Ramlila में राम-भरत मिलाप देख नम हुईं रामभक्तों की आंखें, केवट प्रसंग ने मोहा मन; नशे से दूर रहने का दिया संदेश
सिरसा में सिया राम चैरिटेबल ट्रस्ट की रामलीला के छठे दिन राम-भरत मिलाप और केवट प्रसंग के भावुक मंचन ने दर्शकों का मन मोह लिया. वहीं कलाकारों ने युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया.
Ramlila 2026: धर्म और आस्था के पर्व नवरात्र के अवसर पर हरियासिरसा में रामलीलाओं का आयोजन किया जा रहा है. इसी कड़ी में सिया राम चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से रामलीला का मंचन किया गया. रामलीला में भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़े प्रसंग का भावपूर्ण चित्रण किया गया. कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से दर्शकों के सामने रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंग को जीवंत कर दिया. रामलीला देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया.
रामलीला के दौरान भरत और माता कैकई के बीच हुए संवाद का मंचन मुख्य आकर्षण रहा. इस प्रसंग में माता कैकई द्वारा राजा दशरथ से भगवान श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगने की घटना को दर्शाया गया. इसके बाद भगवान श्रीराम के वनवास जाने के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया. कलाकारों ने संवाद और अभिनय के जरिए रामायण की मर्यादा, त्याग और पारिवारिक संबंधों का संदेश देने का प्रयास किया.
रामलीला के माध्यम से लोगों को धार्मिक और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है. सिया राम चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस रामलीला में लोगों को नशे से दूर रहने की प्रेरणा दी गई. आयोजकों का उद्देश्य धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाना भी है. उनका कहना है कि नशा व्यक्ति के साथ-साथ पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है. ऐसे में युवाओं को नशे से दूर रहकर बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रेरित करना जरूरी है.
ट्रस्ट के प्रबंधकों के अनुसार, सिया राम चैरिटेबल ट्रस्ट धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के साथ जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए भी काम करता है. ट्रस्ट की ओर से गरीब और जरूरतमंद महिलाओं की मदद करने का प्रयास किया जाता है, ताकि उन्हें कठिन परिस्थितियों में सहयोग मिल सके. आयोजकों का कहना है कि समाज सेवा और धार्मिक आस्था एक-दूसरे के पूरक हैं और प्रत्येक व्यक्ति को जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए.
वहीं, सिरसा में दशहरे को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं. आगामी 20 अक्टूबर को शहर में तीन अलग-अलग स्थानों पर दशहरा पर्व मनाया जाएगा. इस दौरान रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित होने की संभावना है, जिन्हें लेकर लोगों में उत्साह बना हुआ है. कुल मिलाकर, रामलीला के मंचन के जरिए जहां लोगों को भगवान श्रीराम के आदर्शों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है. वहीं सामाजिक बुराइयों से दूर रहने और जरूरतमंदों की सहायता करने का संदेश भी दिया जा रहा है.
सिया राम चैरिटेबल ट्रस्ट के संरक्षक अजय एलाबादी ने बताया कि सिया राम चैरिटेबल ट्रस्ट की और से हर साल रामलीला का आयोजन करती है और इस बार भी बड़ी धूमधाम से रामलीला का मंचन कर रही है. उन्होंने कहा कि पहले दशहरा पर मशाल से रावण दहन किया जाता था, लेकिन अब सिया राम चैरिटेबल ट्रस्ट 100 से 150 फुट की दुरी से तीर से रावण दहन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सिया रामलीला में हनुमान आकाश से धरती पर आएंगे.
सिया राम चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रधान राजेंद्र सिंह ने बताया कि रामलीला के छठे दिन मंच पर ऐसे मार्मिक और भावुक दृश्यों का मंचन किया गया, जिसने पंडाल में बैठे हर एक रामभक्त को अंदर तक झकझोर कर रख दिया. भाई के प्रति प्रेम, कर्तव्य और पारिवारिक वियोग की कथा ने दर्शकों की आंखों को नम कर दिया. रामलीला के छठे दिन के मंचन की शुरुआत उस अत्यंत दुखद प्रसंग से हुई जब भरत जी अपने ननिहाल से अयोध्या वापस लौटते हैं. अयोध्या पहुंचने पर उन्हें जब यह पता चलता है कि उनके बड़े भाई भगवान श्री राम को चौदह वर्ष का वनवास हो गया है और इस दुख को सहन न कर पाने के कारण उनके पिता महाराज दशरथ का प्राणांत हो चुका है तो उनका संसार उजड़ सा जाता है. पिता के वियोग और भ्राता के वन गमन का यह आघात भरत सहन नहीं कर पाते. वे अपनी माता कैकेयी के समक्ष अपना सारा आक्रोश व्यक्त करते हैं और राजपाट ठुकराते हुए अपने भाई के प्रति अटूट प्रेम का परिचय देते हैं. इसके पश्चात मंच पर प्रसिद्ध 'केवट प्रसंग' का बेहद सुंदर और जीवंत मंचन किया गया. जब श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण गंगा तट पर पहुंचते हैं तो निषादराज और केवट के साथ संवाद का दृश्य दर्शकों के चेहरों पर मुस्कान ले आता है. केवट का अपनी अनूठी भक्ति से प्रभु श्री राम के चरण धोने और उन्हें प्रेमपूर्वक नदी पार कराने का दृश्य हर किसी का मन मोह लेता है. छठे दिन की रामलीला का सबसे मुख्य और चरम आकर्षण 'श्री राम-भरत मिलाप' का प्रसंग रहा. चित्रकूट के पावन वन में जब भरत जी अपने भाई राम को मनाने और वापस अयोध्या ले जाने के लिए पहुंचते हैं तो दोनों भाइयों का मिलन देखकर वहां मौजूद हर दर्शक की आंखें नम हो गईं. भ्रातृ-प्रेम (भाई-भाई के प्रेम) का यह अनूठा उदाहरण देख पूरा पंडाल 'जय श्री राम' के नारों से गूंज उठा. कलाकारों ने अपने शानदार और जीवंत अभिनय से इस दृश्य को अमर बना दिया.
श्री राम के रूप में अभिनय करने वाले कलाकार ने बताया कि आने वाले दिनों में रावण वध और लंका दहन जैसे मुख्य आकर्षणों का मंचन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि रामलीला के प्रति लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए रामलीला के मंचन से संदेश दिया जा रहा है.
(सिरसा से विजय कुमार की रिपोर्ट)