है. यहां शबरी नेचुरल्स के जरिए महुआ, शहद, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं. इनकी पैकेजिंग पर आदिवासी कला की छाप है. इस पैकेजिंग को जापान का प्रसिद्ध गुड डिजाइन अवॉर्ड मिला है.
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