मायावती का बड़ा यू-टर्न! आकाश आनंद की BSP में वापसी, फिर मिली राष्ट्रीय संयोजक की कमान
मायावती ने सोमवार को बड़ा ऐलान करते हुए भतीजे आकाश आनंद को फिर से पार्टी में शामिल करने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए यह ऐलान किया है.
बहुजन समाज पार्टी (BSP) में फिर से आकाश आनंद की वापसी हो गई है. खुद पार्टी सुप्रीमो मायावती ने इसका ऐलान किया है. मायावती ने आकाश आनंद को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक (National Convener) के पद पर तैनात किया है. मायावती ने ऐलान करते हुए कहा कि पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित में काफी सोच-विचार के बाद आकाश आनंद को दोबारा काम करने का मौका दिया जा रहा है. आकाश आनंद की BSP में यह पहली वापसी नहीं है। पिछले ढाई साल में मायावती उन्हें तीन बार पार्टी की मुख्यधारा से बाहर कर चुकी हैं.
मायावती ने अपने बयान में आगे कहा,'पार्टी में आकाश आनंद का कामकाज काफी हद तक ठीक ही रहा है, लेकिन पिछले कुछ वक्त से उनसे जुड़े कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिनकी वजह से पार्टी में कई बदलाव करने पड़े.' मायावती ने कहा कि इसके बाद आकाश आनंद के व्यवहार और काम करने के तरीके में भी बदलाव देखने को मिला है. इसकी हालिया मिसाल उनका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किया गया वह पोस्ट है, जिसमें उन्होंने BSP में दोबारा काम करने की इच्छा जाहिर की थी.
अशोक आनंद के ससुर पर भी क्या बोलीं मायावती
मायावती ने अपने पोस्ट में उम्मीद जाहिर की है कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के बाद से अब पार्टी में सब कुछ ठीक व सुचारू ढंग से चलेगा और पार्टी संगठन में भी बार-बार परिवर्तन नहीं करना पड़ेगा. हालांकि, यह काफी कुछ श्री आकाश आनन्द के ऊपर भी निर्भर करेगा
आकाश आनंद के पोस्ट में क्या लिखा था?
आकाश आनंद ने मायावती को अपना राजनीतिक गुरु बताया था. उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए लिखा,'परम आदरणीय बहन जी, आप मेरी राजनैतिक गुरु हैं, मेरी प्रेरणा हैं, और मेरी बुआ मां भी हैं. राजनीति में मैंने जो कुछ सीखा, वो आप से ही सीखा, जो कुछ किया, आपके मार्गदर्शन में किया. पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया में मेरे बारे में कई तरह की खबरें और अफवाहें चल रही हैं. मैं साफ कर देना चाहता हूं. मैं किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जा रहा. न आज, न कभी. BSP मेरे लिए सिर्फ एक पार्टी नहीं, मेरा परिवार है.'
अपने इस बयान में उन्होंने अपने ससुर को लेकर लिखा,'श्री अशोक सिद्धार्थ जी को पार्टी से निकालने और उनके संन्यास का आपका फैसला पूरी तरह उचित है और मैं उस फैसले के साथ खड़ा हूं. रिश्ते अपनी जगह हैं, पर मिशन उनसे बड़ा है. व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर पार्टी और आंदोलन का हित रखना मेरी जिम्मेदारी है.' आनंद पोस्ट के आखिर में लिखते हैं,'मैं सिर्फ आपके नेतृत्व में फिर से पार्टी और मिशन की सेवा का अवसर चाहता हूं. विश्वास शब्दों से नहीं, काम से बनता है और मैं उसे अपने आचरण और अपनी मेहनत से साबित करूंगा.'