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Devendra Fadnavis Diwali Plan: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बार की दिवाली राज्य के किसानों के नाम करने का फैसला किया है. उन्होंने अपने सभी मंत्रियों से अपील की है कि वे दिवाली का एक दिन किसानों के बीच जाकर बिताएं. खुद सीएम फडणवीस भी नागपुर जिले के एक गांव में पहुंचकर किसानों के साथ दिवाली मनाएंगे.
दरअसल, राज्य में इस वक्त सूखे के गंभीर हालात बने हुए हैं, जिससे किसान बड़े संकट का सामना कर रहे हैं. इसी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है, ताकि मुश्किल की इस घड़ी में किसानों को अकेला महसूस न हो.
#WATCH | Nagpur: On celebrating Diwali with farmers, Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis says, "Maharashtra is currently facing a severe drought, and our farmers are in the midst of a major crisis. Consequently, all of us ministers have decided to spend this Diwali in a village, among the farmers. We intend to sit with them and engage in dialogue. Through this, we hope to boost their morale, as the drought is a challenge that must be confronted. While there is no immediate, instant solution to a drought, the government will provide all possible assistance to the farmers; at the same time, we want to ensure their spirits remain high. We want them to feel that the government stands with them—that is the decision we have taken."
— ANI (@ANI) November 7, 2026
नागपुर में किसानों के साथ दिवाली मनाने को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, 'महाराष्ट्र इस समय गंभीर सूखे का सामना कर रहा है और हमारे किसान एक बड़े संकट के दौर से गुजर रहे हैं. इसी वजह से हम सभी मंत्रियों ने यह फैसला किया है कि इस बार की दिवाली किसी गांव में, किसानों के बीच रहकर मनाएंगे.'
सीएम फडणवीस ने आगे कहा, 'हमारा इरादा किसानों के साथ बैठने और उनसे संवाद करने का है. इसके जरिए हम उनका मनोबल बढ़ाना चाहते हैं, क्योंकि सूखा एक ऐसी चुनौती है, जिसका डटकर सामना करना होगा. हालांकि, सूखे का कोई तुरंत समाधान नहीं है, लेकिन सरकार किसानों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी. साथ ही, हम यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनका हौसला ऊंचा बना रहे. हम चाहते हैं कि उन्हें यह महसूस हो कि सरकार उनके साथ खड़ी है, यही निर्णय हमने लिया है.'
दरअसल, महाराष्ट्र पिछले 25 सालों के सबसे भयानक सूखे की मार झेल रहा है. हालात इतने खराब हैं कि राज्य का 70 से 85% हिस्सा सूखे की चपेट में है. सरकार ने कुल 358 तालुकों में से 305 को सूखाग्रस्त घोषित किया हुआ है. इस संकट की वजह से खरीफ की करीब 80% फसलें बर्बाद हो गई हैं और 8 लाख से ज्यादा किसान सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं.
दरअसल, सबसे बड़ा सवाल है कि यह संकट कैसे आया? तो जान लीजिए कि जून से सितंबर के बीच रहने वाला मानसून इस बार काफी कमजोर रहा और सामान्य से करीब 19% कम बारिश हुई. इसके पीछे की बड़ी वजह प्रशांत महासागर में 'अल-नीनो' का मजबूत होना रहा, जिसने पूरे मानसून सिस्टम को बिगाड़ दिया. इसके अलावा लगातार 45 दिनों तक एक बूंद पानी नहीं गिरा. इस लंबे सूखे का नतीजा ये हुआ है कि जमीन की सारी नमी सोख ली गई और खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं.
राज्य में जहां सबसे ज्यादा नुकसान है, उनमें विदर्भ, मराठवाड़ा, उत्तरी महाराष्ट्र और पुणे डिवीजन शामिल हैं. उत्तरी महाराष्ट्र के कुछ जिलों में तो बारिश 50% से 60% तक कम हुई है. इसका सीधा असर सोयाबीन, कपास और अरहर जैसी मुख्य फसलों पर पड़ा, जो पूरी तरह चौपट हो गईं.