सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर दायरे में नहीं मिलेगा नॉन-वेज! रेस्टोरेंट मालिकों को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, जानिए पूरा मामला
गुजरात में हिंदुओं के पावन तीर्थ सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉन-वेज आइटम नहीं बेचे जा सकेंगे. बैन के खिलाफ विभिन्न अदालतों में लड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे मांसाहारी दुकानदारों की अर्जी शीर्ष अदालत में खारिज हो गई है.
गुजरात में सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का मांसाहारी भोजन नहीं बेचा जा सकेगा. इसके साथ ही,
अंडों की बिक्री, तैयारी और भंडारण पर लगी रोक फिलहाल जारी रहेगी. असल में मांसाहारी भोजन पर लगी रोक पर रेस्टोरेंट मालिकों को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है. शुक्रवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसने सरकार के इस बैन को बरकरार रखा था. सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि अगर रेस्टोरेंट मालिक चाहें तो वे इस मसले को हाईकोर्ट की बड़ी बैंच के सामने उठा सकते हैं. शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट को भी सुझाव दिया कि वह इस मामले पर लंबित अपीलों को दो महीने के भीतर निपटा दे.
जानिए क्या है पूरा विवाद?
बताते चलें कि इस मामले की शुरुआत 10 अगस्त को गिर सोमनाथ के जिला मजिस्ट्रेट की एक अधिसूचना से हुई थी. इस नोटिफिकेशन में सोमनाथ मंदिर जाने वाले प्रभास पाटन और वेरावल तालुका के तय रास्तों में नॉन-वेज बेचने, बनाने और भंडारण पर प्रतिबंध लगाया गया था. डीएम के इस नोटिफिकेशन का वहां नॉन-वेज बेचने वाले मुस्लिम दुकानदारों ने विरोध किया. उन्होंने कहा कि इस आदेश से उनके रोजगार पर असर पड़ेगा.
मुस्लिम दुकानदारों ने दी कोर्ट में चुनौती
इसके बाद ताज रेस्टोरेंट के मालिक आकिब अमीनभाई खान समेत कई दुकानदारों ने इस अधिसूचना को लोअर कोर्ट में चुनौती दी. अदालत ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा. दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद अदालत ने आदेश को वैध बताते हुए अर्जी खारिज कर दी. इसके बाद डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने भी इस फैसले को बहाल रखा.
दुकान मालिक ने इस फैसले को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी. मामले की सुनवाई करते हुए गुजरात हाईकोर्ट के सिंगल जज ने 30 अक्टूबर को फैसला सुनाया. एकल पीठ ने यह कहते हुए अधिसूचना को रद्द कर दिया कि यह गुजरात पुलिस अधिनियम, 1951 के तहत मिली शक्तियों से बाहर है. कोर्ट ने यह भी कहा कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत मिले व्यापार करने के मौलिक अधिकार का भी उल्लंघन करते हैं.
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने खारिज की याचिका
सिंगल जज के फैसले के खिलाफ गुजरात सरकार ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में अपील की. अपील को मंजूर करते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस मानष रंजन पाठक और जस्टिस निरजर एस. देसाई की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी. साथ ही, दोनों पक्षों को 10 अगस्त को डीएम की ओर से जारी अधिसूचना को प्रभावी बनाए रखने का निर्देश दिया.
गुजरात हाईकोर्ट के इस खिलाफ रेस्टोरेंट मालिक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. नॉन-वेज दुकानदारों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी ने कहा कि पुलिस अधिनियम के तहत स्थायी प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि ये दुकानें 35-40 सालों से वैध तरीके से चल रही थीं. अब दिवाली के समय बैन लगाने से दुकानदारों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में दखल देने से किया इनकार
वहीं, गुजरात सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रतिबंध का बचाव करते हुए अपनी दलील दी. उन्होंने कहा कि मंदिर की पवित्रता और श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है. तुषार मेहता ने कहा कि यह प्रतिबंध मंदिर से महज 500 मीटर के अंदर आने वाले इलाके पर ही लगाया गया है. नॉन-वेज दुकानदार इस परिधि से बाहर जाकर अपना बिजनेस कर सकते हैं. उस पर कोई रोक नहीं है.
जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस पी. बी. वराले की पीठ ने सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया. खंडपीठ ने संकेत दिया कि इस विवाद का समाधान किसी 'मध्यम मार्ग' से निकाला जाना चाहिए.