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India Food Safety: भारत में एक छोटी सी टॉफी से लेकर 10 किलो के आटे के बोरे तक हर जगह फूड सेफ्टी के नियमों का उल्लंघन होते रहा है. कई लोग तो पैकेज्ड फूड, जूस, घी, शहद, दूध और मसाले खरीदने से पहले उनकी सामग्रियां भी नहीं चेक करते. ऊपर से हमारे देश के कई होटलों में फेक बटर, एनालॉग पनीर और खूब सारा फूड कलर से लबालब खाना मिलता है.
'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पैक्ड-फूड मार्केट का तकरीबन 80 प्रतिशत हिस्सा ऐसा है, जिसमें फैट, शुगर या नमक की मात्रा बेहद ज्यादा है. साल 2020 से हर साल इंस्पेक्टरों ने 1,00,000 से अधिक फूड सैंपल की जांच की है और पाया कि तकरीबन 20 प्रतिशत सैंपल या तो असुरक्षित, घटिया क्वालिटी और ऐसे थे, जिन पर सही जानकारी नहीं लिखी थी. वहीं, भारत की फूड इकोनॉमी इतनी तेजी से बदल रही है कि इस पर नजर रखना बेहद मुश्किल है.
भारत में क्विक कॉमर्स 13 अरब डॉलर (1.23 लाख करोड़ रुपये) का सेक्टर है और रोजाना तकरीबन 90 लाख ऑर्डर प्रोसेस करता है. यह अगस्त 2026 में फूड सेफ्टी से जुड़ी सख्त कार्रवाई के दायरे में आया, जब फूड इंस्पेक्टरों को वेयरहाउस में कॉकरोच, चूहे, सड़ी-गली सब्जियां, साफ-सफाई की कमियां मिलीं. वहीं, एनर्जी ड्रिंक्स इंडस्ट्री भी भारत में 12.6 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है उसे भी जुलाई 2026 में लेबलिंग से जुड़े नए नियमों का सामना करना पड़ा. देशभर में फूड सेफ्टी को लेकर हाल ही में चलाए गए एक अभियान के बाद 100 अरब डॉलर (9.48 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में धोखाधड़ी और लापरवाही का पर्दाफाश हुआ है. इसमें भ्रामक लेबल, बदली हुई एक्सपायरी डेट से लेकर साफ-सफाई को लेकर बड़ी चूक शामिल हैं.
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मुताबिक, अगर खाने की किसी भी चीज में जानबूझकर ऐसा पदार्थ डाला जाता है या मिलाया जाता है, जिससे खाने की क्वालिटी खराब होती है, तो उसे फूड एडल्ट्रेशन (Food Adulteration) कहते हैं. इसी साल मार्च 2026 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए जरूरी डेटा शेयर किया था. इसमें उन्होंने FSSAI की कार्रवाई की जानकारी दी थी.

ऊपर दी गई टेबल में साफ पता चलता है कि FSSAI ने समय के साथ देशभर में अपनी टेस्टिंग क्षमता काफी बढ़ा दी है. एक तरफ जहां साल 2020-21 में केवल 1.08 लाख सैंपल टेस्ट किए गए, तो वहीं साल 2024-25 में ये आंकड़ा बढ़कर 1.71 लाख हो गया यानी इसमें 58.15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. अब फूड टेस्टिंग बढ़ने के साथ ही मानकों के अनुरूप नहीं पाने वाले सैंपलों की संख्या में भी वृद्धि देखने को मिली. साल 2020-21 में यह संख्या 28347 थी, जो साल 2024-25 में बढ़कर 34388 यानी 21.31 फीसदी बढ़ गई.
मिलावट के मामले में सबसे ज्यादा एक्शन उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है. साल 2022-23 से लेकर 2024-25 के बीच 42695 सिविल मामलों में जुर्माना लगाया गया.

तमिलनाडु की बात करें तो यहां ऐसे मामलों की संख्या ज्यादा है जहां दोष सिद्ध हो चुका है. तमिलनाडु में दोष सिद्ध का आंकड़ा 1648 दर्ज किया गया. यह उत्तर प्रदेश के 629 से अधिक है. केरल इसमें तीसरे नंबर पर है, जहां 373 मामलों में दोष सिद्ध हुए हैं.

आंकड़ों में कुछ ऐसे राज्यों के नाम भी सामने आए हैं, जहां फूड सैंपल तो फेल हुए, लेकिन यहां उतनी तेज कार्रवाई देखने को नहीं मिली. इनमें असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम और पुडुचेरी का नाम शामिल है. यहां सिविल पैनल्टी शून्य रही. इसके अलावा सिक्किम में 4, नागालैंड में 3, अरुणाचल प्रदेश में 9 और मणिपुर में इसकी संख्या 2 रही.

सामने आए डेटा में यह भी पता चला कि पिछले 5 सालों में तय मानकों पर खरे न उतरने वाले सबसे ज्यादा सैंपल उत्तर प्रदेश से सामने आए हैं और उसके बाद तमिलनाडु तीसरे नंबर पर रहा.
FSSAI फूड क्वालिटी की जांच के लिए नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज (NABL) का इस्तेमाल करती है.
देशभर में मौजूदा समय में 259 NABL अप्रूव्ड लैब्स तो अपील सैंपलों के लिए 24 रेफरल फूड लैबोरेटरीज नोटिफाई है. FSSAI इस तरह से मिलावट के खिलाफ जांच करती है.
देशभर में सैंपलिंग
FSSAI मिलावट के लिए फूड आइटम्स के सैंपल लेकर उनकी क्वालिटी और मिलावट की जांच करती है.
लैब नेटवर्क
जांच के लिए NABL से मान्यता प्राप्त लैब और फूड लैब नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है.
मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब
शुरुआती जांच के लिए मौके पर ही मोबाइल लैब को राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों में तैनात किया गया है.
घर पर जांच की सुविधा
7 प्रमुख खाद्य श्रेणियों में मिलावट की पहचान के लिए फूड टेस्टिंग किट उपलब्ध हैं.
DART मैनुअल
नॉर्मल फूड आइटम्स में मिलावट की पहचान के लिए 44 डोमेस्टिक टेस्ट बताए गए हैं.
रैपिड टेस्टिंग
फूड आइटम्स की जांच RAFT किट्स के जरिए की जाती है.
उपभोक्ता जागरूकता
लोगों को मिलावट पहचानने और लेबल पढ़ने के तरीके बताए जाते हैं.