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J&K कैबिनेट विस्तार: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का दावेदारों को दोटूक संदेश- 'नाम तय, अब सिफारिशें और फोन करना बंद करें'

जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला की सरकार के कैबिनेट विस्तार की रेस में खुद को दावेदार मान रहे विधायकों को सीएम ने दो टूक संदेश दिया है. उन्होंने संभावित नामों के बारे में बस इतना कहा कि वो सभी को जानते हैं, इसलिए किसी को भी खुद की पैरवी करने की जरूरत नहीं है.

Written By Khalid Hussain Edited By Shwetank Ratnamber
Published: Oct 24, 2026, 02:35 PM IST | Updated: Oct 24, 2026, 02:50 PM IST
Image Credit: (ANI)
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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी कैबिनेट विस्तार को लेकर अहम जानकारी मीडिया से साझा की है. अब्दुल्ला ने बताया कि उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से अगले हफ्ते मंत्रिपरिषद के विस्तार के लिए समय तय करने की अपील की है. एलजी से मुलाकात के बाद अब्दुल्ला ने कहा कि मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई. जैसे ही वहां से हरी झंडी मिलेगी, कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. अब्दुल्ला ने बताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के साथ विचार-विमर्श के बाद मंत्रियों की सूची पहले ही अंतिम रूप दे दी गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल में किसे शामिल किया जाएगा, इस पर फैसला हो चुका है.

मंत्रिपद के दावेदारों को सीएम अब्दुल्ला की सलाह

पार्टी के सहयोगियों और मंत्री पद के दावेदारों को सलाह देते हुए अब्दुल्ला ने कहा, 'फारूक साहब के दरवाजे, मेरे दरवाजे या किसी और के दरवाजे खटखटाने की कोई जरूरत नहीं है. कृपया धैर्य रखें. जिसकी किस्मत में जो होगा, उसे वह मिल जाएगा. पहले अल्लाह तय करते हैं, फिर हम तय करते हैं. कृपया व्हाट्सऐप मैसेज न भेजें, फोन न करें और न ही लंबे बायोडाटा भेजें. मैं पहले से ही सभी को जानता हूं. जो भी होना है, वह अगले दो-तीन दिनों में हो जाएगा.'

अब्दुल्ला ने सऊदी अरब में फंसे जम्मू-कश्मीर और दूसरे राज्यों के लोगों का मुद्दा भी उठाया. उड़ानें रद्द होने के कारण ये लोग वहां फंस गए हैं. उन्होंने कहा कि हवाई टिकटों की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. ऐसे में उन लोगों के लिए वापसी का टिकट खरीदना मुश्किल हो रहा है, जिन्होंने कम किराये वाली एयरलाइंस में पहले से बुकिंग कराई थी. उन्होंने बताया कि इस मामले को उनकी सरकार ने विदेश मंत्रालय के सामने उठाया है.

चीन सीमा और लद्दाख से जुड़े सवाल पर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि लद्दाख के जम्मू-कश्मीर से अलग होने के बाद ये मामला अब केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. इस मुद्दे पर लद्दाख के उपराज्यपाल या केंद्र सरकार से बात की जानी चाहिए, क्योंकि अब इसमें जम्मू-कश्मीर की कोई भूमिका नहीं है.' 

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यह भी बताया कि उपराज्यपाल कुछ दिन पहले ही श्रीनगर लौटे थे और इस दौरान उनकी तबीयत भी थोड़ी खराब हो गई थी. इसलिए, बैठक में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के साथ उन्होंने उनके स्वास्थ्य लाभ की जानकारी लेते हुए हालचाल भी जाना.

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About the Author

सैयद खालिद हुसैन जम्मू-कश्मीर के एक पुरस्कार विजेता पत्रकार हैं, जिन्हें 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है. साल 2014 से 'ज़ी न्यूज़' में चीफ  स्पेशल कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम कर रहे हैं.जी मीडिया से पहले हुसैन ने न्यूज़ 18 में नौ साल तक सीनियर कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम किया. हुसैन ने अपने करियर की शुरुआत डीडी न्यूज से की थी. हुसैन ने अपनी तालीम श्रीनगर के पब्लिक स्कूल और डीएवी हाई स्कूल से हासिल की. फिर ग्रेजुएशन तक का सफ़र एस.पी हायर सेकेंडरी स्कूल और अमर सिंह कॉलेज से पूरा किया. उसके बाद मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली के सर अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पूरी की. इसके अलावा हुसैन लेखक फ़िल्म/ वीडियो कैमरा का स्पेशल कोर्स एफटीआई पुणे से कर चुके हैं.  मुंबई और दिल्ली में कई साल काम करने के बाद 2004 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में काम करना शुरू किया. डीडी न्यूज़, डीडी कश्मीर, BAG फ़िल्म्स में फ्रीलांस काम किया. हुसैन पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों को बेहतरीन तरीके से कवर कर रहे हैं. लद्दाख से लेकर मुंबई तक हुसैन भारत के कई शहरों से रिपोर्टिंग कर चुके हैं.
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