दिल्ली-महाराष्ट्र समेत 7 राज्यों में नाम कट चुके वोटर्स को बड़ा मौका, EC दे रहा फिर से ये बड़ा मौका
Voter ID Alert: क्या आपका नाम दिल्ली या महाराष्ट्र समेत 7 राज्यों की वोटर लिस्ट से कट गया है? चुनाव आयोग ने ऐसे मतदाताओं के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है. जानिए अपना नाम दोबारा जुड़वाने का पूरा तरीका और जरूरी नियम.
चुनाव आयोग ने सात राज्यों में उन मतदाताओं के लिए एक बहुत बड़ी राहत का ऐलान किया है, जिनके नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे. अगर आपका नाम गैर-मौजूद (Absent), किसी दूसरी जगह चले जाने (Shifted), मृत्यु (Dead) या एक से अधिक जगह नाम दर्ज (Duplicate) होने यानी 'ASDD' की वजह से लिस्ट से बाहर हो गया था, तो अब आपको अपना नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल कराने का एक और मौका मिलेगा.
चुनाव आयोग ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की हालिया सलाह के महज आठ दिन बाद लिया है. इस कदम से लाखों ऐसे लोगों को राहत मिलेगी जो ड्राफ्ट लिस्ट में नाम न देखकर परेशान थे. यह नई व्यवस्था उन सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा रही है, जहाँ स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया चल रही है और अभी तक अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन नहीं हुआ है. इन राज्यों के नाम हैं:
- दिल्ली
- महाराष्ट्र
- हरियाणा
- आंध्र प्रदेश
- झारखंड
- तेलंगाना
- नागालैंड
इन सभी राज्यों में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के दौरान जिनके नाम गलती से या किसी कारणवश एएसडीडी कैटेगरी में डाल दिए गए थे, वे इस प्रक्रिया का लाभ उठा सकते हैं.
अब क्या बदला: पुरानी और नई प्रक्रिया में अंतर
पहले नियम यह था कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए जाते थे, उन्हें फिर से अपना नाम जुड़वाने के लिए 'फॉर्म 6' (Form 6) भरना पड़ता था. फॉर्म 6 आमतौर पर नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक कानूनी फॉर्म है. लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया गया है:
- पुराना तरीका: नए वोटर की तरह फॉर्म 6 भरना और सारी कागजी प्रक्रिया दोबारा शुरू करना.
- नया तरीका: अब प्रभावित मतदाता को केवल अपना भरा हुआ 'एन्यूमरेशन फॉर्म' (Enumeration Form) ही अपने मौजूदा निवास स्थान के चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) या सहायक चुनाव पंजीकरण अधिकारी (AERO) के पास जमा करना होगा.
यदि आपने इस पुनरीक्षण अभियान के दौरान पहले ही फॉर्म 6 जमा कर दिया है, तो आपको फिर से एन्यूमरेशन फॉर्म भरने की कोई जरूरत नहीं होगी.
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लिस्ट चेक करें: नाम कटा है या नहीं?
लोगों को यह जानकारी आसानी से मिल सके कि उनका नाम एएसडीडी सूची में है या नहीं, इसके लिए चुनाव आयोग ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं. एएसडीडी की पूरी लिस्ट निम्नलिखित जगहों पर प्रदर्शित की जाएगी:
- स्थानीय केंद्र: आपके इलाके के मतदान केंद्र (Polling Station), पंचायत भवन, शहरी स्थानीय निकाय कार्यालय (Urban Local Body Offices) और ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) के दफ्तर.
- ऑनलाइन पोर्टल: संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की आधिकारिक वेबसाइटों पर यह लिस्ट आसानी से पढ़ी जाने वाली पीडीएफ (PDF) फॉर्मेट में उपलब्ध रहेगी. इससे मतदाता बिना किसी परेशानी के घर बैठे या अपने नजदीकी सरकारी दफ्तर में जाकर अपना नाम चेक कर सकते हैं.
घर-घर पहुंचेंगे अधिकारी: बीएलओ और राजनीतिक दलों की मदद
इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए चुनाव आयोग ने जमीनी स्तर पर बड़े निर्देश दिए हैं. बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) के साथ मिलकर काम करें. अधिकारी खुद घर-घर जाकर उन मतदाताओं से संपर्क करेंगे जिनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए थे. इसका मकसद प्रभावित लोगों की पहचान कर उनसे फॉर्म भरवाना और नाम दोबारा जुड़वाने में उनकी मदद करना है.
फॉर्म कैसे और कहां जमा करें?
अगर आपका नाम सूची से बाहर हुआ है लेकिन आपने अपना घर या पता नहीं बदला है, तो आप नीचे दिए गए तरीकों से अपना फॉर्म जमा कर सकते हैं:
- ऑफलाइन माध्यम: आप स्वयं या अपने परिवार का कोई भी सदस्य साइन किया हुआ एन्यूमरेशन फॉर्म स्थानीय चुनाव दफ्तर में जमा कर सकता है. इसके साथ आपको एक छोटा सा लिखित बयान भी देना होगा कि आप पहले यह फॉर्म जमा क्यों नहीं कर पाए थे.
- ऑनलाइन माध्यम: अगर आप दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाना चाहते, तो 'ECINET' पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसमें ई-साइन (e-sign) सुविधा का उपयोग करके फॉर्म जमा किया जा सकता है.
पुराना वोटर आईडी (EPIC) नंबर ही रहेगा बरकरार
कई बार मतदाता सूची में दोबारा नाम जुड़वाने पर लोगों को यह डर रहता है कि क्या उनका वोटर आईडी नंबर बदल जाएगा. चुनाव आयोग ने इस आशंका को पूरी तरह खारिज कर दिया है. जिन मतदाताओं का नाम इस प्रक्रिया के तहत फिर से लिस्ट में जोड़ा जाएगा, उनका पुराना 'इलेक्टर फोटो आइडेंटिटी कार्ड' यानी 'एपिक (EPIC) नंबर' ही बना रहेगा. नया नंबर जारी करने की जगह पुराने कार्ड को ही फिर से बहाल कर दिया जाएगा, जिससे सरकारी कागजातों में किसी तरह का भ्रम न रहे.
आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख क्या है?
चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए पत्र में अलग से कोई अंतिम तारीख या डेडलाइन नहीं दी गई है. हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, ये फॉर्म संबंधित राज्यों में चल रही 'दावे और आपत्तियां' की समय सीमा के दौरान स्वीकार किए जाएंगे. इसलिए प्रभावित मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने राज्य की दावे-आपत्ति की तारीखों का ध्यान रखें और जल्द से जल्द अपना फॉर्म जमा कर दें.
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