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Karnal News: देश में गेहूं उत्पादन ने एक बार फिर नया रिकॉर्ड बनाया है. कृषि वर्ष 2025-26 में भारत का गेहूं उत्पादन करीब 121 मिलियन टन तक पहुंच गया है. अब देश का अगला लक्ष्य गेहूं उत्पादन को 125 मिलियन टन तक पहुंचाना है. चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है. उन्नत बीजों, आधुनिक कृषि तकनीकों और जलवायु के अनुकूल किस्मों के विकास से भारत गेहूं उत्पादन में आत्मनिर्भरता को और मजबूत करने के साथ निर्यात की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है.
यह जानकारी आज भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल के निदेशक डॉ ओमवीर सिंह ने संस्थान में आयोजित रबी किसान मेले के दौरान मीडिया को दी. मेले में हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे. किसानों ने संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित गेहूं एवं जौ की उन्नत किस्मों के बीज प्राप्त करने के साथ आधुनिक खेती की तकनीकों की जानकारी भी ली.
संस्थान के निदेशक डॉ. ओमवीर सिंह ने बताया कि मेले में विभिन्न राज्यों से 700 से अधिक किसान पहुंचे हैं, जिन्हें गेहूं की उन्नत किस्मों के बीज उपलब्ध करवाए गए. इनमें डीबीडब्ल्यू-327, डीबीडब्ल्यू-187, डीबीडब्ल्यू-303, डीबीडब्ल्यू-372 और डीबीडब्ल्यू-373 जैसी किस्में शामिल हैं. इन किस्मों को बेहतर उत्पादन क्षमता, जलवायु के प्रतिकूल प्रभावों को सहन करने और कम पानी में अच्छी पैदावार देने की विशेषताओं के कारण किसानों के लिए उपयोगी माना जा रहा है.
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि गेहूं की बिजाई से पहले मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं, ताकि मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों के अनुसार खाद एवं उर्वरकों का इस्तेमाल किया जा सके. उन्होंने प्राकृतिक खाद के अधिक उपयोग और वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि उन्नत किस्मों और बेहतर कृषि प्रबंधन के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती की लागत को कम करना भी जरूरी है.
गेहूं उत्पादन में 125 मिलियन टन का लक्ष्य
डॉ. ओमवीर सिंह ने कहा कि देश ने पिछले वर्ष गेहूं उत्पादन में रिकॉर्ड कायम किया और वर्ष 2025-26 में उत्पादन करीब 121 मिलियन टन तक पहुंचा. अब अगला लक्ष्य 125 मिलियन टन उत्पादन हासिल करना है. इसके लिए उन्नत बीजों के इस्तेमाल, वैज्ञानिक अनुसंधान, संतुलित पोषण प्रबंधन और किसानों तक नई तकनीकों की पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता है. पोषक तत्वों से भरपूर तथा जलवायु के अनुकूल किस्में इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.
निदेशक ने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित गेहूं की उन्नत किस्मों की देश के 60 प्रतिशत से अधिक गेहूं क्षेत्र में बिजाई हो रही है.
जिंक, आयरन और प्रोटीन से भरपूर किस्मों पर जोर
रबी किसान मेले में गेहूं एवं जौ की उन्नत किस्मों के बीजों के साथ आधुनिक उत्पादन तकनीकों का प्रदर्शन किया गया. किसानों को डिजिटल कृषि, फसल प्रबंधन, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और कृषि क्षेत्र में हो रहे नवीनतम अनुसंधान की जानकारी दी गई. वैज्ञानिकों द्वारा विकसित ऐसी किस्मों पर भी जोर दिया गया, जिनमें जिंक, आयरन और प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों की बेहतर मात्रा उपलब्ध हो और जिनसे किसानों को अच्छी पैदावार मिल सके.
छिलका रहित जौ की किस्म ने खींचा ध्यान
मेले में गेहूं के साथ जौ की उन्नत किस्में भी किसानों के आकर्षण का केंद्र रहीं. विशेष रूप से छिलका रहित जौ की किस्म को लेकर किसानों ने रुचि दिखाई. इसके अलावा किसानों को जौ उत्पादन की आधुनिक तकनीकों और फसल की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी गई.
मेले में किसानों द्वारा किए गए कृषि नवाचारों, महिलाओं एवं युवाओं के उद्यमिता विकास तथा कृषि आधारित रोजगार की संभावनाओं से जुड़ी गतिविधियां भी शामिल रहीं. कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ना और खेती को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाना रहा.
किसानों ने कहा- उन्नत बीजों से बढ़ेगी पैदावार
मेले में पहुंचे किसानों ने कहा कि भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित उन्नत किस्मों के बीज प्राप्त करने और वैज्ञानिकों से सीधे जानकारी लेने का अवसर मिला है. किसानों के अनुसार, कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली और बदलते मौसम का सामना करने में सक्षम किस्में खेती के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती हैं.
रबी किसान मेले में एक हजार से अधिक किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों, बीज उत्पादक संगठनों और विभिन्न बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों की भागीदारी रही. मेले के माध्यम से किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद को बढ़ावा मिला. यह आयोजन उन्नत बीजों के प्रसार, कृषि नवाचारों और टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा.
(करनाल से कमरजीत सिंह की रिपोर्ट)